महाराष्ट्र सरकार ने एमबीबीएस (MBBS) की पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए बड़ी राहत का ऐलान किया है। सरकार ने एमबीबीएस के बाद एक साल तक सरकारी अस्पताल में काम करना जरूरी बनाने वाले सेवा बॉन्ड (Service Bond) को खत्म कर दिया है। इस फैसले से राज्य के हजारों मेडिकल छात्रों और नए डॉक्टरों को फायदा होगा।

 

अब जिन छात्रों ने एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर ली है। जिन छात्रों को अभी तक सरकारी अस्पताल में काम के लिए नहीं भेजा गया हैं उन्हें एक साल की जरूरी नौकरी नहीं करनी होगी। पहले छात्रों को पढ़ाई पूरी होने के बाद सरकारी अस्पताल में काम करना पड़ता था। अगर कोई ऐसा नहीं करता था तो उसे जुर्माना देना पड़ता था।

इस नियम को क्यों रद्द किया गया?

महाराष्ट्र सरकार ने यह नियम खत्म करने के पीछे कई कारण बताए हैं। 23 जुलाई को जारी सरकारी आदेश में बताया गया कि पिछले कुछ वर्षों में राज्य में मेडिकल कॉलेजों और एमबीबीएस की सीटों की संख्या काफी बढ़ी है। इसके कारण हर साल पहले से ज्यादा डॉक्टर पढ़ाई पूरी कर रहे हैं। लेकिन सरकारी अस्पतालों में बॉन्ड सेवा के लिए उतने पद उपलब्ध नहीं हैं।

 

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ऐसी स्थिति में कई डॉक्टरों को लंबे समय तक नियुक्ति का इंतजार करना पड़ता था। इससे उनकी आगे की पढ़ाई, नौकरी और करियर की शुरुआत में देरी होती थी। इसी परेशानी को देखते हुए सरकार ने एक साल की अनिवार्य सेवा बॉन्ड की व्यवस्था को समाप्त करने का फैसला किया।

स्वास्थ्य विभाग ने समाप्त करने की सिफारिश

9 जुलाई 2025 को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस नीति की समीक्षा की गई। बैठक के बाद सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग ने सुझाव दिया कि एक साल की अनिवार्य सेवा बॉन्ड की व्यवस्था को खत्म कर दिया जाए। इस सिफारिश को अब चिकित्सा शिक्षा विभाग ने भी मंजूरी दे दी है। इसके बाद सरकार ने एमबीबीएस छात्रों के लिए यह नियम समाप्त करने का फैसला लिया।

छात्रों को क्या फायदा होगा?

एक साल की सेवा बॉन्ड की अनिवार्यता खत्म होने से एमबीबीएस छात्रों को कई फायदे होंगे। अब उन्हें सरकारी अस्पताल में एक साल तक अनिवार्य काम नहीं करना पड़ेगा। इससे वे बिना इंतजार किए पीजी (MD/MS) की पढ़ाई की तैयारी कर सकेंगे या अपनी पसंद की नौकरी शुरू कर सकेंगे। छात्रों को बॉन्ड पोस्टिंग का लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। अगर वे सरकारी सेवा नहीं करना चाहते हैं, तो उन्हें बॉन्ड तोड़ने पर जुर्माना भी नहीं देना होगा। इससे उनका समय बचेगा और वे अपने करियर की शुरुआत जल्दी कर सकेंगे।

 

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MARD ने क्या कहा ?

महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (MARD) ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। MARD का कहना है कि इससे युवा डॉक्टरों को पीजी की पढ़ाई और करियर में बिना किसी देरी के आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। इस अहम सुधार में बदलाव करते हुए सेंट्रल एमएआरडी ने सरकार से अपील कि वह अब केवल एमबीबीएस की सीट संख्या बढ़ाने के बजाय राज्य की स्वास्थ्य देखभाल संबंधी इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर भी ध्यान दे।