स्टेज पर महिलाएं और टारगेटेड वादे, UP में 'महिला शक्ति' पर सपा का फोकस क्यों?
UP के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी ने महिला मतदाताओं पर खास ध्यान देना शुरू कर दिया है। अखिलेश यादव ने सत्ता में वापसी के लिए कई रणनीतिक बदलाव भी किए हैं।

अखिलेश यादव और डिंपल यादव, Photo Credit: Samajwadi Party
समाजवादी पार्टी के दफ्तर में वह दोपहर सामान्य नहीं थी। आमतौर पर जिस मंच पर अखिलेश यादव के साथ कुछ पुरुष नेता बैठते हैं, वह मंच दो दर्जन से ज्यादा महिलाओं से भरा हुआ था और इकलौते अखिलेश यादव ही Odd One Out जैसे नजर आ रहे थे। यह वही समाजवादी पार्टी है जिसके संस्थापक मुलायम सिंह यादव के नाम पर यह दर्ज हो गया है कि उन्होंने संसद में महिला आरक्षण का विरोध किया था। वजह कुछ भी रही हो लेकिन इतिहास उन्हें इसी वजह से याद करता है। अब उन्हीं के बेटे अखिलेश यादव अपने PDA में A का मतलब आधी आबादी बता रहे हैं। जाहिर है इसके राजनीतिक मायने हैं, कुछ महत्वाकांक्षाएं हैं और दो चुनावों से अधूरी रह जाती एक कसक है। यही वजह है कि अखिलेश यादव ने महिलाओं को 40 हजार रुपये देने का एलान कर दिया है।
2012 में 29.15 प्रतिशत वोट लाकर सरकार बना लेने वाले समाजवादी पार्टी को 2022 में 32.76 प्रतिशत वोट मिले लेकिन वह सत्ता में नहीं आ पाई। कारण कई सारे थे और सपा उन कारणों को ढूंढकर दुरुस्त करने में लगी हुई है। 2022 के चुनाव नतीजों के बाद से ही यह देखने को मिला है कि उसने अपनी रणनीति में हैरान करने वाले बदलाव किए हैं। कभी सिर्फ यादव और मुस्लिम को वोट देने के लिए मशहूर रही समाजवादी पार्टी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में जातियों, वर्गों और अन्य समीकरणों का ऐसा गुलदस्ता बुना कि फूल तो अखिलेश यादव के हाथों में आए लेकिन कांटे बीजेपी को चुभ गए। अब अखिलेश यादव इसी कांटे को अंकुश बनाकर बीजेपी रूपी मदमस्त हाथी की रफ्तार थाम देना चाहते हैं। उनके इस अभियान में उनकी कोशिश यह है कि महिलाएं महावत भी भूमिका निभाएं। इसी क्रम में एक लाइन से कई एलान किए गए हैं।
क्या हैं समाजवादी पार्टी के वायदे?
PDA के अलग-अलग अक्षरों के मतलब अलग-अलग बताने वाले अखिलेश यादव ने इस बार A का मतलब आधी आबादी बताया है। वादा है कि यूपी में समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है तो हर गरीब, शोषित और वंचित महिला को हर साल 40000 रुपये दिए जाएंगे यानी हर महीने लगभग 3000 रुपये से भी ज्यादा। इसके अलावा, महिलाओं से लैपटॉप, साइकिल, मोबाइल, आवास और मुख्त कानूनी सहायता जैसे वादे भी किए गए हैं।
यह भी पढ़ें: तुलसीपुर में दो बार सपा को मात, जेबा रिजवान से मिलने पर मजबूर क्यों हुए अखिलेश?
अपनी इमेज बदलने में लगी सपा ने इस मैसेज को मजबूती से पहुंचाने के लिए पार्टी की महिला नेताओं को स्टेज पर जगह दी। अखिलेश यादव की पत्नी और सांसद डिंपल यादव, सांसद प्रिया सरोज, सांसद इकरा हसन और विधायक रागिनी सोनकर समेत पार्टी की तमाम वरिष्ठ महिलाएं मंच पर नजर आईं और इनमें से कुछ ने अपनी बातें भी रखीं।
बदलती जा रही सपा की रणनीति
दरअसल, समाजवादी पार्टी लंबे समय से महिला सुरक्षा और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों पर फंसती रही है। इसका फायदा BSP और बीजेपी दोनों ने उठाया है। मुलायम सिंह यादव के जमाने में महिला मतदाताओं के लिए सपा खास प्रयास भी करती नहीं दिखती है लेकिन 2022 के चुनाव में अपना हश्र देख चुके अखिलेश यादव को अब एक-एक वोट की अहमियत समझ आ गई है। यही वजह है कि वह PDA में A का मतलब आधी आबादी बताने से नहीं चूक रहे हैं। महिला आरक्षण के मुद्दे पर भी उनका कहना है कि जो बिल संसद में पास हो चुका है सरकार को उसी के हिसाब से महिला आरक्षण तुरंत लागू कर दिया है।
यह भी पढ़ें: महिलाओं को 40 हजार, लैपटॉप,स्कूल..., चुनाव से पहले क्या एलान कर गए अखिलेश यादव?
