उत्तर प्रदेश संस्कृत बोर्ड की 12वीं परीक्षा में प्रदेश टॉप कर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से एक लाख रुपये की सम्मान राशि पाने वाले प्रतापगढ़ के रजनीश यादव की उपलब्धि अब विवादों में घिर गई है। जांच में उसके शैक्षिक अभिलेखों में कथित फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद पूर्व माध्यमिक और उत्तर माध्यमिक के अभिलेख निरस्त कर दिए गए हैं। अब सरकार टॉपर को दी गई एक लाख रुपये की सम्मान राशि समेत पुरस्कार वापस लेने की कार्रवाई करेगी।

 

प्रतापगढ़ के आसपुर देवसरा क्षेत्र के बैजलपुर निवासी रजनीश यादव ने राम टहल संस्कृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय यदुनाथपुर से पढ़ाई की थी। 24 अप्रैल को घोषित परिणाम में उसने 89.36 प्रतिशत अंक हासिल कर प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया था। इसके बाद उसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से सम्मानित किया गया। उसे एक लाख रुपये की सम्मान राशि के साथ टैबलेट, मेडल और प्रशस्तिपत्र भी दिया गया था।

 

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पड़ोसी की शिकायत के बाद खुला फर्जीवाड़ा

रजनीश की सफलता पर उसके पड़ोसी जगत प्रसाद ने उसके शैक्षिक अभिलेखों को लेकर शिकायत की। शिकायत में आरोप लगाया गया कि उसके पुराने दस्तावेजों में नाम और जन्मतिथि अलग दर्ज थी, जबकि बाद में इन्हें बदलकर नए अभिलेख तैयार कराए गए। आरोप है कि इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर संस्कृत विद्यालय में प्रवेश लेकर परीक्षा दी गई।

शिकायतकर्ता के मुताबिक पुराने शैक्षिक अभिलेखों, राशन कार्ड और मतदाता सूची में नाम अजय कुमार और जन्मतिथि 13 मई 1998 दर्ज थी। आरोप है कि बाद में आधार समेत अन्य दस्तावेजों में नाम बदलकर रजनीश यादव और जन्मतिथि 1 जुलाई 2010 दर्ज करा ली गई। इसी आधार पर संस्कृत विद्यालय में प्रवेश लेकर परीक्षा देने का आरोप लगाया गया है।

टॉपर के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज

मामले में शिकायत के आधार पर आसपुर देवसरा थाने में रजनीश यादव के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। उस पर धोखाधड़ी, कूटरचना और जालसाजी से संबंधित धाराओं में कार्रवाई की गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।जांच के बाद उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद के निदेशक प्रताप सिंह बघेल ने रजनीश के पूर्व माध्यमिक और उत्तर माध्यमिक के शैक्षिक अभिलेख निरस्त करने का आदेश दिया है। पुरस्कार वापस लेने और एक लाख रुपये की सम्मान निधि को राजस्व की भांति वसूलने के निर्देश दिए गए हैं।

 

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टैबलेट, मेडल और प्रशस्तिपत्र भी लौटाना होगा

सरकार की ओर से टॉपर को दिए गए एक लाख रुपये के अलावा टैबलेट, मेडल और प्रशस्तिपत्र भी वापस लेने की कार्रवाई की जा रही है। संबंधित अधिकारियों को सम्मान राशि की वसूली और पुरस्कार वापस लेने के लिए आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।किसान परिवार से आने वाले रजनीश की सफलता को मेहनत और संघर्ष की मिसाल बताया गया था। प्रदेश में पहला स्थान हासिल करने के बाद मुख्यमंत्री से सम्मान मिलने से उसकी उपलब्धि और चर्चा में आ गई थी। लेकिन अब शैक्षिक अभिलेखों में कथित फर्जीवाड़े के आरोप सामने आने के बाद उसकी टॉपर की उपलब्धि पर ही सवाल खड़े हो गए हैं।