बिहार के गया जिले में पितृपक्ष मेला शुरू होने से पहले ऑनलाइन पिंडदान और टूरिज्म पैकेज को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। गयापाल पंडा समाज ने ऑनलाइन पिंडदान और पिंडदान के नाम पर चलाए जा रहे महंगे पैकेज के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पंडा समाज ने साफ कहा है कि यह सनातन परंपरा के साथ खिलवाड़ है और इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
गयापाल समाज और 14 सैया गयापाल समिति ने विष्णुपद मंदिर परिसर में प्रेस वार्ता कर अपना विरोध जताया। पंडा समाज का कहना है कि गया में पिंडदान सनातन परंपरा और शास्त्रीय विधि के अनुसार किया जाता है। इसमें श्रद्धालु की खुद मौजूदगी सबसे जरूरी मानी जाती है। समाज ने सवाल उठाया कि जब श्रद्धालु खुद मौजूद नहीं होगा तो पिंडदान कैसे संभव है?
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25 से 51 हजार के पैकेज पर सवाल
पंडा समाज ने 25 से 51 हजार रुपये तक के कथित टूरिज्म पैकेज पर सवाल उठाए हैं। समाज के लोगों का कहना है कि आजकल कुछ लोग, कंपनियां और ट्रैवल एजेंसियां पिंडदान के नाम पर टूरिज्म पैकेज बेच रही हैं। इनमें ऑनलाइन पिंडदान के साथ होटल, गाड़ी और पिंडदान की सुविधा देने का दावा किया जा रहा है।
पंडा समाज का कहना है कि पिंडदान कोई घूमने-फिरने का पैकेज नहीं है। यह मोक्ष की धरती पर पितरों की आत्मा की शांति के लिए किया जाने वाला पवित्र कर्म है। इसमें पंडा और श्रद्धालु के बीच सीधा संबंध होता है। मंत्रोच्चार, संकल्प और पिंडदान की पूरी विधि श्रद्धालु के हाथों से होती है। ऐसे में ऑनलाइन के जरिए यह पूरी प्रक्रिया कैसे होगी इस पर पंडा समाज ने सवाल उठाया है।
पंडा समाज ने देश-विदेश के श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे ऑनलाइन पिंडदान और निजी पैकेज के नाम पर होने वाली कथित ठगी से सावधान रहें। उन्होंने कहा, ' गया में पंडा समाज की ओर से पिंडदान का कोई शुल्क तय नहीं है। श्रद्धालु अपनी इच्छा से जो दक्षिणा देते हैं वही ली जाती है।' समाज का कहना है कि कुछ लोग पिंडदान के नाम पर 25 हजार से 51 हजार रुपये तक वसूल रहे हैं। गयापाल समिति ने बताया कि कई श्रद्धालु शिकायत कर चुके हैं कि ऑनलाइन पैकेज लेने के बाद भी उन्हें गया आना पड़ रहा है और फिर से पिंडदान कराना पड़ रहा है। इससे उनकी आस्था को ठेस पहुंचने के साथ पैसे की भी बर्बादी हो रही है।
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पंडा समाज ने दी कोर्ट जाने की चेतावनी
पंडा समाज ने चेतावनी दी है कि अगर ऐसी व्यवस्था पर रोक नहीं लगी तो जरूरत पड़ने पर न्यायालय का रुख किया जाएगा। समाज के प्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन और बिहार सरकार से भी इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनका कहना है कि पितृपक्ष मेले से पहले इस तरह के पैकेज से गया की छवि खराब हो रही है।
पंडा समाज ने कहा, 'गया मोक्ष की धरती है। यहां हर साल लाखों श्रद्धालु अपने पितरों का पिंडदान करने आते हैं। अगर इस तरह का भ्रम फैला तो श्रद्धालुओं का विश्वास टूट सकता है।' समाज ने प्रशासन से ऑनलाइन पिंडदान के नाम पर चल रहे धंधे पर रोक लगाने की मांग की है। वहीं ऑनलाइन पिंडदान को लेकर सामने आए दावों और आरोपों पर संबंधित पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है। जिन कंपनियों और लोगों पर पैकेज बेचने का आरोप लगाया जा रहा है उनकी ओर से भी अभी कोई बयान सामने नहीं आया है।
