आईआईटी दिल्ली में एमएससी फिजिक्स के 31 साल के छात्र ऋषिकेश कुमार की शनिवार सुबह कॉलेज की छठी मंजिल से गिरकर मौत हो गई जिसके बाद से छात्रों में बहुत गुस्सा है और वे इसे आत्महत्या मानने से बिल्कुल इनकार कर रहे हैं। उनका आरोप है कि कॉलेज प्रशासन की बड़ी लापरवाही की वजह से यह हादसा हुआ है जिसके विरोध में उन्होंने अपनी क्लास बंद कर दी हैं और कैंपस में जोरदार प्रदर्शन किया है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए आईआईटी दिल्ली प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाया है और इस पूरी घटना की जांच के लिए पांच सदस्यों की एक बाहरी कमेटी बना दी है। इस कमेटी में उत्तराखंड के पूर्व डीजीपी और आईआईटी दिल्ली के पूर्व छात्र अशोक कुमार, एम्स नई दिल्ली के मनोचिकित्सा विभाग प्रमुख प्रोफेसर प्रताप शर्मा, दो छात्र प्रतिनिधि और संस्थान के रजिस्ट्रार शामिल हैं जहां रजिस्ट्रार सचिव और संयोजक की भूमिका निभाएंगे। यह कमेटी मामले के सभी पहलुओं की गहराई से जांच करके दो हफ्ते के अंदर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।

 

यह घटना शनिवार सुबह की है। ऋषिकेश कुमार सुबह करीब 8:00 बजे कॉलेज के मुख्य गेट से अंदर आए थे। वह सीधे लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स की छठी मंजिल पर पहुंचे और वहीं से कूद गए। सुबह 8:33 बजे पुलिस को फोन करके इसकी सूचना दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस वहां पहुंची और उन्हें तुरंत कॉलेज के अस्पताल ले गई जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। ऋषिकेश मूल रूप से बिहार के रहने वाले थे और वह अपने घर के इकलौते बेटे थे। पिछले साल ही उनके पिता का भी निधन हो गया था। मानसिक तनाव की वजह से दिल्ली के एक मानसिक स्वास्थ्य केंद्र में उनका इलाज हुआ था। इलाज के बाद वह अपनी मां के साथ कॉलेज के बाहर किराए के मकान में रहने लगे थे। इस हादसे के बाद पुलिस को मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। किच्छागढ़ थाने की पुलिस ने आईआईटी दिल्ली की शिकायत के आधार पर अंजान लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है और मामले की जांच कर रही है।

 

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इंसाफ के लिए सड़कों पर उतरे छात्र

यह घटना होने के दो दिन बाद यानी सोमवार को छात्रों का गुस्सा पूरी तरह फूट पड़ा। सैकड़ों छात्र अपनी पढ़ाई और क्लास छोड़कर सड़कों पर उतर आए और कॉलेज कैंपस में प्रदर्शन करने लगे। छात्रों का साफ कहना था कि ऐसी घटना के बाद कॉलेज में सामान्य दिनों की तरह पढ़ाई जारी नहीं रखी जा सकती। छात्रों के विरोध और हंगामे को देखते हुए दोपहर 1:00 बजे के करीब अकादमिक विभाग के उप-रजिस्ट्रार ने एक ईमेल भेजा जिसमें उस दिन की सभी तय क्लास रद्द करने का ऐलान किया गया। बारिश होने के बावजूद छात्र डटे रहे और उन्होंने मोमबत्ती लेकर मार्च निकाला। इस प्रदर्शन को समर्थन देने के लिए जेएनयू और आइसा के सदस्य भी आईआईटी दिल्ली के बाहर पहुंच गए थे।

 

छात्रों का कहना है कि पिछले ढाई साल यानी 30 महीनों में आईआईटी दिल्ली में यह आठवीं छात्र मौत है। पुरानी घटनाओं के बाद पहले भी कई कमेटियां बनाई गई थीं। जैसे अगस्त 2024 में एक कमेटी ने रिपोर्ट दी थी कि पढ़ाई का बहुत ज्यादा तनाव, कोचिंग का दबाव, भेदभाव और सही सलाह न मिलना इन सबका मुख्य कारण हैं। छात्रों का आरोप है कि इतनी मौतें होने के बाद भी कॉलेज प्रशासन ने कोई बड़ा सुधार नहीं किया है।

छात्रों की मुख्य मांगें

छात्रों के एक समूह ने आईआईटी दिल्ली के डायरेक्टर रंगन बनर्जी से मुलाकात की और उन्हें एक लिखित मांग-पत्र सौंपा। छात्रों ने मांग की है कि ऋषिकेश कुमार की मौत की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। इसके अलावा इस बात की भी जांच होनी चाहिए कि इलाज के बाद ऋषिकेश को उनका हॉस्टल का कमरा वापस क्यों नहीं दिया गया, जिससे उन्हें बाहर किराए पर रहना पड़ा। छात्रों ने यह भी मांग की है कि छात्र कल्याण विभाग, हॉस्टल प्रबंधन और फिजिक्स विभाग के कुछ अधिकारियों को अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए,  उन पर मृत छात्र के प्रति गलत टिप्पणियां करने का आरोप है।

 

इसके साथ ही मृतक छात्र के परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिए जाने की मांग भी रखी गई है। छात्रों ने कहा है कि कॉलेज को अपनी मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी साफ तरीके से सबके सामने रखनी चाहिए। आखिर में छात्रों ने यह मांग भी की है कि इस प्रदर्शन में शामिल किसी भी छात्र के खिलाफ कॉलेज प्रशासन द्वारा कोई सजा वाली कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।

 

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अधिकारियों के साथ हुई बैठक

छात्रों के भारी विरोध और मांगों को देखते हुए आईआईटी दिल्ली प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। प्रशासन ने इस पूरे मामले की जांच के लिए पांच सदस्यों की एक बाहरी कमेटी बनाई है। इस कमेटी में उत्तराखंड के पूर्व डीजीपी और आईआईटी दिल्ली के पूर्व छात्र अशोक कुमार, एम्स नई दिल्ली के मनोचिकित्सा विभाग प्रमुख प्रोफेसर प्रताप शर्मा, दो छात्र प्रतिनिधि और संस्थान के रजिस्ट्रार शामिल हैं। इसमें रजिस्ट्रार सचिव और संयोजक के रूप में काम करेंगे। यह कमेटी मामले के सभी पहलुओं की गहराई से जांच करेगी और दो हफ्ते के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।