पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नए विवाद ने जन्म ले लिया है। यह विवाद तब बढ़ा, जब कोलकाता के कैमक स्ट्रीट स्थित तृणमूल कांग्रेस TMC के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी के ऑफिस पर लगे पार्टी के बिलबोर्ड को गुरुवार को हटा दिया गया। कोलकाता म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (KMC) और पुलिस की संयुक्त टीम की, इस कार्रवाई के बाद मामला एक बड़े राजनीतिक टकराव में बदल गया। इस पर अभिषेक बनर्जी ने पूछा है कि जब टीएमसी हार गई है तो इतना डर क्यों है?
 
गुरुवार को पुलिस की कार्रवाई के दौरान जमकर हंगामा हुआ। कथित तौर पर अवैध साइनबोर्ड हटाने पहुंचे अधिकारियों और TMC कार्यकर्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की भी हुई। अब इसको लेकर अभिषेक बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर निशाना साधा है। 

अभिषेक बनर्जी ने क्या कहा? 

अभिषेक बनर्जी ने पुलिस और सिविक अधिकारियों द्वारा पार्टी ऑफिस पर की गई कार्रवाई के बाद राजनीतिक बदले की भावना का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'यह राजनीतिक बदले की भावना है। मैं बीजेपी से कहना चाहता हूं कि आप इतने डरे हुए क्यों हैं? आप दावा करते हैं कि तृणमूल हार गई है। अगर तृणमूल सच में हार गई है, तो इतना डर ​​क्यों है कि आपको पार्टी को तोड़ने की जरूरत महसूस हो रही है? ऑफिस के बोर्ड तोड़ने की क्या जरूरत है? तृणमूल पार्टी के सदस्यों को झूठे मामलों में फंसाने की क्या जरूरत है? इतना डर ​​क्यों?'

 

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अभिषेक बनर्जी ने कहा कि आप तृणमूल के सांसदों और विधायकों को अपनी पार्टी में शामिल कर रहे हैं। हम इस मामले को हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक ले जाएंगे। बीजेपी नेताओं को लग सकता है कि उनका समय आ गया है और लोग उनकी हर बात मान लेंगे।

उन्होंने आगे कहा कि अगर बीजेपी में हिम्मत और ताकत है, तो वे तृणमूल को रोकने की कोशिश करें। पुलिस और कार्यकर्ताओं का एक वर्ग बीजेपी को खुश करने के लिए उनके साथ मिलीभगत कर रहा है। हमने देखा है कि लोग बिना यूनिफॉर्म, आईडी कार्ड, बैज या पुलिस के किसी निशान के, सादे कपड़ों में आकर, बीजेपी कार्यकर्ता बनकर TMC का बोर्ड तोड़ रहे हैं। 

 

हमने यहां तृणमूल का बोर्ड हटाए जाने के मामले में हाई कोर्ट में पहले ही याचिका दायर कर दी है। इस पर सुनवाई होनी है। तृणमूल कांग्रेस इस मामले को हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लड़ेगी, और हम यह सुनिश्चित करेंगे कि बीजेपी को खुश करने के लिए संविधान के खिलाफ काम करने वाले हर अधिकारी को सस्पेंड किया जाए। देखते हैं कि संविधान की ताकत ज्यादा है या बीजेपी की।

 

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क्या है पूरा मामला?

पुलिस एक नोटिस लेकर अभिषेक बनर्जी के ऑफिस पहुंची, जिसे TMC ने अवैध बताया। बनर्जी खुद मौके पर पहुंचे और अधिकारियों से वैध नोटिस मांगा लेकिन TMC के मुताबिक KMC प्रतिनिधि कोई वैध नोटिस नहीं दिखा सके। बाद में पुलिस जबरन ऑफिस में घुस गई। TMC का आरोप है कि इस दौरान धक्का-मुक्की और बदसलूकी हुई। 

डेरेक ओ'ब्रायन और अभिषेक बनर्जी के साथ भी पुलिस ने मारपीट की, जबकि कार्यकर्ताओं और कर्मचारियों को धक्का दिया गया। पार्टी ने यह भी दावा किया कि महिला सुरक्षा कर्मचारियों के साथ बदसलूकी हुई और उनके कपड़े तक फट गए। TMC ने इसे पुलिस की मनमानी और बर्बर कार्रवाई करार दिया है।

डेरेक ओ’ब्रायन, अभिषेक बनर्जी के खिलाफ केज दर्ज

इस मामले में TMC नेताओं डेरेक ओ’ब्रायन, अभिषेक बनर्जी और दूसरों के खिलाफ पुलिस पर कथित तौर पर रुकावट डालने और हमला करने के आरोप में FIR दर्ज की गई है। पुलिस ने बताया कि 9, कैमक स्ट्रीट, कोलकाता में एक गैर-कानूनी होर्डिंग हटाने के दौरान हुई कथित झड़प के सिलसिले में शेक्सपियर सरानी पुलिस स्टेशन में केस दर्ज किया गया है।

 

पुलिस टीम 27 अगस्त को कोलकाता म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (KMC) के अधिकारियों के साथ मौके पर गई थी, जब सिविक बॉडी ने होर्डिंग हटाने में पुलिस की मदद के लिए लिखकर रिक्वेस्ट की थी। पुलिस ने आरोप लगाया कि डेरेक ओ’ब्रायन, अभिषेक बनर्जी, हुमायूं कबीर, बैसनोर चट्टोपाध्याय और दूसरों ने अपने समर्थकों के साथ मिलकर गैर-कानूनी तरीके से जमावड़ा लगाया और पुलिसवालों और KMC अधिकारियों को उनके काम करने से रोका।