सनातन धर्म में दिवाली का पर्व बेहद खास माना जाता है। इस साल 8 नवंबर को सभी लोग इस त्योहार को बड़े धूमधाम से मनाएंगे। यह पर्व मिठाइयों, रोशनी और उत्सव का प्रतीक है। दिवाली का यह दिन सिर्फ हिंदू धर्म के लिए खास नहीं है, बल्कि हिंदू धर्म के अलावा 3 और धर्मों के लिए भी खास है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बौद्ध, सिख और जैन धर्म से जुड़ी कुछ खास घटनाएं इसी दिन हुई थीं। इसी वजह से इन तीनों धर्मों में भी इस दिन को त्योहार के तौर पर मनाया जाता है।
हिंदू मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान राम 14 साल के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे। भगवान राम के अयोध्या लौटने की खुशी में देशभर के लोग दीये जलाकर दिवाली का त्योहार धूमधाम से मनाते हैं। अब सवाल है कि दिवाली के दिन ही बौद्ध, जैन और सिख धर्म से जुड़ा ऐसा क्या किस्सा हुआ था कि इन तीनों धर्मों के लिए दिवाली का दिन खास है।
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3 धर्मों के लिए क्यों खास है दिवाली?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बौद्ध, जैन और सिख धर्म के लिए दिवाली बेहद खास है। इसी दिन इन तीनों धर्मों से जुड़े कुछ खास किस्से हुए थे, जिनका उत्सव तीनों धर्मों के लोग अलग-अलग तरीके से मनाते हैं।
जैन में मनाया जाता है निर्वाण दिवस
जैन धर्म में दिवाली का त्योहार निर्वाण दिवस के तौर पर मनाया जाता है। इसी दिन जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर को मोक्ष प्राप्त हुआ था। इसी वजह से जैन धर्म के लोग इस दिन को अज्ञान पर ज्ञान की जीत का प्रतीक मानते हैं। इसके साथ ही लोगों का मानना है कि दिवाली के दिन पूरी दुनिया दीयों की रोशनी से रोशन हो गई थी, क्योंकि इसी दिन महावीर जी को मोक्ष प्राप्त हुआ था। इसी मान्यता के आधार पर जैन धर्म के लोग शाम को दीये जलाते हैं। इसके अलावा, कई लोग छोटी दिवाली, दिवाली और अगले दिन व्रत रखते हैं और भगवान महावीर के उपदेशों को याद करते हैं।
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गौतम बुद्ध कपिलवस्तु गए
बौद्ध धर्म की मान्यताओं के अनुसार, जब सिद्धार्थ गौतम बुद्ध बने, तब उनके पिता ने उन्हें कपिलवस्तु बुलाया था। गौतम बुद्ध अपने पिता के बुलावे पर कपिलवस्तु गए थे। गौतम बुद्ध के स्वागत के लिए पूरे कपिलवस्तु को दीपों से सजाया गया था। इसी प्रसंग के चलते बौद्ध धर्म के लोग भी इस दिन दीये जलाकर त्योहार मनाते हैं।
सिख धर्म के लिए क्यों है खास?
सिख धर्म के लोगों का मानना है कि जब भारत में मुगल शासन था, तब जहांगीर ने सिख धर्म के गुरु हरगोबिंद जी को ग्वालियर के किले में बंदी बना लिया था। उनके साथ हिंदू धर्म के 52 राजाओं को भी बंदी बना लिया गया था। कुछ समय बाद जहांगीर ने गुरु हरगोबिंद जी के साथ-साथ 52 राजाओं को भी रिहा कर दिया। इसी घटना की वजह से दिवाली के दिन सिख धर्म में बंदी छोड़ दिवस मनाया जाता है। इस दिन सिख धर्म के लोग परिवार और दोस्तों के साथ उत्साह से त्योहार मनाते हैं।
नोट: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।
