बिहार में सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक और भ्रामक पोस्ट डालकर माहौल बिगाड़ने वालों की अब खैर नहीं। बिहार पुलिस की साइबर यूनिटों ने ऐसे लोगों के खिलाफ बड़ा अभियान छेड़ दिया है। इस साल मार्च से जून के बीच राज्य भर में सवा सौ से ज्यादा प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। इस दौरान 16 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। पुलिस ने आपत्तिजनक कंटेंट फैलाने वाले नौ हैंडल, आईडी और चैनलों को हमेशा के लिए डिलीट भी करा दिया है।
संवैधानिक पदों को बनाया जा रहा था निशाना
पुलिस मुख्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक हटाए गए इन नौ हैंडल के जरिए संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के खिलाफ लगातार जहर उगला जा रहा था। इन हैंडल से आम जनता और कई व्यक्ति विशेष को टारगेट करके भ्रामक और आपत्तिजनक सामग्री भी प्रसारित की जा रही थी। पुलिस का कहना है कि ऐसे कंटेंट से समाज में तनाव फैलने और विधि-व्यवस्था बिगड़ने का खतरा था।
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साढ़े आठ सौ से ज्यादा यूआरएल हटाने का नोटिस
मार्च से जून के बीच बिहार पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और संबंधित सेवा प्रदाताओं को चार सौ से ज्यादा टेकडाउन नोटिस जारी किए। इन नोटिसों के जरिए साढ़े आठ सौ से ज्यादा आपत्तिजनक यूआरएल को हटाने का अनुरोध किया गया। पुलिस के सख्त रुख के बाद कई प्लेटफॉर्म्स ने ऐसे लिंक हटाने शुरू कर दिए हैं। साइबर सेल के अधिकारी हर पोस्ट पर पैनी नजर रख रहे हैं।
कैसे हो रही कार्रवाई
पुलिस मुख्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि साइबर पेट्रोलिंग के जरिए चौबीस घंटे सोशल मीडिया की निगरानी की जा रही है। फेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और वॉट्सऐप ग्रुप पर खास नजर है। जैसे ही कोई आपत्तिजनक, भ्रामक या समाज में नफरत फैलाने वाली पोस्ट मिलती है, तुरंत मुकदमा दर्ज किया जाता है। आरोपी की पहचान कर गिरफ्तारी की जाती है। अधिकारी ने कहा कि कई मामलों में पोस्ट करने वाले दूसरे राज्यों में छिपे थे, उन्हें भी ट्रेस कर पकड़ा गया।
ADG का बयान: सोशल मीडिया का मतलब अराजकता नहीं'
आर्थिक अपराध इकाई के एडीजी ने कहा कि सोशल मीडिया अभिव्यक्ति का माध्यम है, लेकिन इसकी आड़ में किसी को गाली देने, अफवाह फैलाने या समाज तोड़ने की इजाजत नहीं दी जा सकती। संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों का सम्मान जरूरी है। आम लोगों की गरिमा से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। माता-पिता अपने बच्चों को भी समझाएं कि एक गलत पोस्ट उनका करियर बर्बाद कर सकती है। उन्होंने कहा कि आगे भी यह अभियान और तेज होगा।
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आपत्तिजनक मैसेज आने पर क्या करें?
पुलिस ने अपील की है कि कोई भी पोस्ट शेयर करने से पहले उसकी सच्चाई जांच लें। अगर किसी ग्रुप में भ्रामक या आपत्तिजनक मैसेज आता है तो तुरंत साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत करें। अफवाह फैलाने वालों की सूचना देने वालों का नाम गुप्त रखा जाएगा। फिलहाल बिहार पुलिस के इस एक्शन से सोशल मीडिया पर जहर उगलने वालों में हड़कंप मचा है। पुलिस का साफ संदेश है कि पोस्ट सोच-समझकर करें, वरना जेल जाने को तैयार रहें।


