बिहार के पूर्णिया जिले के कृत्यानंद नगर बिजली कार्यालय में स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SUV) ने रिश्वतखोरी के मामले में बड़ी कार्रवाई की। टीम ने बिजली कनेक्शन के बदले घूस लेते हुए जूनियर इंजीनियर भरत मलिक और दो तकनीकी सहायकों को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों में आशुतोष पांडे और पंकज कुमार भी शामिल हैं। फिलहाल तीनों से पूछताछ चल रही है।
मामला बखरीकोल निवासी राजेश कुमार साह से जुड़ा है। राजेश ने स्पेशल विजिलेंस यूनिट पटना में लिखित शिकायत दी थी कि घरेलू विद्युत कनेक्शन लगवाने के लिए बिजली विभाग के जूनियर इंजीनियर 15 हजार रुपये रिश्वत मांग रहे हैं । शिकायतकर्ता ने बताया कि जेई ने पहले ही उससे 5 हजार रुपये ले लिए थे और बाकी 10 हजार रुपये देने के लिए कृत्यानंद नगर ऑफिस बुलाया था। शिकायत मिलने के बाद SUV के इंस्पेक्टर अविनाश कुमार झा के नेतृत्व में टीम बनाई गई। टीम ने पूरे प्लान के साथ गुरुवार को कृत्यानंद नगर बिजली ऑफिस में छापेमारी की।
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ऐसे खुली भ्रष्ट अधिकारियों की पोल
विजिलेंस की योजना के मुताबिक राजेश कुमार साह 10 हजार रुपये लेकर बिजली कार्यालय पहुंचे। वहां जेई भरत मलिक के कहने पर तकनीकी सहायक आशुतोष पांडे ने पैसे लेकर अपनी जेब में रख लिए। जैसे ही रुपये लिए गए वहां पहले से मौजूद विजिलेंस टीम ने जेई समेत तीनों को मौके पर ही पकड़ लिया। तलाशी के दौरान आशुतोष पांडे की जेब से 10 हजार रुपये बरामद किए गए। टीम ने मौके से कुछ जरूरी दस्तावेज भी जब्त किए हैं। गिरफ्तारी के बाद तीनों को पूछताछ के लिए पटना ले जाया गया। अब विजिलेंस यह भी जांच कर रही है कि इस तरह रिश्वत लेने में और लोग तो शामिल नहीं हैं।
इस कार्रवाई के बाद पूर्णिया के बिजली विभाग में हड़कंप मच गया है। कई उपभोक्ता भी ऑफिस पहुंचकर अपनी शिकायतें दर्ज कराने लगे हैं। लोगों का कहना है कि कनेक्शन, मीटर बदलवाने और बिल ठीक कराने के नाम पर अक्सर पैसे मांगे जाते हैं। स्थानीय लोगों ने विजिलेंस की इस कार्रवाई की सराहना की है। उनका कहना है कि अगर ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई होती रहे तो आम जनता को राहत मिलेगी।
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क्या है पूरा मामला?
राजेश कुमार साह ने बखरीकोल में अपने घर के लिए नया बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन दिया था। आवेदन के बाद फाइल जूनियर इंजीनियर भरत मलिक के पास गई। आरोप है कि फाइल आगे बढ़ाने के बदले जई ने 15 हजार रुपये मांगे। जब राजेश ने मना किया तो काम लटकाने की धमकी दी गई। इसके बाद राजेश ने 5 हजार रुपये पहले दे दिए। बाकी 10 हजार रुपये देने के लिए 5 अगस्त को ऑफिस बुलाया गया। तभी राजेश ने इसकी शिकायत विजिलेंस से कर दी।
