हिमाचल प्रदेश सरकार राज्य में IAS, IPS और IFS अधिकारियों के स्वीकृत पदों की संख्या घटाने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा है कि सरकार IAS के 153 पदों को घटाकर 130 और IFS के 118 पदों को 83 करने जा रही है। IPS के पदों में भी कटौती की जाएगी। मुख्यमंत्री का कहना है कि कई अधिकारियों के पास पर्याप्त काम नहीं है और उनकी क्षमता का पूरा इस्तेमाल नहीं हो पा रहा। ऐसे में दिल्ली जाने के इच्छुक अधिकारियों की फाइलों को तेजी से मंजूरी दी जा रही है और उन्हें जल्द रिलीव किया जाएगा।
संसद के बीते मानसून सत्र के दौरान भी एक बार यह मुद्दा उठा था कि IAS और IPS अधिकारियों की संख्या कितनी होनी चाहिए। संसद में एक सवाल के जवाब में केंद्र सरकार ने बताया था कि चंडीगढ़ में 21 IAS और IPS अधिकारी तैनात हैं। इस जवाब के बाद से सवाल उठ रहे थे कि 15 लाख की आबादी वाले छोटे शहर के लिए 21 IAS और IPS अधिकारियों का होना सही है। रिटायर्ड IAS अशोक खेमका ने भी इस मुद्दे पर सवाल किया था और अब हिमाचल में भी अधिकारियों की संख्या को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
यह भी पढ़ें: दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर को PhD स्कॉलर ने जड़ा थप्पड़, CCTV में क्या दिखा?
कैसे तय होती है अधिकारियों की संख्या?
IAS और IPS ऑल इंडिया सर्विस हैं और इनके कैडर की स्वीकृत संख्या राज्य सरकार अकेले तय नहीं कर सकती। IAS कैडर रूल्स, 1954 के रूल 4 के तहत कैडर की संख्या और सरंचना केंद्र सरकार तय करती है। हालांकि, इसमें संबंधित राज्य सरकार से परामर्श होता है। कैडर की समीक्षा अब सामान्य तौर पर पांच साल के अंतराल पर की जाती है। इसलिए हिमाचल सरकार अपनी जरूरत का आकलन कर केंद्र को कैडर घटाने का प्रस्ताव भेज सकती है, लेकिन अंतिम बदलाव केंद्र की मंजूरी और निर्धारित प्रक्रिया के तहत होगा। IPS के मामले में भी यही व्यवस्था है।
हिमाचल सरकार का प्लान
हिमाचल के सीएम ने अधिकारियों की संख्या कम करने का प्लान भी शेयर किया। वह इसके लिए केंद्र सरकार को कोई प्रस्ताव भेजने के पक्ष में नहीं हैं बल्कि जो अधिकारी रिलीव होना चाहते हैं उनकी फाइलों को मंजूरी दे दी जाएगी। इससे पहले हिमाचल प्रदेश कैडर के 25 आईएएस अधिकारी, 24 आईपीएस अधिकारी भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं। हिमाचल कैडर के 118 आईएफएस अधिकारियों में से 17 केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं। इनकी संख्या अब और ज्यादा हो सकती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने वाले अधिकारियों की फाइलें रोक दी जाती थीं, लेकिन अब ऐसा नहीं किया जा रहा है। प्रतिनियुक्ति के लिए अधिकारियों को तुरंत मंजूरी दी जा रही है। उन्हें रिलीव भी किया जा रहा है। सबसे ज्यादा मंजूरी दिल्ली जाने के लिए दी जा रही है। मुख्यमंत्री का दिल्ली जाने के इच्छुक अधिकारियों को जल्द रिलीव करने का प्लान है। इससे कैडर की संख्या पर कोई असर नहीं पड़ेगा। यानी अधिकारियों की संख्या वही रहेगी लेकिन उनकी नियुक्ति हिमाचल के बजाय दिल्ली में होगी।
अधिकारियों की संख्या को लेकर बहस
राज्य और केंद्र में कितने अधिकारी होने चाहिए इसको लेकर समय-समय पर चर्चा होती रहती है। अधिकारियों की संख्या कम या ज्यादा होने के अपने-अपने फायदे और नुकसान हैं। अधिकारियों की नियुक्ति पर सरकार को काफी ज्यादा खर्च करना पड़ता है। हिमाचल सरकार इसी खर्च को कम करने की दिशा में काम कर रही है। हालांकि, प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार और लोगों की पहुंच बनाने के लिए अधिकारियों का ज्यादा संख्या में होने का तर्क दिया जाता है।
यह भी पढ़ें: 'हिमाचल में लोमड़ियां, मुर्गियां और भेड़', प्रियंका गांधी पर बोले सुधीर शर्मा
कई राज्यों में खाली हैं पद
देश के बड़े राज्यों में भी काफी पद खाली हैं। 1 जनवरी 2025 के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में 652 IAS पदों में 571 अधिकारी, मध्य प्रदेश में 459 में 391, महाराष्ट्र में 435 में 359, पश्चिम बंगाल में 378 में 303 और राजस्थान में 332 में 268 अधिकारी पद पर थे। IPS में भी उत्तर प्रदेश में 541 में 510, मध्य प्रदेश में 319 में 271 और महाराष्ट्र में 329 में 306 अधिकारी कार्यरत थे।
मौजूदा समय की बात करें तो देशभर में IAS के कुल 6,877 पद स्वीकृत हैं और इन पदों में से 5,577 अधिकारी तैनात हैं, जबकि IPS के 5,099 स्वीकृत पदों के मुकाबले 4,594 अधिकारी कार्यरत हैं। यानी कुल स्वीकृत अधिकारियों की संख्या से तैनात अधिकारियों की संख्या काफी कम है।
