पश्चिम बंगाल के कोलकाता में सोनारपुर इलाके में शनिवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद अभिषेक बनर्जी के दौरे के समय एक गुस्साई भीड़ ने हमला कर दिया था। इस घटना के बाद वहां बहुत ज्यादा डर फैल गया और सुरक्षा न होने की वजह से जान गंवाने वाले टीएमसी कार्यकर्ता संजू करमाकर के बुजुर्ग माता-पिता अपना घर छोड़कर चले गए हैं। वे शनिवार की रात को ही सोनारपुर से निकलकर कोलकाता में ईएम बाईपास के पास कालिकापुर इलाके में अपनी शादीशुदा बेटी संगीता प्रमाणिक के घर पहुंच गए हैं।

 

शनिवार को टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी संजू करमाकर के परिवार से मिलने उनके सोनारपुर वाले घर गए थे। वहां उनके दौरे के समय एक गुस्साई भीड़ ने उन पर हमला कर दिया जिसके बाद सुरक्षा बलों को अभिषेक बनर्जी को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। अभिषेक बनर्जी के वहां से जाते ही संजू के बुजुर्ग माता-पिता के मन में अपनी सुरक्षा को लेकर गहरा डर बैठ गया और उन्होंने उसी रात अपना घर छोड़ दिया।

 

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सुरक्षा की मांग

40 साल के संजू करमाकर की शादी नहीं हुई थी और उनकी मौत के बाद उनके बुजुर्ग माता-पिता घर में बिल्कुल अकेले रह रहे थे। शनिवार रात के हंगामे के बाद उन्हें तुरंत वहां से हटाकर कालिकापुर में उनकी बेटी के घर भेजा गया। संजू की बहन संगीता प्रमाणिक ने बताया कि उनके भाई के घर के आसपास का पूरा इलाका इस समय बहुत तनावपूर्ण और डरावना बना हुआ है।

 

वहां लगातार धमकियां मिल रही हैं जिससे उनके माता-पिता पर हमला होने का खतरा था। संगीता ने सुरक्षा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब पार्टी के इतने बड़े राष्ट्रीय महासचिव पर हमला हो सकता है और स्थानीय पार्षद के साथ-साथ टीएमसी कार्यकर्ता खुद डरे हुए हैं तो उनके माता-पिता जैसे आम लोगों की क्या हैसियत है। उन्होंने कहा कि वह बिना किसी सुरक्षा के अपने माता-पिता को वहां अकेला नहीं छोड़ सकती थीं इसलिए उन्होंने प्रशासन से सुरक्षा की मांग की है।

संजू की मौत का पूरा मामला

अभिषेक बनर्जी के मुतबिक संजू करमाकर पर 4 मई को चुनाव के नतीजे आने के अगले दिन हमला किया गया था। हमले के बाद वह कई दिनों तक अस्पताल में रहें और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। अभिषेक बनर्जी ने खुद भी संजू के माता-पिता को सलाह दी थी कि वे कुछ दिनों के लिए किसी सुरक्षित जगह पर चले जाएं।  संजू की बहन संगीता ने बताया कि उनके भाई पर 5 मई को हमला हुआ था जो कि उस दिन का अगला दिन था जब बीजेपी ने वहां अपनी जीत हासिल की थी। संगीता ने यह भी बताया कि हमले के बाद स्थानीय लोग इतने डरे हुए थे कि कोई भी उनके भाई को अस्पताल ले जाने के लिए तैयार नहीं था।

 

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अलग-अलग दावे

टीएमसी का आरोप है कि संजू करमाकर चुनाव के बाद हुई राजनीतिक हिंसा का शिकार हुए हैं और बीजेपी के समर्थकों ने पीट-पीटकर उनकी जान ली है। दूसरी तरफ बीजेपी नेताओं और स्थानीय लोगों का कहना बिल्कुल है कि संजू की मौत किसी लड़ाई-झगड़े या राजनीतिक हिंसा में नहीं हुई थी बल्कि उन्हें अचानक ब्रेन स्ट्रोक हुआ था। बीजेपी ने यह भी कहा कि संजू के परिवार ने उनकी मौत को लेकर पुलिस में राजनीतिक हिंसा की कोई शिकायत या एफआईआर दर्ज नहीं कराई थी। कुछ स्थानीय लोगों को यह भी शक था कि संजू की मौत ज्यादा नशा करने या फिर किसी जमीन-जायदाद के पुराने विवाद की वजह से हुई होगी।