पंजाब के मानसा में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले परविंदर सिंह झोटा की गोली मारकर हत्या कर दी गई। 13 अक्टूबर को एक मेडिकल स्टोर पर हुए विवाद के दौरान उन पर गोलियां चलाई गईं। झोटा की हत्या के बाद इलाके में तनाव फैल गया और लोग न्याय की मांग करने लगे। परिवार शव का अंतिम संस्कार ना करने पर अड़ गया है और दबाव के बाद CBI जांच के आदेश हो गए हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह खुद परिवार से मिलने पंजाब पहुंचे थे और अन्य राजनीतिक दलों के तमाम नेता भी पंजाब पहुंच रहे हैं।
परविंदर सिंह झोटा का परिवार अभी तक अंतिम संस्कार के लिए तैयार नहीं हुआ है। परिवार सीएम भगवंत मान के इस्तीफे की मांग पर अड़ गया है। पंजाब के मानसा में परिवार को न्याय दिलवाने के लिए रोज लोग पहुंच रहे हैं। ऐसे में अब परविंदर सिंह झोटा का नाम पूरे पंजाब और देशभर में गूंज रहा है और लोग उनके बारे में जानना चाहते हैं।
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कौन था परविंदर सिंह झोटा?
परविंदर सिंह झोटा को आज हर कोई नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले एक एक्टिविस्ट के रूप में जानता है जिसने नशे के खिलाफ लड़ते हुए अपनी जान दे दी। हालांकि, मानसा के लोग उनकी कहानी के पुराने दौर के बारे में भी जानते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि परविंदर सिंह झोटा कुछ साल पहले तक खुद नशे करते थे। उनके पिता उनकी नशे की आदत से परेशान थे।
शुरुआत में वह खेलों से जुड़े रहे और बॉक्सिंग में राष्ट्रीय स्तर पर भी खेल चुके थे। हालांकि, कुछ समय बाद वह नशे की चपेट में आ गए। उनका परिवार उनसे परेशान हो गया था। मानसा के ही रहने वाले करण जिंदल ने खबरगांव से बात करते हुए बताया कि परविंदर सिंह झोटा के पिता उनकी शादी करने के लिए भी तैयार नहीं थे। पिता का कहना था कि एक नशेड़ी के साथ शादी करवाकर वह किसी महिला की जिंदगी खराब नहीं करेंगे।
कैसे बदला मन?
स्थानीय लोगों ने बताया कि नशे की लत के कारण परविंदर सिंह खुद परेशान थे। इस दौरान नशे के कारण उनके एक दोस्त की मौत ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया। इसके बाद उन्होंने नशा छोड़ने और दूसरे युवाओं को इस बुराई से बचाने का संकल्प लिया। यही घटना उनके जीवन का निर्णायक मोड़ बनी और वह नशे के खिलाफ अभियान चलाने लगे।
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नशे के खिलाफ आवाज बुलंद की
झोटा ने मानसा और आसपास के इलाकों में नशे के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया। वह संदिग्ध मेडिकल स्टोरों पर जाकर दवाइयों की बिक्री को लेकर सवाल उठाते, वीडियो बनाते और फेसबुक लाइव के माध्यम से अपनी बात लोगों तक पहुंचाते थे। उन्होंने एंटी-ड्रग टास्क फोर्स बनाई और गांवों में नशे रोकने के लिए अभियान चलाया। मेडिकल स्टोर वालों के साथ उनके कई बार विवाद हो चुके हैं और झोटा विवादों के कारण जेल भी गए थे।
हालांकि, मेडिकल स्टोर पर नशे का विरोध करने के दौरान ही उन पर गोली चलाई गई और अब वह इस संसार में नहीं रहे। झोटा की मौत के बाद नशे की आग में जल रहे पंजाब में जमकर विरोध शुरू हो गया। लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और मानसा में पक्का मोर्चा लगाकर लोग विरोध करने लगे हैं। पंजाब विधानसभा में भी परविंदर सिंह झोटा को श्रद्धांजलि दी गई और विपक्ष उनके लिए न्याय की मांग करते हुए प्रदर्शन कर रहा है।
