भगवान श्री राम की नगरी अयोध्या में 10वां दीपोत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है। सरयू नदी के किनारे स्थित 56 घाट शनिवार की शाम एक साथ जगमगा उठे। उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति विभाग ने एक शोभायात्रा भी निकाली। बाबरी मामले के पूर्व वादी इकबाल अंसारी ने शोभायात्रा पर पुष्प वर्षा की। अलग-अलग 21 झांकियों से अयोध्या का दृश्य मनोरम और भक्तिमय हो गया।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने 10वें दीपोत्सव की शुरुआत की। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया। उससे पहले सीएम योगी और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने भगवान श्रीराम का राजतिलक किया और माता सीता, लक्ष्मण, भरत और गुरु वशिष्ठ को तिलक लगाकर आरती भी की।
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30 लाख दीपों से जगमगाया अयोध्या
10वें दीपोत्सव में एक साथ 56 घाटों पर 30 लाख से अधिक दीप जलाकर यूपी सरकार ने एक नया कीर्तिमान रचा। पिछले 10 वर्षों में अयोध्या के दीपोत्सव ने अपनी अलग पहचान स्थापित की है। तीन बार गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करवा चुका है। हर बार प्रशासन अपना ही पुराना रिकॉर्ड तोड़ता है। 2017 में पहली बार दीपोत्सव का आयोजन किया गया था।
लंबे समय बाद संत सीएम बना: उपराष्ट्रपति
दीपोत्सव के मुख्य अतिथि उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने अयोध्या की खूब प्रशंसा की। उन्होंने कहा, 'बहुत लंबे समय बाद एक संत किसी राज्य का मुख्यमंत्री बना है। बेहद साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने और पिछले 12 वर्षों से वे देश का नेतृत्व कर रहे हैं। मैं खुद एक बेहद सामान्य किसान परिवार से आया हूं। मैं भारत का उपराष्ट्रपति बना। आखिर यह कैसे हुआ? ऐसा केवल इसलिए हुआ, क्योंकि अयोध्या का राम मंदिर आंदोलन चलाया गया और उसमें तमाम रामभक्तों ने अपने प्राणों की आहुति दी।'
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'राम मंदिर हिंदू आत्मसम्मान का प्रतीक'
उपराष्ट्रपति ने आगे कहा, 'हमारे मुख्यमंत्री जी ने अपने भाषण में बताया कि अयोध्या सिर्फ स्मार्ट और सोलर सिटी नहीं है, बल्कि यह एक आध्यात्मिक नगरी भी है। यह सब सिर्फ राम मंदिर आंदोलन के कारण हुआ। आज मंदिर में दर्शन करने के बाद मुझे गर्व महसूस हो रहा है कि कर्मयोगी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राम मंदिर अब हमारे पूरे हिंदू आत्मसम्मान का प्रतीक बन गया है।
