उत्तर प्रदेश की राजधानी में ओला, उबर, रैपिडो और इनड्राइव जैसी एप आधारित कैब सेवाओं ने लोगों के सफर को आसान जरूर बनाया, लेकिन इनके संचालन पर प्रभावी नियंत्रण नहीं होने से कंपनियों और ड्राइवरों की मनमानी बढ़ती जा रही है। शहर में 10 हजार से अधिक एप आधारित वाहन चल रहे हैं। मांग बढ़ते ही किराया बढ़ जाता है, चालक बुकिंग स्वीकार करने के बाद राइड रद्द कर देते हैं और कई बार तय किराए से अधिक रकम मांगने की शिकायतें सामने आती हैं। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि सरकार ने व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए नियम बनाने के साथ परिवहन विभाग के पोर्टल की व्यवस्था तय कर दी, लेकिन पांच माह बाद भी पोर्टल चालू नहीं हो पाया है।
एप आधारित कैब के किराए का कोई स्पष्ट मानक नहीं होने से कंपनियां अपनी सुविधा के अनुसार किराया तय कर रही हैं। आशियाना से हजरतगंज की करीब 10 किलोमीटर दूरी के लिए दिन में 112 से 115 रुपये तक किराया दिखाई देता है, जबकि रात में वापसी के समय यही किराया 147 से 155 रुपये तक पहुंच जाता है। यानी एक ही दूरी और मार्ग के लिए समय के हिसाब से किराए में बड़ा अंतर है। यात्रियों का कहना है कि व्यस्त समय, बारिश या अधिक मांग के दौरान किराया अचानक बढ़ जाता है। कई बार एप पर दिखाई गई राशि के अतिरिक्त भुगतान की मांग भी की जाती है। वाहन में ऐसी स्थिति आने पर यात्री विरोध करते हैं तो उन्हें असहज परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।
बुकिंग स्वीकार कर ड्राइवर कर देते हैं राइड रद्द
कैब सेवाओं से जुड़ी एक बड़ी शिकायत यह है कि चालक बुकिंग स्वीकार करने के बाद यात्री के पास पहुंचने से मना कर देते हैं। कई बार चालक राइड रद्द कर देते हैं तो कई बार तय स्थान तक जाने के बजाय रास्ते में ही उतारने का दबाव बनाया जाता है। इससे यात्री को दोबारा कैब बुक करनी पड़ती है और समय के साथ अतिरिक्त किराया भी देना पड़ता है।
वाहन की साफ-सफाई ठीक न होने पर शिकायत करने वाले यात्रियों से अभद्र व्यवहार किए जाने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। यात्रियों का कहना है कि शिकायत दर्ज कराने के बाद भी उसका समाधान आसानी से नहीं होता।
यह भी पढ़ें: बेटी और उसके प्रेमी ने रची साजिश, मां का सिर काटकर नहर में फेंकी लाश
कंपनियां वाहन मालिकों से ले रही 20 प्रतिशत तक कमीशन
कैब संचालन में वाहन की मरम्मत, रोड टैक्स, बीमा, ईएमआई और अन्य खर्च वाहन मालिक व चालक को उठाने पड़ते हैं। इसके बावजूद कंपनियां यात्री से मिले किराए में से करीब 20 प्रतिशत तक कमीशन काटकर वाहन मालिक के खाते में रकम भेजती हैं। वाहन मालिकों का कहना है कि एक तरफ कंपनियां कमीशन ले रही हैं और दूसरी तरफ किराए पर भी उनका कोई स्पष्ट मानक नहीं है।
10 मार्च को कैब संचालन के नियमों पर लगी थी मुहर
ऐप आधारित वाहनों को भी परिवहन विभाग के दायरे में लाने के लिए कैब संचालन की नई व्यवस्था को 10 मार्च को कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी है। इसके तहत एप आधारित वाहन समूहों का पंजीकरण परिवहन विभाग के पोर्टल पर कराया जाना है। नियमों का उद्देश्य कैब कंपनियों, वाहन मालिकों और ड्राइवरों की जिम्मेदारी तय करने के साथ यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। कैबिनेट की मंजूरी के करीब पांच माह बाद भी परिवहन विभाग का पोर्टल तैयार नहीं हो पाया है। ऐसे में नियमों को जमीन पर लागू करने की प्रक्रिया अटकी हुई है और फिलहाल यात्रियों को पुरानी व्यवस्था के भरोसे ही कैब सेवाओं का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।
परिवहन पोर्टल शुरू हुआ तो यह व्यवस्था होगी
प्रस्तावित परिवहन पोर्टल के जरिए कैब संचालन को व्यवस्थित करने के लिए कई प्रावधान किए गए हैं। पंजीकरण कराने वाले वाहन समूहों को पांच साल के लिए लाइसेंस दिया जाएगा।आवेदन करने की फीस 25 हजार रुपये और नवीनीकरण की फीस पांच हजार रुपये होगी। 50 से 100 या इससे अधिक वाहनों के लिए लाइसेंसिंग फीस पांच लाख रुपये होगी। एक हजार वाहनों के बेड़े पर 10 लाख और 10 हजार वाहनों तक 25 लाख रुपये जमा करने होंगे।ड्राइवरों और यात्रियों का पांच-पांच लाख रुपये का बीमा होगा।ड्राइवर का पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य एवं दुर्घटना बीमा और टर्म बीमा 10 लाख रुपये का होगा।
ड्राइवरों का पुलिस सत्यापन अनिवार्य होगा। वाहन बुक करते समय यात्री को ड्राइवर की फोटो दिखाई देगी। शिकायतों की सुनवाई के लिए 24 घंटे शिकायत प्रकोष्ठ सक्रिय रहेगा। प्रत्येक वाहन की रेटिंग होगी और उसके आधार पर ड्राइवरों को प्रशिक्षण के लिए भेजा जा सकेगा। वाहनों में आपातकालीन बटन और वाहन की स्थिति बताने वाली निगरानी व्यवस्था होगी। वाहन में लगाए गए निगरानी उपकरण के जरिए यह भी पता चल सकेगा कि वाहन इस समय कहां है।
यह भी पढ़ें: शाहजहांपुर में पुलिस दबिश के बाद सर्राफ की मौत, 6 पुलिसकर्मियों पर हत्या का केस
यात्रियों की परेशानी का समाधान कब?
ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं ने शहर में आवागमन को आसान बनाया है, लेकिन किराए में मनमानी, राइड रद्द करने, अतिरिक्त रकम मांगने, वाहन की स्थिति और ड्राइवर के व्यवहार से जुड़ी शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। नई व्यवस्था में इन समस्याओं पर नियंत्रण के लिए कई प्रावधान किए गए हैं, मगर जब तक परिवहन विभाग का पोर्टल शुरू नहीं होता और नियम जमीन पर लागू नहीं होते, तब तक यात्रियों को राहत मिलना मुश्किल है। अब निगाह इस बात पर है कि पांच महीने से लंबित पोर्टल कब शुरू होता है और कैब कंपनियों की मनमानी पर वास्तव में कब अंकुश लगता है।
