बिहार की राजधानी पटना के सचिवालय में नौकरी दिलाने के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। खुद को पदाधिकारी बताकर लोगों को नौकरी का झांसा देने वाले जीजा-साले को पटना पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। दोनों सचिवालय कैंपस में ही CDPO बहाली का बैनर लगाकर लोगों का वीडियो कॉल पर इंटरव्यू ले रहे थे। पुलिस ने मौके से पुलिस की वर्दी और IAS अधिकारियों के फर्जी सिग्नेचर वाले सर्टिफिकेट भी बरामद किए हैं।
पूरे मामले का खुलासा सेंट्रल SP ममता कल्याणी ने किया। उन्होंने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में एक अजय कुमार है जो खुद को स्वास्थ्य विभाग का अनुभाग अधिकारी (सेक्शन ऑफिसर) बताता था। दूसरे आरोपी की पहचान उसके साले राज कुमार के रूप में हुई है। अजय ने राज कुमार को पुलिस कांस्टेबल बना रखा था ताकि लोगों को पूरा मामला असली लगे और किसी को शक न हो।
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फर्जी आईकार्ड से खुली पोल
सेंट्रल एसपी ममता कल्याणी ने बताया कि समाज कल्याण विभाग के सहायक प्रशाखा पदाधिकारी राजनाथ सिंह ने पुलिस को सूचना दी थी। उन्होंने बताया कि कैंपस के बरामदे में एक व्यक्ति ने CDPO बहाली से जुड़ा बैनर लगा रखा है और वीडियो कॉल के जरिए किसी से बातचीत कर रहा है और इंटरव्यू ले रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। जांच के दौरान पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है।
सूचना के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर संबंधित व्यक्ति से पूछताछ की। उसने खुद को स्वास्थ्य विभाग का प्रशाखा पदाधिकारी बताया। हालांकि उसके आईकार्ड और दूसरे दस्तावेजों की जांच की गई तो वे फर्जी पाए गए। तलाशी के दौरान पुलिस को उसके पास से पुलिस की वर्दी और फर्जी सर्टिफिकेट भी मिले। इन सर्टिफिकेट पर IAS S. सिद्धार्थ और आनंद किशोर के फर्जी सिग्नेचर बने हुए थे। पुलिस के अनुसार, आरोपी का साला पुलिस कांस्टेबल की वर्दी पहनकर उसकी पहचान को असली दिखाने और ठगी में उसका साथ दे रहा था।
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पुलिस ने लोगों को किया अलर्ट
बरामद सामान के आधार पर पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि दोनों आरोपियों ने कितने लोगों से नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे लिए या उनके साथ ठगी की है। पुलिस इस मामले से जुड़े दूसरे लोगों के बारे में भी जानकारी जुटा रही है। पुलिस का मानना है कि यह एक बड़ा रैकेट हो सकता है। दोनों आरोपी लंबे समय से इस तरह लोगों को ठग रहे थे।
सेंट्रल एसपी ने बताया कि दोनों आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। उनके मोबाइल फोन और बरामद दस्तावेजों की जांच हो रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि अब तक कितने लोगों से पैसे लिए गए हैं और क्या इसमें कोई और सरकारी कर्मचारी भी शामिल है। इस घटना के बाद सचिवालय की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। सवाल है कि हाई सिक्योरिटी जोन में दो फर्जी लोग कैसे घुस गए और वहां बैनर लगाकर इंटरव्यू लेने लगे। उन्हें किसी ने रोका क्यों नहीं?
अगर समय रहते किसी अधिकारी की नजर नहीं पड़ती तो यह फर्जीवाड़ा और आगे बढ़ सकता था। पुलिस ने लोगों से भी अपील की है कि सरकारी नौकरी के नाम पर किसी भी झांसे में न आएं। कोई भी सरकारी बहाली केवल आयोग या संबंधित विभाग की ओर से ही की जाती है। अगर कोई व्यक्ति पैसे लेकर नौकरी दिलाने का दावा करता है तो तुरंत पुलिस को सूचना दें।
