उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र से ठीक पहले समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि 'भारतीय जनता पार्टी सरकार की अब सिर्फ चार दिन की सरकार बची है, इसलिए विधानसभा का सत्र भी चार दिन का रखा गया है।'

 अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि सरकार सदन में जनता के मुद्दों से बचने की कोशिश करेगी, जबकि समाजवादी पार्टी बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, बिजली दरों, एक्सप्रेसवे, शिक्षा, राम मंदिर चढ़ावा चोरी और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है।

'सदन नहीं, सिर्फ औपचारिकता निभा रही सरकार'

समाजवादी पाट मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार विधानसभा सत्र को गंभीरता से नहीं ले रही, बल्कि केवल संवैधानिक औपचारिकता पूरी कर रही है। उनका दावा था कि सरकार को खुद भरोसा नहीं है कि वह दोबारा सत्ता में लौटेगी, इसलिए सदन की कार्यवाही को भी गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।

अखिलेश यादव ने कहा कि पहला दिन श्रद्धांजलि प्रस्ताव में निकल जाएगा। दूसरे दिन सरकार अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश करेगी। तीसरे दिन प्रदेशभर में हुए छात्र आंदोलनों और युवाओं के सवालों से बचने का प्रयास करेगी, जबकि चौथे दिन अन्य विवादों के बीच जल्द सत्र समाप्त कर दिया जाएगा।

 

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इन मुद्दों पर सरकार को घेरेगी समाजवादी पाट

 

समाजवादी पाट अध्यक्ष ने कहा कि उनकी पार्टी के विधायक सदन में बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, पेपर लीक, बिजली दरों में बढ़ोतरी, एक्सप्रेसवे निर्माण की गुणवत्ता, कानून-व्यवस्था, शिक्षा व्यवस्था, सरकारी भर्तियों, राम मंदिर में चढ़ावा चोरी और जौहर विश्वविद्यालय जैसे मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगेंगे। उन्होंने कहा कि विपक्ष जनता से जुड़े हर मुद्दे को मजबूती से उठाएगा।

अखिलेश यादव ने कहा कि जौहर विश्वविद्यालय को नुकसान पहुंचाया गया है। उन्होंने दावा किया कि यदि वर्ष 2027 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनी तो प्रदेश में इससे भी बेहतर जेपीएनआईसी तैयार कराया जाएगा और विकास कार्यों को नई गति दी जाएगी।

स्कूल मर्जर और पीडीए का मुद्दा भी उठाया

अखिलेश यादव ने 'पीडीए ऑडिट-4' जारी करते हुए आरोप लगाया कि प्रदेश में करीब 26 हजार सरकारी स्कूल बंद या मर्ज कर दिए गए हैं, जिससे पिछड़ा, दलित और आदिवासी समाज के बच्चों की शिक्षा सबसे अधिक प्रभावित होगी। उन्होंने दावा किया कि स्कूलों के मर्जर से करीब 28 लाख बच्चों का नामांकन घटा है, 62 हजार से अधिक शिक्षकों की संख्या कम हुई है और 81 हजार से ज्यादा पद खाली पड़े हैं। उन्होंने सरकार पर नई शिक्षक भर्ती नहीं करने का भी आरोप लगाया।

 

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सत्र पर बढ़ेगा सियासी तापमान

मानसून सत्र शुरू होने से पहले अखिलेश यादव के आक्रामक तेवरों ने साफ संकेत दे दिए हैं कि सदन के भीतर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक भिड़ंत देखने को मिलेगी। सरकार जहां अनुपूरक बजट और विधायी कार्यों को आगे बढ़ाने की तैयारी में है, वहीं समाजवादी पार्टी जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति के साथ सदन में उतरने जा रही है।