दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (DTC) की सेवा 4 दिनों से चल रही हड़ताल के चलते प्रभावित हो रही है। इस स्ट्राइक से आम जनता खासतौर पर मरीजों, महिलाओं और खासकर मजदूरों की समस्या को बढ़ा दिया है। सड़कों से 80% से ज्यादा बसें गायब होने के कारण लोग घंटों बस स्टेशनों पर फंसे रह रहे हैं। साथ ही कई गुना ज्यादा किराया देकर सफर करने को मजबूर हैं। संगठन के मुताबिक, कुल 6,500 से अधिक बसों में से 5,000 से ज्यादा बसें सड़कों पर नहीं उतरीं।
कर्मचारी संगठन ने कहा है कि जब तक सरकार उनकी मांगें नहीं मानती तब तक हड़ताल वापस नहीं ली जाएगी। आपको बता दें कि इन बसों में रोजाना लगभग 40 लाख से ज्यादा लोग सफर करते हैं। 10 हजार से ज्यादा ड्राइवरों के काम बंद करने से लोगों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
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क्या हैं कर्मचारियों की मुख्य मांगें?
DTC कर्मचारी एकता यूनियन ने प्रशासन के सामने कई मांगें रखी हैं। इनमें से मुख्य है:
- ड्राइवरों, कंडक्टरों और अन्य कर्मचारियों को रोजाना 2,000 रुपये का मेहनताना दिया जाए।
- सभी कर्मचारियों को मेडिकल सुविधाएं, बीमा कवर और सालाना बोनस मिले।
- सरकारी छुट्टियों का भुगतान, कैजुअल लीव (CL) और अर्न्ड लीव (EL) का प्रावधान हो।
- 'समान काम के लिए समान वेतन' की नीति लागू की जाए।
यात्रियों की बढ़ी परेशानी
हड़ताल के कारण दिल्ली की जीवन रेखा मानी जाने वाली DTC बस सेवा पूरी तरह ठप पड़ गई है। मुफ्त और सस्ते सफर पर निर्भर रहने वाली महिलाओं और खास कर कम कमाई वाले मजदूरों को सबसे ज्यादा दिक्कत झेलनी पड़ रही है।
बसों के न चलने का फायदा ऑटो और शेयरिंग टेंपो वाले जमकर उठा रहे हैं। जो ऑटो वाले पहले 20-30 रुपये लेते थे। वे अब 80 रुपये तक मांग रहे हैं। अस्पताल में इलाज कराने जा रहे लोगों को मजबूरी में महंगे टेंपो से जाना पड़ रहा है। वहीं, शादीपुर और आईटीओ पर कामकाजी महिलाएं घंटों खड़ी रहकर सही किराये में सवारी तलाशती दिखीं।
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सरकार का रुख
ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर मंत्री पंकज सिंह ने कर्मचारियों से काम पर लौटने की अपील की थी। उन्होंने बताया कि मेडिकल इंश्योरेंस की मांग मान ली गई है। साथ ही परिवार को कवर देने पर विचार चल रहा है। इसके अलावा 4 दिन की छुट्टी और सैलरी बढ़ाने का प्रस्ताव लेबर डिपार्टमेंट को भेजा गया है। हालांकि, प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक ठोस और लिखित समाधान नहीं मिलता, हड़ताल खत्म नहीं होगी।
मेट्रो बनी एकमात्र सहारा, बने नए रिकॉर्ड
बसें न मिलने से मेट्रो में अचानक यात्रियों की संख्या काफी बढ़ गई है। 14 सितंबर यानी सोमवार को जहां 72 लाख से अधिक लोगों ने मेट्रो में सफर किया था। वहीं बुधवार तक यह संख्या बढ़कर 80 लाख के पार पहुंच गई। भीड़ को संभालने के लिए दिल्ली मेट्रो ने अतिरिक्त ट्रेनें चलाई हैं और 20 ज्यादा फेरे लगाए हैं। ट्रैफिक पुलिस ने भी लोगों को जाम से बचने के लिए सोच-समझकर निकलने की सलाह दी है।
