भारत कल यानी 15 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है। अंग्रेजों की दशकों की गुलामी से आजाद होने का जश्न हर भारतीय 15 अगस्त को मनाता है लेकिन पंजाब और हरियाणा की राजधानी चंडीगढ़ में आजादी के जश्न से पहली शाम एक और आजादी की मांग उठ रही है। यह मांग उन जीवों की आजादी के लिए उठ रही है जिन्हें कई सालों से मनुष्यों ने अपना गुलाम बनाकर रखा हुआ है। चंडीगढ़ में पशु अधिकार कार्यकर्ताओं के एक ग्रुप ने पशुओं के साथ होने वाले दुर्व्यवहार और उनके शोषण को खत्म करने के लिए एक सांकेतिक प्रदर्शन किया। 

 

14 अगस्त की शाम को, स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर, पशु अधिकार कार्यकर्ताओं के एक समूह ने चंडीगढ़ के मशहूर सुखना लेक पर एक प्रतीकात्मक पिंजरे के साथ एक प्रदर्शन आयोजित किया। उनकी मांग भोजन, कपड़े, मनोरंजन या किसी अन्य उद्देश्य के लिए जानवरों के व्यवस्थित दुर्व्यवहार और शोषण को समाप्त करने की है।

 

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क्या बोले प्रदर्शनकारी?

इस कार्यक्रम में मौजूद कार्यकर्ताओं में से एक, तान्या भाटिया ने कहा, 'हम आज यहां जानवरों के साथ हो रहे अन्याय को उजागर करने के लिए एकत्र हुए हैं। सालों से जानवरों के साथ जो दुर्व्यवहार हो रहा है अब उसे खत्म करने का समय आ गया है। भारत को आजादी मिल गई है लेकिन अभी तरक इन जानवरों को आजादी नहीं मिली है।' उन्होंने पिंजरे को उन लाखों जानवरों का एक प्रत्यक्ष प्रतीक बताया, जो उनके शोषण से मुनाफा कमाने वाले उद्योगों में फंसे हुए हैं।

जानवरों की आजादी की मांग

विरोध प्रदर्शन के दौरान, लगभग 15 समर्थक एकत्र हुए और जानवरों की गुलामी की अनुमति देने वाले कानूनों को रद्द करने की मांग करते हुए नारे लगाए। मीडिया के साथ अपनी बातचीत में, अन्य कार्यकर्ताओं ने समूह की विचारधारा और मांगों के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि जिस तरह से मनुष्यों को आजादी से जीवन का अधिकार है उसी तरह इन जानवरों को भी आजादी के साथ जीने का अधिकार है। इस दौरान प्रदर्शकारियों ने व्यापार के लिए मुर्गी फार्म और अन्य जगहों पर पशुओं के साथ हो रहे दुर्व्यवहार और अत्याचार का भी जिक्र किया। 

 

प्रदर्शन के आयोजकों में से एक, रितीश पुरी ने विभिन्न उद्योगों में निहित व्यवस्थित दुर्व्यवहार के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने पालतू पशु उद्योग, चिड़ियाघरों, पशु परीक्षण प्रयोगशालाओं और पशु पालन कार्यों में जानवरों की पीड़ा का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा, 'यह सब तुरंत रोका जाना चाहिए और जो कोई भी जानवरों के साथ दुर्व्यवहार करता है, उसे कानूनी तौर पर दंडित किया जाना चाहिए।' 

पिंजरे में बंद मुर्गी

इस प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों में से एक कार्यकर्ता एक पिंजरे में सांकेतिक तौर पर मुर्गी बनकर कैद हो गई। उन्होंने संदेश देने की कोशिश की कि किस तरह जानवरों को कैद करके रखा जाता है। सांकेतिक तौर पर मुर्गी के रूप में पिंजरे में बंद जैस्मीन कौर ने खबरगांव के सवालों के जवाब  देते हुए कहा कि हमारे भारत में सती प्रथा जैसी कई गलत प्रथाओं का पालन किया जाता था लेकिन यह प्रथाएं समय के साथ खत्म की गई और अब पशुओं और जानवरों के साथ क्रूरता को खत्म करने का समय भी आ गया है। 

 

आमतौर पर तर्क दिया जाता है कि खान-पान के विकल्प व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मामला है। खबरगांव ने यह सवाल जैस्मीन से भी किया जिसका जवाब देते हुए उन्होंने कहा, 'जब इसमें कोई ऐसा पीड़ित शामिल हो जिसे आपकी मांग के कारण केवल कुछ मिनटों की खुशी के लिए पैदा किया गया हो, तो यह कभी भी कोई व्यक्तिगत विकल्प नहीं हो सकता।'

 

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डेयरी के सवालों पर हुई चर्चा

डेयरी से संबंधित सवालों पर, जैस्मीन ने उद्योग की मानक प्रथाओं को समझाया, जिसमें कृत्रिम गर्भाधान के माध्यम से बार-बार जबरन गर्भधारण कराना, बछड़ों को अलग करना और दूध देना बंद करने के बाद गायों और भैंसों को मार देना शामिल है। उन्होंने बताया कि डेयरी उद्योग के कारण ही भारत गोमांस (बीफ) का एक प्रमुख निर्यातक है और दूध देना बंद कर चुकी भैंसों को मार दिया जाता है और उनका निर्यात किया जाता है। उन्होंने आगे कहा कि हमारा उद्देश्य समाज को इस बारे में जागरूक करना है और जानवरों के साथ होने वाली क्रूरता को खत्म करना है।