बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) ने 17000 करोड़ रुपये की लागत से सड़कों की मरम्मत की। इसके बावजूद दो महीने में ही टूटी सड़कों से जुड़ी 8000 से अधिक शिकायतें सामने आ चुकी हैं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल 15 अगस्त तक बीएमसी को सड़क पर गड्ढों की कुल 8600 शिकायतें मिली थीं। इस वर्ष 10 जून से 20 अगस्त तक कुल 8032 शिकायतें मिलीं। इनमें से 7829 का समाधान कर दिया गया। वहीं 2852 शिकायतें अमान्य मिलीं।
रिपोर्ट में बताया गया कि 5000 से ज्यादा शिकायतें माई बीएमसी मार्ग फोरम के माध्यम से मिलीं। वहीं लोगों ने 1500 से अधिक शिकायतें व्हाट्सएप पर दर्ज कीं। 800 शिकायतें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के माध्यम से मिलीं। हालांकि बीएमसी का कहना है कि पिछली साल की तुलना में स्थिति में सुधार हुआ है।
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कहां से मिलीं सबसे अधिक शिकायतें
सबसे अधिक शिकायतें एस वार्ड भांडुप से (471) मिलीं। वहीं एम/ईस्ट वार्ड (गोवंडी, देओनार, मानखुर्द) से 461 शिकायतें मिलीं। एम/वेस्ट वार्ड (चेम्बूर और तिलक नगर) से 374 और एल वार्ड (कुर्ला, साकी नाका) से 357 शिकायतें मिलीं। अगर सबसे कम शिकायत वाले वार्ड की बात करें तो ए वार्ड से 61, डी से 62 और सी वार्ड से 69 शिकायतें मिली हैं।
यह शिकायतें बीएमसी के 17,000 करोड़ की लागत से सड़क सुधार अभियान के बावजूद आई हैं। यह प्रोजेक्ट साल 2022 में शुरू किया गया था। इसका लक्ष्य मुंबई के 2,050 किलोमीटर लंबे सड़क नेटवर्क में से 700 किलोमीटर की उन सड़कों को अपग्रेड करना था, जिनका अभी तक कंक्रीटीकरण नहीं हो पाया है।
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बीएमसी ने क्या कहा?
नगर निगम का कहना है कि 475 किमी सड़कों को पूरी तरह से कंक्रीट से पक्का कर दिया गया। वहीं 101 किमी सड़कों को आंशिक रूप से पक्का किया गया है। नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि बिजली के काम के लिए खोदे गए गड्ढे के आसपास मिट्टी धंसने से जुड़ी अधिक शिकायतें मिली हैं। बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिडे का कहना है कि कंक्रीटीकरण से गड्ढों की संख्या में कमी आई है, लेकिन जिन सड़कों का अभी तक कंक्रीटीकरण नहीं हो पाया है, वहां यह समस्या बनी हुई है।
