केरलम के चर्चित मर्सिडीज-बेंज कार हादसा मामले में हाई कोर्ट ने अहम आदेश दिया है। उच्च न्यायालय ने गुरुवार को केरलम पुलिस को नाबालिग कार चालक के एडिशनल जिला जज पिता को गिरफ्तार न करने का आदेश दिया है। उधर, पीड़ित परिवार ने हाई कोर्ट के फैसले पर निराशा व्यक्त की।

 

जज ने केरल हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की थी। गुरुवार को जस्टिस कौसर एडप्पागथ की पीठ ने याचिका पर सुनवाई की। नाबालिग लड़के के पिता ने हाई कोर्ट को बताया कि कार को घर से उनकी जानकारी के बगैर ले जाया गया था। केरलम सरकार और आरोपी जज के वकील की दलीलों को सुनने के बाद न्यायमूर्ति कौसर एडप्पागथ ने पुलिस को उन्हें गिरफ्तार न करने का आदेश दिया। हालांकि अदालत ने जज से जांच में सहयोग देने को कहा है।

 

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हादसे में 55 वर्षीय शख्स की गई थी जान

25 अक्टूबर की सुबह कोच्चि में मर्सिडीज-बेंज कार ने एक स्कूटर सवार को टक्कर मार दी थी। हादसे में 55 वर्षीय जयबालाकृष्णन की मौत हो गई थी। पुलिस ने जज के नाबालिग बेटे के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 और मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 181 व 183 के तहत मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस ने दूसरे आरोपी के तौर पर जज का भी नाम शामिल था। उनके खिलाफ मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 199A के तहत केस दर्ज किया गया। पीड़ित परिवार ने जज को सस्पेंड करने की मांग कर रहा है।

 

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक जयबालकृष्णन की बेटी भद्रकीर्ति ने कहा, 'हम निश्चित रूप से निराश हैं, लेकिन उच्च न्यायालय के फैसले का सम्मान करते हैं। हम अपने वकील से चर्चा करेंगे और आगे की रणनीति तय करेंगे। हमारा इरादा इस मामले को कानूनी रूप से आगे बढ़ाने का है। हम एक कदम भी पीछे नहीं हटेंगे। हम अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।'

थाने से ही नाबालिग को छोड़ दिया गया

पुलिस ने रविवार शाम को नाबालिग को थाने से ही जमानत पर छोड़ दिया। जांच में पता चला कि मर्सिडीज-बेंज कार जज के नाम पर पंजीकृत है। किशोर न्याय बोर्ड से नाबालिग को जमानत मिलने के बाद पुलिस ने पिता को आरोपी बनाया था। बुधवार को पुलिस ने उनसे पूछताछ भी की थी। 

 

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पीड़ित परिवार की पक्षकार बनने की मांग

हादसे के विरोध में स्थानीय लोगों ने चेरानल्लूर थाने के बाहर विरोध-प्रदर्शन भी किया था। जान गंवाने वाले जयबालाकृष्णन एक ढाबा चलाते थे। स्कूटर से घर लौटते वक्त वह हादसे का शिकार हो गए थे। पीड़ित परिवार ने भी हाई कोर्ट में याचिका दाखिल है। परिवार ने मामले में पक्षकार बनने की मांग की है। अदालत इस पर बाद में विचार करेगी।