तृणमूल कांग्रेस के सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय और सांसद शताब्दी रॉय ने शनिवार को नई दिल्ली में मोतीलाल नेहरू मार्ग स्थित केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास में उनसे मुलाकात की। तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद सियासी अटकलें तेज हो गईं। बताया जा रहा है कि इन दोनों सांसदों का नाम कथित बागी गुट की सूची में शामिल नहीं था। अब कयासबाजी इस बात की चल रही है कि क्या यह लोग भी बागी गुट का हिस्सा बनेंगे?  

 

सुदीप बंद्योपाध्याय कोलकाता उत्तर लोकसभा सीट से सांसद हैं। बगावत के बीच बंगाल चुनाव प्रभारी रहे भूपेंद्र यादव के साथ उनकी मुलाकात बेहद अहम माना जा रहा है।

 

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सुदीप बंद्योपाध्याय की मुलाकात पर टीएमसी ने प्रतिक्रिया दी। प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा, 'तापस रॉय और सजल घोष जैसे काबिल नेताओं ने सुदीप दा की निजी असुरक्षा और पार्टी के भीतर सत्ता और पद की उनकी लालसा के कारण पार्टी छोड़ी। मुझे पहले उनके खिलाफ और तापस दा जैसे वरिष्ठ नेताओं के पक्ष में बोलने पर पार्टी से सस्पेंड कर दिया गया था। अब लीडरशिप को यह एहसास हो जाना चाहिए कि उन्होंने पहले किस तरह के व्यक्ति का समर्थन किया था।'

जो हो रहा, अच्छा हो रहा: तापस रॉय

उधर, तापस रॉय ने भी भूपेंद्र यादव और सुदीप बंद्योपाध्याय के बीच हुई मुलाकात पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'खुद को बचाने के लिए वे हमेशा सत्ता में रहने वालों के साथ रहे हैं। उन्होंने न तो जनता के लिए और न ही किसी राजनीतिक दल के लिए कोई काम किया है। ममता बनर्जी को अब एहसास हो रहा है कि असल में उनके साथ कौन खड़ा है? ऐसे लोगों की खातिर कई सच्चे राजनीतिक कार्यकर्ताओं का अपमान किया गया और उन्हें किनारे किया गाय। जो कुछ भी हो रहा है, वह अच्छे के लिए ही हो रहा है।'

 

बता दें कि तापस रॉय औरर सजल घोष पहले टीएमसी का हिस्सा। मगर अब बीजेपी में है। सुवेंदु अधिकारी की सरकार में तापस रॉय उद्योग मंत्री और सजल घोष बारानगर से विधायक हैं। 

 

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19 सांसद पहले ही कर चुके बगावत

15 जून को टीएमसी के बागी सांसदों की लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के साथ मुलाकात प्रस्तावित है। उससे पहले 14 जून को बंगाल के सीएम सुवेंदु अधिकारी के साथ भी बागी सांसद बैठक करेंगे। शुक्रवार को बागी सांसद जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया ने कहा था कि उनके पास 19 सांसदों का समर्थन है। उनका ही गुट असली टीएमसी है। लोकसभा अध्यक्ष को इसी रूप में उनके गुट को मान्यता देनी चाहिए। बागी गुट ने सदन में बैठने की अलग जगह भी मांगी है। बागी गुट की अगुवाई काकोली घोष दस्तीकार कर रही हैं। 

विधानसभा में भी 'अपनों' ने छोड़ा टीएमसी का साथ

लोकसभा के अलावा टीएमसी को बंगाल विधानसभा में भी बगावत का सामना करना पड़ा रहा है। 80 में से 64 विधायकों ने अपना अलग गुट बना लिया है। विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्र बोस ने गुट की अगुवाई करने वाले ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता नियुक्त किया है। हालांकि टीएमसी ने कलकत्ता हाई कोर्ट में विधानसभा अध्यक्ष के फैसले को चुनौती दी है।पिछले सुनवाई में टीएमसी को फिलहाल कोई अंतरिम राहत नहीं मिली है। अगली सुनवाई 16 जून को होगी। 18 जून को विधानसभा की बैठक प्रस्तावित है।