साल 2012 में लोकसभा के सांसद रहते हुए अखिलेश यादव मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंच गए थे। 2022 में वह विधानसभा का चुनाव लड़कर विधायक बने लेकिन मुख्यमंत्री की कुर्सी तक नहीं पहुंच पाए। अब ऐसा लगता है कि अखिलेश यादव इसे टोटका मानने लगे हैं। उन्होंने खुद ही कहा है कि वह तभी सीएम बनते हैं जब चुनाव नहीं लड़ते। ऐसे में उन्होंने लगभग इशारा कर दिया कि वह विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ेंगे। इस पर सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के तंज कसते हुए लिखा है कि अखिलेश यादव दूसरों को चुनौती देते-देते खुद मैदान छोड़कर भाग खड़े हुए हैं।
हाल ही में हुए विधान परिषद चुनाव में वाराणसी में मिली जीत के बाद अखिलेश यादव मंगलवार को वाराणसी पहुंचे थे। इसी मौके पर उनसे पूछा गया कि उनकी पार्टी वाराणसी की कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी। एक पत्रकार ने इसी बातचीत के दौरान अखिलेश यादव के चुनाव लड़ने पर भी सवाल पूछा और फिर जो अखिलेश यादव ने जवाब दिया अब वह चर्चा का विषय बन गया है।
क्या बोले अखिलेश यादव?
एक पत्रकार ने अखिलेश यादव को सलाह दी कि उन्हें वाराणसी से ही चुनाव लड़ जाना चाहिए। उन्होंने इसी सवाल के जवाब में कहा, 'यह पत्रकार शायद जानता नहीं है। मैं तो मानता था कि काशी के लोग बहुत धार्मिक हैं। शुभ समय क्या है या खराब समय क्या है, उन चीजों का बहुत ध्यान रखते हैं। हम मुख्यमंत्री तब बनते हैं जब चुनाव नहीं लड़ते। इसलिए वही काम करेंगे जो हमारे लिए शुभ होगा।'
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उन्होंने आगे कहा, 'सीधे लोकसभा से शपथ। पिछली बार कहां बने थे बताओ?' कुछ महीने पहले ही अखिलेश यादव ने यह भी कहा था कि वह अपने पंडित जी की सारी बातें मानेंगे। लंबे बालों के साथ दिख रहे अखिलेश यादव ने कहा था कि अगर पंडित जी कहेंगे तो वह बाल कटाएंगे, अगर वह बाल बढ़ाने को कहेंगे तो बढ़ाएंगे। अखिलेश ने आगे कहा था, 'अगर पंडितजी कहेंगे कि दाहिने पैर से निकलना है तो हम दाएं पैर से निकलेंगे। कहेंगे कि आज नहीं निकलना है तो हम नहीं निकलेंगे।'
इसके पीछे अखिलेश यादव का कहना था कि उनके पंडितजी ने उनसे कुछ लिखने को कहा था। अखिलेश ने कहा कि उन्होंने जो दो बातें लिखीं, वे पंडितजी ने बिना देखे बता दीं इसलिए वह उनकी बात मानेंगे।
BJP ने कसा तंज
अखिलेश के इसी बयान पर तंज कसते हुए BJP यूपी ने लिखा है, 'अखिलेश यादव दूसरों को चुनावी चुनौती देते-देते खुद मैदान छोड़कर भाग खड़े हुए!सपाई भगौड़े होते हैं ये तो सब जानते थे लेकिन सपा मुखिया की तो चुनौती स्वीकार होते ही ऐसी हवा निकली है की बहानेबाजी के पर्चे बनाने लगे हैं। अखिलेश जी, इसलिए कहा जाता है की मुंह में उतना ही भरो जितना चबा सको…वरना दुर्गति हो जाती है!'
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क्या है बिना चुनाव लड़े CM बनने का फार्मूला?
अगर उत्तर प्रदेश का इतिहास देखें तो 2007 के विधानसभा चुनाव से लेकर अभी तक हुए 4 में 3 बार वही नेता मुख्यमंत्री बना है जिसने विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ा। 2007 में जब मायावती सत्ता में आईं तब वह राज्यसभा की सदस्य थीं। मुख्यमंत्री बनने के लिए उन्होंने राज्यसभा से इस्तीफा दिया और विधान परिषद की सदस्य बनीं। 2012 में अखिलेश यादव जब मुख्यमंत्री बने तब वह भी विधानसभा का चुनाव नहीं लड़े थे। वह लोकसभा के सांसद थे। तब उन्होंने भी सांसदी छोड़ी और विधान परिषद के सदस्य बन गए।
इसी तरह 2017 में सत्ता में आए योगी आदित्यनाथ ने भी विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ा था। वह गोरखपुर से लोकसभा के सांसद थे। सीएम बनने के बाद वह भी विधान परिषद के ही सदस्य बने। हालांकि, 2022 में वह गोरखपुर सदर सीट से विधानसभा का चुनाव लड़े और जीतकर विधायक और फिर से सीएम बने। 2022 में अखिलेश यादव विधानसभा का चुनाव लड़े, विधायक बने लेकिन उनकी पार्टी सत्ता से दूर रह गई। अखिलेश यादव 2024 में लोकसभा का चुनाव लड़कर सांसद बन गए और फिलहाल कन्नौज से सांसद हैं। अब उनका कहना है कि सीधे सांसद रहते हुए ही चुनाव में उतरेंगे और जीतने के बाद देखेंगे।
आपको यह भी बता दें कि मायावती, अखिलेश यादव और योगी आदित्यनाथ से पहले सिर्फ राम प्रकाश गुप्ता ही ऐसे नेता थे जो सीएम बने थे और विधान परिषद के सदस्य थे। उनसे पहले के सभी मुख्यमंत्री विधानसभा के सदस्य थे। अब तक के इतिहास में योगी आदित्यनाथ 21वीं मुख्यमंत्री हैं और इन 21 में 4 नेता ही ऐसे हैं जो कम से कम एक बार MLC रहकर ही मुख्यमंत्री बने हैं।
