उत्तराखंड वन विभाग में सीनियर IFS अधिकारी रंजन कुमार मिश्रा को मिले प्रमोशन पर अब विवाद हो गया है। रंजन कुमार मिश्रा को हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स (HoFF) बनाया गया है और उनकी सैलरी अब एपेक्स स्केल-17 में कर दी गई है लेकिन IFS अधिकारी संजीव चतुर्वेदी ने उनकी प्रमोशन पर आपत्ति जताई है। उन्होंने रंजन कुमार मिश्रा को एपेक्स स्केल (सबसे ज्यादा सैलरी) में पदोन्नति दिए जाने के फैसले पर सवाल उठाए हैं।
इस मामले में उन्होंने उत्तराखंड के मुख्य सचिव को कानूनी नोटिस भेजकर आरोप लगाया गया है कि रंजन कुमार मिश्रा ने लंबे समय तक अनिवार्य IPR दाखिल नहीं किया, इसके बावजूद उन्हें 1 दिसंबर 2025 से लेवल-17 में पदोन्नति दे दी गई। संजीव चतुर्वेदी ने इस मामले में विभाग से जांच की मांग भी की है।
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प्रमोशन पर उठे सवाल
रंजन कुमार मिश्रा उत्तराखंड कैडर के सीनियर IFS अधिकारी हैं और उन्हें एपेक्स वेतन में प्रमोशन दिए जाने को लेकर संजीव चतुर्वेदी ने सवाल उठाया है। उन्होंने पूछा कि क्या प्रमोशन से पहले अधिकारी के पूरे सेवा रिकॉर्ड और उनसे जुड़े सभी लंबित मामलों की पर्याप्त जांच हुई थी। संजीव चतुर्वेदी ने दावा नोटिस में बताया कि केंद्र सरकार के नियमों के मुताबिक पिछले साल का IPR 31 जनवरी तक दाखिल करना एपेक्स स्केल में अगले वेतन स्तर पर नियुक्ति के लिए जरूरी शर्त है। उन्होंने दावा किया कि रंजन कुमार ने लंबे समय तक IPR दाखिल नहीं किया।
CBI से जांच की मांग
इस मामले में संजीव चतुर्वेदी ने पूरे मामले की स्वतंत्र CBI जांच करवाने की मांग की गई है। उन्होंने नोटिस में इस प्रमोशन की समीक्षा करने, संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग की गई है। नोटिस में रंजन कुमार मिश्रा के साथ-साथ वन विभाग के तत्कालीन प्रमुख सचिव की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
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नोटिस में ओर क्या-क्या बताया?
संजीव चतुर्वेदी ने कुल 25 पेज का कानूनी नोटिस भेजा है, जिसमें उन्होंने प्रमोशन के नियमों की अनदेखी करने के आरोप लगाए हैं। इसके साथ ही उन्होंने त्तराखंड वन विभाग की कार्यप्रणाली, कार्बेट टाइगर रिजर्व, वन भूमि अतिक्रमण, अवैध पेड़ कटान, वन्यजीव अपराध, ट्रांसफर और अनुशासनात्मक कार्रवाई से जुड़े पुराने न्यायिक मामलों का भी जिक्र किया है। नोटिस में रंजन कुमार मिश्रा की घोषित और अघोषित संपत्तियों की जांच की भी मांग की गई है।
