उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। बयानबाजी और एक-दूसरे के खेमे में सेंधमारी के दावों के बीच बीजेपी ने राज्यसभा चुनाव के लिए नौवां पर्चा खरीद लिया है। इसे समाजवादी पार्टी के तीसरे पर्चे के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं, दोनों दलों की ओर से एक-दूसरे के विधायकों के संपर्क में होने के दावों ने चुनावी मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है।

 

पिछले दिनों समाजवादी पार्टी ने तीसरा पर्चा खरीदकर बीजेपी खेमे को चुनौती दी थी। इसके बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने दावा किया कि बीजेपी के कई विधायक उनके संपर्क में हैं।

सपा के 25 विधायक संपर्क में: केशव प्रसाद मौर्य

अखिलेश यादव के बयान के बाद उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने दावा किया कि सपा के 25 विधायक बीजेपी के संपर्क में हैं और वे कभी भी साइकिल से उतर सकते हैं। दूसरी ओर अखिलेश यादव ने कहा कि जो लोग आना चाहते हैं, उनका सम्मान किया जाएगा। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने भी माना कि विपक्ष के कई विधायक पार्टी के संपर्क में हैं। इन दावों और बयान के बाद राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल बढ़ गई है।

संख्याबल में बीजेपी के पास आठ सीटों की स्थिति

विधानसभा में मौजूदा संख्याबल के आधार पर बीजेपी अधिकतम आठ प्रत्याशियों को राज्यसभा भेजने की स्थिति में है, जबकि समाजवादी पार्टी दो प्रत्याशियों को भेज सकती है। ऐसे में सपा के तीन और बीजेपी के नौ पर्चे खरीदने से दोनों दलों के बीच मनोवैज्ञानिक दबाव की राजनीति तेज हो गई है।

 

राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया 29 सितंबर से शुरू हो चुकी है। सपा के दो प्रत्याशी नामांकन कर चुके हैं, जबकि बीजेपी ने अभी तक अपने प्रत्याशियों के नामों का औपचारिक एलान नहीं किया है।

 

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बीजेपी में उम्मीदवारों को लेकर मंथन

बीजेपी में राज्यसभा के दावेदारों को लेकर भी अलग-अलग चर्चाएं चल रही हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी की राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी , हरीश द्विवेदी समेत कई नामों पर मंथन की चर्चा है। पार्टी के भीतर एक वर्ग का मानना है कि यदि कुछ वरिष्ठ नेताओं को 2029 के लोकसभा चुनाव में उतारने की तैयारी है तो राज्यसभा के लिए नए चेहरों को मौका दिया जा सकता है। अरुण सिंह और सुधांशु त्रिवेदी को छोड़कर मौजूदा कई राज्यसभा सदस्यों को दोबारा अवसर नहीं दिए जाने की चर्चा भी इसी संदर्भ में हो रही है।

जातीय गणित पर भी निगाह

राज्यसभा के संभावित उम्मीदवारों को लेकर जातीय समीकरण भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हाल में विधान परिषद की सात सीटों पर सवर्ण समाज की अधिक भागीदारी के बाद राज्यसभा के संभावित समीकरणों में ओबीसी, ब्राह्मण, क्षत्रिय और अनुसूचित जाति के चेहरों को प्रतिनिधित्व देने की चर्चा है। इसी क्रम में दो ओबीसी, एक ब्राह्मण, एक क्षत्रिय और दो अनुसूचित जाति के चेहरों को लेकर भी पार्टी के भीतर संभावनाओं पर चर्चा की जा रही है। पासी और कोरी समाज से संभावित चेहरों के नाम भी चर्चा में बताए जा रहे हैं।

 

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एक-एक पर्चे से बढ़ता जा रहा चुनावी रोमांच

राज्यसभा चुनाव में अभी प्रत्याशियों की तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं हुई है, लेकिन सपा और बीजेपी की ओर से खरीदे गए पर्चों और दोनों तरफ से किए जा रहे विधायकों के संपर्क के दावों ने मुकाबले को रोचक बना दिया है। अब निगाहें बीजेपी के प्रत्याशियों के एलान और नामांकन पर टिकी हैं।