12 अगस्त को साल का आखिरी सूर्य ग्रहण लगने वाला है। इसके साथ ही हिंदू पंचांग के मुताबिक 12 अगस्त को ही अमावस्या की तिथि है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, अमावस्या एक ऐसी तिथि है जब व्यक्ति को पितरों को याद करना चाहिए, साथ ही दान-पुण्य करना चाहिए। इसी के साथ 12 अगस्त को सूर्य ग्रहण शुरू होगा। इस दौरान व्यक्ति को कुछ खास नियमों को मानना बेहद जरूरी है।

 

धार्मिक जानकारों के मुताबिक, 12 अगस्त को साल का दूसरा और साल का आखिरी सूर्य ग्रहण लगने वाला है। इसके अलावा सावन महीने की अमावस्या तिथि को हरियाली अमावस्या भी कहा जाता है। अब सवाल उठता है कि कल सूर्य ग्रहण कितने बजे से शुरू होगा? साथ ही सवाल उठता है कि 12 अगस्त को अमावस्या कितने बजे शुरू होगी? इसके अलावा सवाल उठता है कि इस दिन किन बातों का खास ख्याल रखना चाहिए।

 

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सूर्य ग्रहण का समय

 

12 अगस्त को सूर्य ग्रहण रात को 9 बजकर 4 मिनट से शुरू होगा। इसके बाद रात के 1 बजकर 27 मिनट पर सूर्य ग्रहण खत्म होगा। धार्मिक जानकारों के मुताबिक, सूर्य ग्रहण से 12 घंटे पहले से ही सूतक काल शुरू हो जाता है। इस दौरान भक्तों को कई शुभ काम नहीं करने चाहिए। हालांकि, 12 अगस्त का सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा, इसलिए 12 अगस्त को सूतक काल नहीं लगेगा। साथ ही मंदिरों के कपाट भी बंद नहीं होंगे। इसका मतलब साफ है कि 12 अगस्त के सूर्य ग्रहण का प्रभाव भारत में नहीं पड़ेगा। 12 अगस्त का सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा। इस सूर्य ग्रहण को स्पेन, ग्रीनलैंड, पुर्तगाल और आइसलैंड में देखा जाएगा।

 

कितने बजे लगेगा अमावस्या

 

हिंदू पंचांग के मुताबिक, 12 अगस्त को सूर्योदय से पहले ही अमावस्या तिथि शुरू हो जाएगी। धार्मिक जानकारों के अनुसार, यह अमावस्या 11 अगस्त की रात 1:52 बजे से शुरू होगी, जो 12 अगस्त की रात 11:06 बजे खत्म होगी।

 

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सावन महीने की अमावस्या तिथि एक ऐसा समय है जब व्यक्ति को सिर्फ देवी-देवताओं की पूजा-पाठ और आराधना ही नहीं करनी चाहिए, बल्कि अपना आत्ममंथन और पितरों को याद करना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सावन महीने की अमावस्या पर किए गए कामों का फल लोगों को दोगुना मिलेगा।

 

 क्या करें?

12 अगस्त के दिन एक तरफ सूर्य ग्रहण लगने वाला है लेकिन उसका प्रभाव भारत में नहीं पड़ेगा। 12 अगस्त को पूजा-पाठ पर वर्जित नहीं होगा।

 

1. इस दिन अमावस्या है, इसलिए सुबह उठकर स्नान करें। उसके बाद दक्षिण दिशा की ओर पितरों को याद करते हुए जल अर्पित करें। साथ ही अपने परिवार के पूर्वजों को मन में नाम लेकर याद करें।

 

2. इस दिन पितरों के नाम से जरूरतमंदों को आटा, चावल, दाल और कपड़े का दान करें, जिससे परिवार में शांति बनी रहेगी।

 

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3. सावन महीने की अमावस्या में शिव भगवान की खास कृपा बरसती है। इस वजह से भक्तों को शिव जी की पूजा-अर्चना करनी चाहिए। पूजा करने के बाद 108 बार 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करें।

 

4.सावन के महीने की अमावस्या को हरियाली अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन पौधे खरीदने चाहिए।

 

5. इस दिन अपनी बुरी आदतों को छोड़ने का संकल्प लें।

 

नोट: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।