चर्चा है कि महिलाओं को रिझाने का यह दांव टिकट बंटवारे में भी जारी रह सकता है। 5 महिला लोकसभा सांसदों वाली समाजवादी पार्टी के पास कुल 15 महिला विधायक हैं। उम्मीद की जा रही है कि सपा इस बार टिकट बंटवारे में महिलाओं की संख्या बढ़ा सकती है ताकि इस संख्या को और आगे बढ़ाया जा सके।
https://twitter.com/samajwadiparty/status/2092609355107668257
दिल्ली में छात्रों के संसद मार्च के समय जिस तरह डिंपल यादव ने सड़क पर उतरकर लोगों की मदद की थी। उस घटना ने भी सपा के पक्ष में थोड़ी सहानुभूति जगाई है और अब सपा की कोशिश है कि इसे ठंडा ना पड़ने दिया जाए। इसीलिए डिंपल यादव के अलावा अन्य महिला नेत्रियों को भी आगे बढ़ाकर महिलाओं को साधने की कोशिश की जा रही है।
आंकड़ों में छिपी है वजह?
उत्तर प्रदेश में महिला वोटर लगभग 45 प्रतिशत हैं। बीते कई राज्यों के चुनावों में महिलाएं निर्णायक भी साबित हुई हैं इसलिए यूपी के चुनाव में भी हर पार्टी का जोर इन पर है। 2022 के चुनाव में बीजेपी ने 45 तो सपा ने 42 महिलाओं को चुनाव में उतारा था जबकि कांग्रेस ने कुल 155 महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया था। हालांकि, कांग्रेस का 'लड़की हूं, लड़ सकती हूं' का नारा औंधे मुंह गिरा और वह सिर्फ 2 सीटों पर रह गई। मुख्य लड़ाई तब बीजेपी के गठबंधन और सपा के गठबंधन के ही बीच रही। यही कारण रहा कि ज्यादा वोट प्रतिशत के बावजूद चुनाव हार गए।
यह भी पढ़ें: सपा का शहरी से ज्यादा फोकस ग्रामीण सीटों पर, अखिलेश क्या इशारा कर गए?
अब अगर पिछले 3 चुनावों के नतीजों को देखें तो समझ आता है कि अखिलेश यादव महिला वोटरों पर इतना जोर क्यों दे रहे हैं। 2012 में जब सपा ने अकेले अपने दम पर बहुमत हासिल किया था तो उसे 29.15 प्रतिशत वोट ही मिले थे। 2022 में उसे 32.76 प्रतिशत वोट मिले यानी लगभग 3 प्रतिशत ज्यादा वोट लाकर भी वह सत्ता तक नहीं पहुंच पाई। माना जाता है कि इस महिला वोटरों की अहम भूमिका रही। बीजेपी ने कानून व्यवस्था के नाम पर सपा को खूब घेरा और इसका असर नतीजों में भी दिखा।

वहीं, 2012 में सिर्फ 15 प्रतिशत वोट लाने वाली बीजेपी को 2017 में 40.54 और 2022 में 42.20 प्रतिशत वोट मिले। कांग्रेस और बसपा कमजोर होती गईं और इनका वोट बीजेपी ने हथिया लिया। 2024 के लोकसभा चुनाव में यह देखा गया कि अखिलेश यादव ने काफी हद तक दलितों का वोट भी बटोरा और अब उनकी नजर महिलाओं पर भी है।
समाजवादी पार्टी को लगता है कि अगर अपने पारंपरिक वोट के अलावा उसे महिलाओं, युवाओं और कुछ हद तक ब्राह्मणों का वोट ठीक-ठाक संख्या में मिल जाए तो उसका यही वोट प्रतिशत 3 से 5 प्रतिशत बढ़ जाएगा। दूसरी तरफ, एंटी इनकमबेंसी का असर दिखा तो बीजेपी के वोट प्रतिशत में कमी आएगी और सपा जीतने की स्थिति में आ सकती है। ऐसी स्थिति में महिलाएं निर्णायक हो सकती हैं क्योंकि महिलाओं के सपा के साथ आने का नतीजा यह होगा कि कम अंतर वाली सीटें वह नहीं हारेगी और कुछ ऐसी सीटों पर भी उसे जीत मिल सकेदी जो उसके लिए आसान नहीं मानी जाती हैं।
यह भी पढ़ें: 'ऐसा कुछ मत बोलना जिसका BJP फायदा उठा ले', अपने नेताओं को नसीहत देने लगे अखिलेश
अब देखना यह होगा कि अखिलेश यादव के इस एलान के जवाब में बीजेपी क्या करती है। साथ ही, यह भी रोचक होगा कि महिलाओं को किसके वादे पर ज्यादा भरोसा होगा। ऐसा कहने की वजह है कि पश्चिम बंगाल में महिला मुख्यमंत्री रहीं ममता बनर्जी ने महिलाओं के खाते में पैसे भेजने वाली योजना पहले से शुरू कर रखी थी लेकिन महिलाओं ने बीजेपी के पक्ष में वोट दिया और तृणमूल कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई।
और पढ़ें
Copyright ©️ TIF MULTIMEDIA PRIVATE LIMITED | All Rights Reserved | Developed By TIF Technologies
CONTACT US | PRIVACY POLICY | TERMS OF USE | EDITORIAL POLICY | Sitemap




