हिमाचल के दुर्गम गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का संदेश देने मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने रामपुर विधानसभा क्षेत्र के दूरदराज गांव काशा पाट में न केवल कदम रखा, बल्कि रात भी गांव में ही गुजारी। मुख्यमंत्री ने पाट निवासी सुपन दास के घर रात्रि विश्राम किया।

 

ग्रामीणों के मुताबिक काशा पाट में किसी मुख्यमंत्री का यह पहला रात्रि प्रवास है। मुख्यमंत्री के गांव पहुंचते ही माहौल उत्सव में बदल गया। ग्रामीणों ने पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनों और पारंपरिक वेशभूषा के साथ उनका स्वागत किया। देर रात तक सांस्कृतिक कार्यक्रम चलते रहे और मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों के साथ कार्यक्रम का आनंद लिया। वह खुद भी नाटी में शामिल हुए।

रात गांव में, सुबह विकास की घोषणाएं

ग्रामीणों के बीच रात बिताने के बाद मुख्यमंत्री ने काशा पाट के लिए विकास का पिटारा खोला। उन्होंने नए स्कूल भवन के निर्माण के लिए दो करोड़ रुपये देने की घोषणा की। साथ ही गांव में खेल मैदान विकसित करने का एलान किया और ग्रामीणों की विभिन्न मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि दुर्गम क्षेत्रों के विकास को सरकार विशेष प्राथमिकता दे रही है। उनका कहना था कि ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक समृद्धि आए बिना हिमाचल को वास्तविक अर्थों में खुशहाल नहीं बनाया जा सकता। काशा पाट के ग्रामीणों की सबसे अहम मांगों में से एक को लेकर मुख्यमंत्री ने बड़ा आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि काशा पाट से तकलेच होते हुए रामपुर तक बस सेवा शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है। इससे क्षेत्र के बच्चों को स्कूल आने-जाने में सुविधा मिलेगी और छुट्टी के बाद उन्हें सुरक्षित घर लौटने में भी मदद मिलेगी।

 

सरकार ने स्थानीय स्तर पर बस सेवा शुरू करने के लिए भी प्रोत्साहन का प्रस्ताव रखा है। मुख्यमंत्री के अनुसार यदि गांव का कोई व्यक्ति अधिकतम 30 लाख रुपये की लागत से बस खरीदकर सेवा शुरू करता है तो सरकार 40 प्रतिशत सब्सिडी देगी। बस मालिक को पांच साल तक हर महीने 50 हजार रुपये की सहायता देने का भी प्रावधान बताया गया। रोहड़ू क्षेत्र के लिए भी इसी तरह 40 प्रतिशत सब्सिडी की बात कही गई।

68 फीसदी वन क्षेत्र, सड़कें बनाना बड़ी चुनौती

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल की करीब 68 प्रतिशत भूमि वन क्षेत्र में आती है। ऐसे में सड़क निर्माण के लिए कई बार वन विभाग से अनुमति लेने की जरूरत पड़ती है, जिससे दुर्गम क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बढ़ाना चुनौतीपूर्ण रहता है। इसके बावजूद सरकार दूरदराज के गांवों को सड़क और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जोड़ने पर काम कर रही है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन महिला मंडलों के पास अपने भवन नहीं हैं, उन्हें भवन निर्माण के लिए पांच-पांच लाख रुपये दिए जाएंगे। जिन महिला मंडलों के पास पहले से भवन हैं, उन्हें आवश्यक सामान खरीदने के लिए एक-एक लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार जल्द ‘अपना परिवार, सुखी परिवार’ योजना शुरू करने जा रही है, जिसके तहत पात्र महिलाओं को 1,500 रुपये प्रतिमाह की आर्थिक सहायता दी जाएगी।

 

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होम स्टे से खुलेगा रोजगार का रास्ता

दुर्गम गांवों में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री ने होम स्टे को भी रोजगार का माध्यम बनाने पर जोर दिया। काशा पाट में होम स्टे के लिए पंजीकरण करवाने वाले चार लोगों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि होम स्टे के माध्यम से दूरदराज के क्षेत्रों में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी और स्थानीय लोगों के लिए आय व रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

 

सांस्कृतिक कार्यक्रमों में ग्रामीण बच्चियों ने नशा निवारण और भ्रूण हत्या जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दों पर जागरूकता प्रस्तुतियां दीं। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम प्रस्तुत करने वाली बच्चियों का उत्साह बढ़ाने के लिए एक लाख रुपये देने की घोषणा की। सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री ने कहा कि परियोजनाएं स्थापित करने पर चार प्रतिशत ब्याज सब्सिडी दी जा रही है, जबकि जनजातीय क्षेत्रों में यह सब्सिडी पांच प्रतिशत है।

‘पहली बार किसी मुख्यमंत्री ने यहां रात बिताई’

मुख्यमंत्री के मेजबान सुपन दास ने कहा कि गांव में मुख्यमंत्री के रात्रि प्रवास से ग्रामीणों में खासा उत्साह है। उनके अनुसार यह पहली बार है जब किसी मुख्यमंत्री ने काशा पाट में रात बिताई है। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री के लिए पारंपरिक व्यंजनों की भी व्यवस्था की। महिला मंडल काशा पाट की सदस्य वीना देवी ने स्कूल भवन के लिए दो करोड़ रुपये और महिला मंडलों के लिए सहायता की घोषणाओं का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इन फैसलों से क्षेत्र के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा।