बिहार में इन दिनों लोगों के बीच फैंसी और यूनिक नंबर प्लेट का काफी ज्यादा क्रेज देखने को मिल रहा है। लोग अपनी गाड़ी के लिए लकी नंबर, डेट ऑफ बर्थ या अपनी पसंद का नंबर पाने के लिए लाखों रुपये खर्च कर रहे हैं। यहां लग्जरी गाड़ी के साथ-साथ अब गाड़ी का नंबर भी स्टेटस सिंबल बन गया है। परिवहन विभाग के आंकड़े बताते हैं कि यह शौक हर साल बढ़ता जा रहा है।  

 

बिहार में साल 2021 से लेकर 2026 के जुलाई तक, 37 हजार से अधिक वाहन मालिकों ने फैंसी नंबर प्लेट के लिए आवेदन किया है। पटना, गया, मुजफ्फरपुर और रोहतास जैसे जिलों में यह क्रेज सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा है। 

 

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हर साल बढ़ रही है इसकी डिमांड 

परिवहन विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक, साल 2021 में पूरे बिहार में 3013 वाहन मालिकों ने पसंदीदा नंबर के लिए आवेदन किया था। उस साल विभाग को फैंसी नंबर से 6 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई हुई थी। तब पटना में 1400, गया में 233, मुजफ्फरपुर में 217 और पूर्णिया में 154 लोगों ने फैंसी नंबर लगवाए थे। 2022 में यह संख्या बढ़कर 4648 हो गई और विभाग की कमाई 9 करोड़ रुपये के पार पहुंच गई। तब पटना में करीब 2200 और गया में 335 लोगों ने फैंसी नंबर के लिए पैसे खर्च किए। 

 

2023 में ट्रेंड और तेज हुआ और लगभग 6800 वाहनों में फैंसी नंबर प्लेट लगी। इससे विभाग को 12 करोड़ रुपये से ज्यादा राजस्व मिला। 2024 में 7789 वाहनों में पसंदीदा नंबर लगाए गए और विभाग की आय 13 करोड़ रुपये से अधिक रही। पटना में अकेले 3100 और मुजफ्फरपुर में 690 लोगों ने फैंसी नंबर के लिए आवेदन किया।

 

2025 में यह आंकड़ा 8936 तक पहुंच गया। पटना में 3500 से ज्यादा, गया में 557 और रोहतास में 549 वाहन मालिकों ने फैंसी नंबर लगवाए। इस साल 2026 में जनवरी से अब तक 6500 से अधिक वाहनों में फैंसी नंबर प्लेट लग चुकी है। इससे अब तक 10 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई हो चुकी है। इस साल भी पटना सबसे आगे है जहां 2700 से ज्यादा, गया से 535 और मुजफ्फरपुर से 450 से अधिक लोगों ने पसंदीदा नंबर लिए हैं।

फैंसी नंबर प्लेट के लिए लाखों कर रहे खर्च

परिवहन सचिव राज कुमार के मुताबिक, फैंसी नंबर प्लेट की बढ़ती लोकप्रियता बिहार में वाहन संस्कृति के बदलाव को दर्शाती है। लोग अब गाड़ी को सिर्फ सफर का साधन नहीं मानते, बल्कि इसे अपनी पहचान और स्टेटस से जोड़कर देख रहे हैं। इसलिए वे अपनी पसंद का नंबर पाने के लिए अतिरिक्त पैसे देने को तैयार हैं। उनका कहना है कि फैंसी नंबर के आवंटन के लिए बिहार मोटर वाहन संशोधन नियमावली 1992 के नियम 64 के तहत ई-नीलामी की व्यवस्था की गई है। इससे प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी बनी है। गैर परिवहन यानी निजी वाहनों और परिवहन वाहनों के लिए अलग-अलग शुल्क निर्धारित है।

 

प्रीमियम नंबर जैसे 0001, 0003, 0005, 0007 और 0009 जैसे नंबरों की डिमांड सबसे ज्यादा है। इन नंबरों के लिए गैर परिवहन वाहनों पर 1 लाख रुपये और परिवहन वाहनों पर 35 हजार रुपये शुल्क देना होता है। इसके अलावा 1100, 1212, 2525, 9999 जैसे नंबर भी काफी लोकप्रिय हैं। लोग इन्हें पाने के लिए भी अच्छी खासी रकम खर्च कर रहे हैं।

 

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पटना में सबसे ज्यादा दिखा क्रेज  

इसका सबसे ज्यादा क्रेज पटना में देखने को मिल रहा है।  हर साल पटना जिले से सबसे अधिक आवेदन आते हैं। इसके बाद गया, मुजफ्फरपुर और रोहतास का नंबर आता है। परिवहन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि शहरी क्षेत्रों में लोगों की क्रय शक्ति बढ़ने और लग्जरी वाहनों की संख्या बढ़ने से फैंसी नंबर की मांग भी बढ़ी है। कई कारोबारी और युवा अपनी जन्मतिथि या लकी नंबर को गाड़ी में लगवाना चाहते हैं। उनका मानना है कि इससे गाड़ी अलग दिखती है और लोगों का ध्यान खींचती है। 

 

इसके अलावा कुछ लोग इसे शुभ मानते हैं तो कुछ इसे अपनी पहचान बनाने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। फैंसी नंबर प्लेट से सरकार को भी बड़ा राजस्व मिल रहा है। पिछले पांच साल में इस मद से 50 करोड़ रुपये से अधिक की आय हो चुकी है। परिवहन विभाग ने ई-नीलामी की प्रक्रिया को और सरल बनाया है ताकि लोग घर बैठे ऑनलाइन बोली लगा सकें।

युवाओं में बढ़ा फैंसी नंबर का क्रेज 

फैंसी नंबर का क्रेज सबसे ज्यादा युवाओं में देखने को मिल रहा है। पटना और अन्य बड़े शहरों में कॉलेज के छात्र और नए कारोबारी अपनी बाइक और कार के लिए खास नंबर लेना पसंद कर रहे हैं। इसके अलावा कई बार दोस्तों के बीच नंबर को लेकर होड़ भी लग जाती है कि किसका नंबर सबसे अलग और महंगा है। विभाग का कहना है कि फैंसी नंबर का यह ट्रेंड आने वाले सालों में और बढ़ेगा। विभाग भी इसे ध्यान में रखते हुए नई सीरीज के नंबर जारी करने और ई-नीलामी की प्रक्रिया को और बेहतर बनाने की तैयारी कर रहा है।