अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के महिला कॉलेज के हॉस्टल में खराब खाने की शिकायत लेकर छात्राएं प्रदर्शन कर रही हैं। सोमवार को सैंकड़ों की संख्या में छात्राएं खाने की खराब क्वालिटी को लेकर प्रदर्शन कर रही हैं। प्रदर्शन के दौरान छात्राएं थाली और चम्मच लेकर मेस के बाहर पहुंचीं और अपनी शिकायतों को लेकर विरोध दर्ज कराया। इस दौरान प्रॉक्टोरियल टीम के साथ छात्राओं की पहले कहासुनी हुई और फिर मामला झड़प और आखिर में धक्का-मुक्की तक पहुंच गया।
छात्राओं का आरोप है कि हॉस्टल में लंबे समय से खाने की गुणवत्ता काफी ज्यादा खराब बनी हुई है। उनका कहना है कि खाने में कई बार कीड़े मिलने की शिकायत सामने आई है। छात्राओं के मुताबिक, खाने में प्लास्टिक, बाल, कांच के टुकड़े, नाखून और पत्थर जैसी चीजें भी मिली हैं। इन शिकायतों को लेकर छात्राओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
4 घंटे हुआ हंगामा
यह मामला अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के अब्दुल्लाह हॉल का बताया जा रहा है। प्रदर्शन के दौरान छात्राओं की डिप्टी प्रॉक्टर से बहस हुई और इस दौरान वह जमीन पर गिर गए। इसके बाद प्रॉक्टोरियल टीम ने पुलिस को बुलाया और पुलिस के कई जवानों ने प्रॉक्टोरियल टीम और छात्राओँ को अलग किया। इसके बाद पुलिस ने बातचीत की और मामले को शांत करवाने की कोशिश की। छात्राओं ने प्रॉक्टर टीम पर उनके साथ धक्का-मुक्की करने का गंभीर आरोप लगाया है। इसके साथ ही छात्राओं ने इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग भी की है।
क्या बोली छात्राएं?
प्रदर्शन कर रही एक छात्रा ने कहा कि यह विरोध सिर्फ एक दिन के खाने की समस्या को लेकर नहीं है। उन्होंने कहा, 'यहां पर प्रदर्शन चल रहा है क्योंकि खाने में प्लास्टिक, नाखुन, बाल और कांच जैसी चीजें मिल रही हैं। हालत इतने खराब हो गया है कि कोई खाना खाना ही नहीं चाह रहा है। वॉर्डन भी बात सुनने को तैयार नहीं है।' छात्राओं का आरोप है कि जब खाने में इस तरह की चीजें मिलने की शिकायत सामने आती है तो इसकी जिम्मेदारी लेने वाला कोई नहीं होता।
क्या बोले प्रोक्टर?
इस मामले में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के प्रॉक्टर डॉ. नावेद खान ने कहा कि छात्राओं की शिकायतों और सुझावों पर हॉस्टल प्रशासन लगातार बातचीत कर रहा है। पिछले 10 दिनों में छात्राओं के साथ 3-4 बैठकें भी हो चुकी हैं। उन्होंने कहा छात्राओं को करीब 1400 रुपये के मासिक योगदान में पूरे महीने का भोजन उपलब्ध कराया जाता है। उनका कहना है कि महंगाई के चलते छात्राओं की हाई क्वालिटी फूड की सभी मांगों को 1400 रुपये के मासिक बजट में पूरा करना संभव नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि खाने की क्वालिटी में सुधार के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है।
