लखनऊ। उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में फर्जी शैक्षिक प्रमाणपत्रों के सहारे सरकारी नौकरी हासिल करने का बड़ा मामला सामने आया है। बेसिक शिक्षा विभाग की जांच में टीईटी और डीएलएड (डीएड) के फर्जी अंकपत्रों के आधार पर नियुक्ति पाने वाले सात सहायक अध्यापकों की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई हैं।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) ने सभी आरोपित शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश भी जारी कर दिए हैं। बीएसए की जांच में सात शिक्षकों के टीईटी और डीएलएड के अंकपत्र फर्जी पाए गए। इसके बाद विभाग ने बिना देरी किए सभी की सेवाएं समाप्त कर दीं। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी नौकरी में फर्जी दस्तावेजों के जरिए प्रवेश करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
इन शिक्षकों पर गिरी कार्रवाई
कार्रवाई की जद में खैराबाद ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय हाजीपुर की सहायक अध्यापिका कुसुमलता, लहरपुर ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय भानपुर के मनीष सिंह और प्राथमिक विद्यालय गनेशपुर के भूपेंद्र कुमार आए हैं। जांच में इन तीनों के टीईटी अंकपत्र फर्जी पाए गए।वहीं महोली ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय बसारा की पूजा और प्राथमिक विद्यालय महुआकोला के विवेक कुमार के टीईटी और डीएलएड दोनों अंकपत्र फर्जी मिले। इसके अलावा सकरन ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय ताजपुर के मुरारी लाल रावत और प्राथमिक विद्यालय शिवपुरी के जय नारायण सिंह के टीईटी अंकपत्र भी फर्जी पाए गए।
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एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश
बीएसए ने सभी संबंधित खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया है कि सातों शिक्षकों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कराई जाए और उसकी प्रति बीएसए कार्यालय में उपलब्ध कराई जाए। विभाग का कहना है कि फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिए नौकरी हासिल करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
आगे भी चलेगा सत्यापन अभियान
बेसिक शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि शिक्षकों के शैक्षिक अभिलेखों का सत्यापन अभियान आगे भी जारी रहेगा। यदि जांच में किसी अन्य शिक्षक के दस्तावेज संदिग्ध या फर्जी पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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शिक्षा विभाग में मचा हड़कंप
एक साथ सात शिक्षकों की सेवा समाप्त होने और एफआईआर के आदेश के बाद बेसिक शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। माना जा रहा है कि अब अन्य जिलों में भी नियुक्त शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की जांच और तेज हो सकती है।
