उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग में कथित तौर पर वित्तीय अनियमितता की खबरें सामने आईं हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में बानगंगा बैराज की नहर प्रणाली और उससे निकलने वाली सभी नहरों में सिल्ट सफाई और ढलान घास कटाई का काम ड्रेनेज खंड सिद्धार्थनगर को सौंपा गया था। काम के नाम पर सिर्फ धोखा किया गया। जहां नहर सड़क को पार करती है, वहां मात्र 100 मीटर इधर-उधर ही सफाई कराई गई। बाकी लंबी-लंबी नहरें सिल्ट भरी हुई जैसी की तैसी छोड़ दी गईं। स्थानीय लोग और ठेकेदार संगठनों ने यह आरोप लगाया है। 

स्थानीय लोगों और ठेकेदारों का आरोप है कि ड्रेनेज खंड सिद्धार्थनगर के अधिशासी अभियंता, सहायक अधिशासी अभियंता और जूनियर इंजीनियरों ने सिल्ट सफाई के नाम पर सरकारी धन का भारी भ्रष्टाचार और बंदरबांट किया। सरकार की मंशा के उलट पैसे का दुरुपयोग किया गया। लोगों ने मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच हो और दोषी अधिकारियों के खिलाफ उचित विभागीय कार्रवाई की जाए।

यह भी पढ़ें: LUCC चिट फंड घोटाला: 800 करोड़ की ठगी वाले केस में CBI ने दो को किया गिरफ्तार

धांधली की बात कैसे सामने आई?

सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग ही नहर प्रणाली का काम देखता है। नहर विभाग में ठेकेदार और स्थानीय निवासी जयंत्री पांडेय ने 12 अप्रैल 2026 को जनसुनवाई (IGRS) पर शिकायत दर्ज कराई, जिसमें सहायक अभियंता चतुर्थ मालविका जैसल और अधिशासी अभियंता पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। 

आरोप है कि निविदा शर्तों का खुला उल्लंघन करते हुए बिना कोई वास्तविक काम किए सरकारी धन का गबन किया गया। ट्रेजरी से अवैध भुगतान, कार्यस्थल बदलना, हॉट मिक्स प्लांट और पेवर मशीन का इस्तेमाल न करना, और AI से फर्जी फोटो जेनरेट कर विभाग को गुमराह करना मुख्य आरोप हैं।

कागजों पर AI से काम दिखाया, जमीन पर बदहाल है हाल

शिकायतकर्ता जयंत्री पांडेय ने कई तकनीति बिंदुओं पर सिंचाई विभाग में धांधली के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि बाणगंगा नहर प्रणाली और जमींदारी नहर प्रणाली की पट्टियों पर सड़क की गड्ढामुक्ति और नवीनीकरण का काम कागजों पर दिखाया गया लेकिन जमीन पर कुछ नहीं हुआ। AI की मदद से बनाई गई तस्वीरों को असली कहकर पेश किया गया। 

यह भी पढ़ें: अशोक गहलोत की सरकार में मंत्री रहे महेश जोशी फिर गिरफ्तार, क्या है JJM घोटाला?

आरोपों का ब्यौरा क्या है?

बस्ती के अधीक्षण अभियंता, गंडक बाढ़ मंडल ने 11 सितंबर 2025 को जारी निविदा (नंबर-03/2025-26) जारी की। इसके तहत सिद्धार्थनगर जिले में नहरों और सड़कों की मरम्मत का काम 4.81 करोड़ रुपये की लागत से कराया जाना था। काम में अतरी माइनर, नौगढ़ माइनर, बानगंगा बैराज, अलीदापुर पश्चिमी नहर, बजहा सागर, बटुआ सागर समेत कई नहरों और नौगढ़ कालोनी के सर्विस रोड को गड्ढामुक्त करना था।

निर्माण स्थल की कुल  लंबाई 13.9 किलोमीटर थी। काम पूरा करने की समयसीमा सिर्फ एक महीने की रखी गई थी। निविदा में साफ शर्त थी कि काम हॉट मिक्स प्लांट और पेवर मशीन से ही होना चाहिए। ठेकेदार को प्लांट अपनी या लीज पर होने का शपथ-पत्र भी देना था।

अब किन आरोपों में घिरा है विभाग?

जयंत्री पांडेय, शिकायतकर्ता:-
सहायक अभियंता मालविका जैसल और अधिशासी अभियंता की मिलीभगत से बिना जमीन पर हुए किसी काम के ट्रेजरी से भुगतान पूरा कर लिया गया। वाउचर इसकी पुष्टि करते हैं कि धन उस काम के लिए निकाला गया जो जमीन पर हुआ ही नहीं। यह राजकीय धन का खुला गबन है। 

शिकायकर्ता जयंत्री पांडेय ने इस पूरे मामले में भारी अनियमितताओं का आरोप लगाया है। उन्होंने कई ऐसे सवाल उठाए हैं-

  • काम हुए बिना ही पूरा भुगतान: सहायक अभियंता मालविका जैसल और अधिशासी अभियंता की मिलीभगत से बिना किसी ठोस काम के ट्रेजरी से पूरा पैसा निकाल लिया गया। वाउचर दिखाते हैं कि पैसे तो निकल गए, लेकिन जमीन पर काम हुआ ही नहीं। यह खुला गबन है।
  • काम का स्थान बदल दिया: अधिशासी अभियंता के पत्रांक 1829 में निविदा में तय जगहों, अतरी माइनर, नौगढ़ माइनर, सिसवा नेउरा आदि पर काम नहीं कराया गया। अधिशासी अभियंता के एक पत्र में दूसरी जगहों का जिक्र किया गया, जिसका फायदा उठाकर असल काम स्थल पर कुछ नहीं किया गया।

  • फर्जी फोटो और AI का इस्तेमाल: काम न होने के बावजूद मालविका जैसल पर आरोप है कि उन्होंने AI टूल और मोबाइल एडिटिंग से फर्जी तस्वीरें बनाईं और विभाग को गुमराह किया। इन फर्जी तस्वीरों के आधार पर भुगतान को वैध ठहराने की कोशिश की गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि यह अनिश्चित है कि काम कहीं हुआ भी या सिर्फ कागजों पर घर की खेती कर सरकारी पैसा बांट लिया गया।

और क्या सवाल उठाए गए हैं?

