उत्तर प्रदेश के गोरखपुर AIIMS से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है जिसने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। AIIMS की कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें जांच के लिए एक प्राइवेट अस्पताल में ले जाना पड़ा। बताया जा रहा है कि बुधवार को वह कुछ देर के लिए बेहोश हो गई थी और उन्हें AIIMS की इमरजेंसी में लाया गया। 

 

AIIMS की इमरजेंसी में उनकी शुरुआती जांच की गई। जांच के बाद दिल से जुड़ी परेशानी की आशंका को देखते हुए उन्हें एहतियातन उन्हें प्राइवेट अस्पताल ले जाया गया। डॉ. विभा दत्ता के मुताबिक, वहां डॉक्टरों ने उनकी रिपोर्ट देखी, जो सामान्य थीं। वह करीब आधे घंटे बाद वापस लौट आईं।

 

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क्यों जाना पड़ा प्राइवेट अस्पताल?

डॉ. विभा दत्ता को कुछ समय AIIMS में ही रखा गया था लेकिन बाद में उन्हें दिल की बीमारी की आशंका के चलते जरूरी टेस्ट करवाने की सलाह दी गई। इसके लिए AIIMS में कैथ लैब नहीं थी। कैथ लैब का इस्तेमाल दिल की धमनियों में रुकावट की जांच और इलाज के लिए किया जाता है। इसके जरिए एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी जैसी प्रक्रियाएं होती हैं। हार्ट अटैक के कई मामलों में मरीज को तत्काल एंजियोप्लास्टी की जरूरत पड़ सकती है। AIIMS में कैथ लैब ना होने के कारण AIIMS की डायरेक्टर को भी अपने जरूरी टेस्ट करवाने के लिए प्राइवटे अस्पताल में जाना पड़ाय़ 

7 साल में नहीं बनी लैब

AIIMS गोरखपुर की शुरुआत फरवरी 2019 में हुई थी। संस्थान में कार्डियोलॉजी विभाग की शुरुआत 2024 में की गई, लेकिन कैथ लैब अब तक चालू नहीं हो सकी है। AIIMS के कार्डियोलॉजी विभाग में ओपीडी और आईपीडी सेवाएं उपलब्ध हैं। हालांकि, कैथ लैब न होने से दिल की गंभीर बीमारियों के इलाज से जुड़ी कुछ अहम प्रक्रियाओं के लिए मरीजों को दूसरे अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ता है।

डॉ. विभा दत्ता ने क्या बताया?

डॉ. विभा दत्ता ने स्पष्ट किया है कि उन्हें प्राइवेट अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया था और न ही वहां कोई इलाज हुआ। उनके अनुसार, AIIMS में जांच के बाद डॉक्टरों को दिल से जुड़ी समस्या की आशंका थी। कैथ लैब की सुविधा अभी उपलब्ध नहीं होने के कारण एहतियात के तौर पर उन्हें प्राइवेट अस्पताल ले जाया गया था। वहां डॉक्टरों ने रिपोर्ट देखी और सब सामान्य बताया। इसके बाद वह AIIMS लौट आईं। उन्होंने बताया कि अब उनकी तबीयत ठीक है।

 

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लोगों ने उठाए सवाल

AIIMS जैसे अस्पतालों में भी जरूरी लैब की सुविधा ना होना और खुद डायरेक्टर को इलाज के लिए दूसरे प्राइवेट अस्पताल में जाना कुछ ही समय में चर्चा का विषय बन गया। सोशल मीडिया पर लोग सरकार की आलोचना कर रहे हैं और सवाल उठा रहे हैं कि इतने सालों में कैथ लैब जैसी बेसिक सुविधाएं AIIMS में क्यों नहीं दी गई हैं। 

 

बताया जा रहा है कि AIIMS में कैथ लैब स्थापित करने का काम चल रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस परियोजना पर करीब 15 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं और स्थापना से जुड़े लगभग 70 फीसदी काम पूरे हो चुके हैं। जरूरी उपकरणों की खरीद और स्थापना की प्रक्रिया जारी है। इसे दिसंबर 2026 तक शुरू करने का लक्ष्य बताया गया है। कैथ लैब शुरू होने से गोरखपुर और आसपास के जिलों के मरीजों को हृदय रोगों की जांच और इलाज के लिए दूसरे अस्पतालों पर निर्भरता कम होगी।