सनातन धर्म में पितृ पक्ष का बेहद खास महत्व है। पितृ पक्ष के दौरान व्यक्ति अपने पितरों को याद करते हैं। पितरों की आत्मा की शांति के लिए कुछ खास प्रकार की परंपराएं निभाई जाती हैं। इस बार पितृ पक्ष की शुरुआत भाद्रपद महीने के आखिरी हफ्ते से होगी, जो कि अश्विन महीने के कुछ हफ्तों तक रहेगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पितृ पक्ष के दौरान लोगों के पूर्वज उन्हें आशीर्वाद देते हैं। इस वजह से व्यक्ति को इस दौरान न सिर्फ पितरों को याद करना चाहिए, बल्कि पितरों के लिए तर्पण अर्पित करना चाहिए।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, पितृ पक्ष के दौरान तर्पण अर्पित करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है। इसके साथ ही व्यक्ति पर पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है। इसीलिए व्यक्ति को तर्पण अर्पित करने की परंपरा निभानी चाहिए। तर्पण के अलावा व्यक्ति को पूर्वजों के लिए भोजन का दान करना चाहिए। अब सवाल उठता है कि पितृ पक्ष की शुरुआत कब से होगी, साथ ही सवाल उठता है कि तर्पण करने का शुभ मुहूर्त क्या है? आइए जानते हैं।
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कब से शुरू होगा पितृ पक्ष?
हिंदू पंचांग के मुताबिक, 27 सितंबर 2026 से पितृ पक्ष की शुरुआत होगी। हालांकि, धार्मिक जानकारों के हिसाब से 26 सितंबर की पूर्णिमा से ही श्राद्ध कर्म की शुरुआत हो गई है। जिसके बाद 27 सितंबर से पितृ पक्ष की तिथियां शुरू हो जाएंगी। पंचांग के मुताबिक, पितृ पक्ष 10 अक्टूबर को खत्म हो जाएगा।
धार्मिक जानकारों के अनुसार, व्यक्ति को पितृ पक्ष के दौरान अपने पितरों की मृत्यु तिथि के दिन तर्पण और श्राद्ध की परंपरा निभानी चाहिए। धार्मिक जानकारों के मुताबिक, जिन लोगों को अपने पितरों की मृत्यु तिथि याद न हो, उन लोगों को सर्वपितृ अमावस्या के दिन पितरों की याद में तर्पण करना चाहिए। इस बार सर्वपितृ अमावस्या की तिथि 10 अक्टूबर को है।
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तर्पण करने का समय
धार्मिक मान्यता के अनुसार, व्यक्ति को पितृ पक्ष के दौरान अपने पितरों को याद कर तर्पण करना चाहिए। मान्यता है कि तर्पण करने से पितरों की आत्मा को मोक्ष मिलता है, साथ ही व्यक्ति को पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। धार्मिक जानकारों के मुताबिक, व्यक्ति को तर्पण की विधि सुबह नहीं करनी चाहिए। इसके बजाय व्यक्ति को दोपहर में तर्पण करना चाहिए।
पितृ पक्ष के दौरान दो ऐसे मुहूर्त हैं, जब व्यक्ति को तर्पण करना चाहिए। पहला शुभ मुहूर्त सुबह 11:53 बजे से लेकर दोपहर 12:43 बजे तक होगा। इसके बाद दूसरा शुभ मुहूर्त दोपहर 1 बजे से लेकर 3:30 बजे तक होगा।
पितृ पक्ष में तर्पण की विधि
पितृ पक्ष के दौरान व्यक्ति को पीतल के लोटे में जल लेना चाहिए। इसके अलावा काले तिल, जौ, अक्षत, सफेद फूल और खीरा एक थाली में रखें। उसके बाद दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके जल अर्पित करें। इसी के साथ बाकी सामग्री भी अर्पित करें। तर्पण की प्रक्रिया अक्सर पुरुषों द्वारा की जाती है, जिन्हें यह प्रक्रिया सफेद धोती पहनकर करनी चाहिए।
नोट: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।
