राजधानी दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में पिछले दो दशक से छात्रसंघ का चुनाव नहीं हुआ है। चुनाव कराने के लिए विश्वविद्यालय के छात्र पिछले कुछ दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। जामिया मिल्लिया इस्लामिया देश के उन विश्वविद्यालयों में से एक है, जहां छात्रों को बेहतरीन शिक्षा दी जाती है। नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (NIRF) के मुताबिक, यह विश्वविद्यालय तीसरे स्थान पर है। इसका मतलब साफ है कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया देश के टॉप विश्वविद्यालयों में से एक है।
यह विश्वविद्यालय लोकतंत्र के मामले में बाकी शिक्षण संस्थानों से पीछे है, जहां पिछले 20 साल से छात्रसंघ का चुनाव नहीं हुआ है। छात्रसंघ चुनाव के लिए छात्रों ने 12 अक्टूबर 2026 से भूख हड़ताल शुरू की थी, जो अब तक जारी है। छात्रसंघ को 2006 में भंग कर दिया गया था। इसके बाद दोबारा चुनाव कराने की मांग छात्रों ने की थी।
विश्वविद्यालय में पांच छात्रों ने 12 अक्टूबर को भूख हड़ताल शुरू की थी। इनमें फैजान अली खान, रेहान पवार, मोहम्मद जासिम खान और रेहान हैदर शामिल हैं। 29 अक्टूबर को जामिया मिल्लिया इस्लामिया का 106वां स्थापना दिवस होगा, जिसके लिए तालीमी मेला आयोजित किया गया था। छात्रों की भूख हड़ताल को देखते हुए प्रशासन ने तालीमी मेला रद्द कर दिया है। अब सवाल उठता है कि पिछले 20 साल से जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रसंघ के चुनाव क्यों नहीं हुए? साथ ही सवाल उठता है कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया में ऐसा क्या हुआ था कि 2006 में छात्रसंघ भंग कर दिया गया?
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छात्रों की मांग क्या है?
जब 12 अक्टूबर को विश्वविद्यालय में छात्रों ने छात्रसंघ का चुनाव कराने की मांग की, तब प्रशासन ने छात्रों को आश्वासन दिया कि चुनाव के दिशा-निर्देश बनाने के लिए एक कमेटी बनाई गई है। यह कमेटी 18 अक्टूबर को बनाई गई थी। हालांकि, विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह नहीं बताया कि छात्रसंघ का चुनाव कब होगा। इसी वजह से छात्रों ने मांग की कि मतदान की एक निर्धारित तारीख लिखित रूप में बताई जाए। तभी छात्रों की भूख हड़ताल खत्म होगी। अब विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी कक्षाएं 24 अक्टूबर को ऑनलाइन कर दी हैं, ताकि विश्वविद्यालय में किसी भी प्रकार की अशांति न फैले।
2006 में क्यों भंग हुआ छात्रसंघ?
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में 2005 में पिछली बार छात्रसंघ का चुनाव हुआ था। इसके बाद 2006 में छात्रों के दो गुटों के बीच विवाद हो गया था। गुटों के बीच विवाद के दौरान विश्वविद्यालय में गोली चल गई थी। इस घटना को देखते हुए कॉलेज प्रशासन ने 2006 में छात्रसंघ भंग कर दिया। इसके बाद विश्वविद्यालय में हिंसा की स्थिति न बने, इसलिए प्रशासन ने छात्रसंघ का चुनाव नहीं कराया।
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2006 के बाद 2012 में छात्रसंघ चुनाव की मांग उठी थी, जिसके लिए छात्रों ने हाई कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था। उस दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन ने कोर्ट को बताया था कि परिस्थितियों को देखते हुए छात्रसंघ का चुनाव नहीं होना चाहिए। इसके बाद 2017 में चुनाव की मांग को लेकर छात्रों ने विश्वविद्यालय में विरोध प्रदर्शन किया। अब 2026 में छात्रों ने भूख हड़ताल शुरू की है।