शिकायतकर्ता जयंत्री पांडेय ने कहा है कि तकनीकी शर्तों का उल्लंघन किया गया है। निविदा शर्त 31 का खुला उल्लंघन किया गया है। बिना हॉट मिक्स प्लांट और पेवर मशीन के काम दिखाया गया। शर्त साफ थी कि काम इन्हीं मशीनों से होना है। बिना प्लांट के सड़क निर्माण तकनीकी रूप से मानकहीन है। 

जयंत्री पांडेय ने आरोप लगाया, 'शर्त 28 के तहत अनुबंध निरस्त होना चाहिए था, लेकिन अधिकारियों ने एस्टीमेट और NIT बदलकर उच्च अधिकारियों को बिना बताए काम कराया। कार्यस्थल हटने को शर्त 28 के तहत अनुबंध निरस्तीकरण और विभागीय कार्रवाई का आधार बताया गया। नोटिफिकेशन में प्रस्तावित नहर पट्टियों के बजाय बजट अपनी मर्जी से कहीं और खर्च करना तकनीकी अपराध है। बिना भौतिक मापन के पैसा बांट लिया गया।'



यह भी पढ़ें: 'जय भीम' कोचिंग के नाम पर AAP सरकार में हुआ घोटाला? 9 कोचिंग डायरेक्टर गए जेल

धांधली होने के तर्क क्या  हैं?

निविदा में जिन जगहों का जिक्र है, उनमें बटुआ सागर, बसंतपुर नहर, नौगढ़ कालोनी की पटरी, अलीदापुर पश्चिमी नहर, सिरवत कोठी, सिसवा नेउरा नहर, अतरी माइनर पर कोई निर्माण कार्य नहीं हुआ। जयंत्री पांडेय ने तस्वीरें भी साझा की हैं। बटुआ सागर में कच्चे रास्ते दिख रहे हैं, कोई मरम्मत नहीं दिख रहा है। बसंतपुर नहर पर पुरानी सड़क घास से भरी हुई है। अलीदापुर पश्चिमी नहर पर पुरानी टूटी सड़क दिख रही है। सिसवा नेउरा और अतरी माइनर पर भी कच्चे रास्ते या टूटी सड़कें हैं। फोटो में तारीखें अप्रैल 2026 की हैं, जो काम पूरा होने के बाद की स्थिति दर्शाती हैं। इन फोटो में GPS लोकेशन, एलिवेशन, समय आदि डिटेल्स मौजूद हैं। 

जहां सफाई का दावा किया गया, वहां घास उगी है।

कहां-कहां अनियमितता की गुहार लगाई गई है?

शिकायतकर्ता जयंत्री पांडेय ने केवल IGRS पर ही नहीं, मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश, जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और अन्य अधिकारियों को पंजीकृत डाक से शिकायतें भेजी हैं। 

अब क्या हैं मांगे? 

  • ट्रेजरी वाउचर की जांच कर अवैध भुगतान की रिकवरी
  • मालविका जैसल द्वारा भेजी फोटो की फोरेंसिक जांच
  • दोषी अधिकारियों पर तत्काल कठोर विभागीय और अनुशासनात्मक कार्रवाई

विभागीय दस्तावेजों में क्या खामी गिनाई गई है?

निविदा दस्तावेज में कई महत्वपूर्ण शर्तें हैं। ठेकेदार को कार्यस्थल की जानकारी पहले लेनी होती है। प्री-बिड मीटिंग 18 सितंबर 2025 को बस्ती में होनी थी। टेक्निकल बिड खुलने के 24 घंटे में आपत्ति ईमेल से दर्ज करानी होती है। बजट आवंटन पर ही फाइनेंशियल बिड खुलती है।

परफॉर्मेंस सिक्योरिटी के नियम, सबलेट न करने की शर्त, मात्रा बढ़ने-घटने पर क्लेम न मानने आदि नियम साफ हैं। फिर भी आरोप है कि अधिकारियों ने इनका उल्लंघन किया। बिना प्लांट के काम और AI फोटो से सबूत गढ़ना शर्त 31 का सीधा उल्लंघन है। 

क्यों गंभीर है यह मामला?

यह सिर्फ एक सड़क निर्माण का मामला नहीं है। नहर पट्टियों पर बनी सड़कें सिंचाई क्षेत्र में किसानों, आम लोगों की सुविधा के लिए होती हैं। 13.9 किमी सड़क का 4.81 करोड़ का काम अगर कागजों पर रह गया तो विकास योजनाओं का पैसा बर्बाद हो रहा है। AI का इस्तेमाल फर्जी सबूत बनाने में सरकारी विभाग में नई समस्या पैदा कर रहा है। फोरेंसिक जांच जरूरी है ताकि असली और नकली फोटो में फर्क साबित हो। शिकायतकर्ता ने सुनियोजित भ्रष्टाचार शब्द इस्तेमाल किया है। शिकायककर्ता का कहना है कि विभागीय मिलीभगत से ट्रेजरी भुगतान, कार्यस्थल बदले गए, शर्तों की अनदेखी की गई। ये सभी बिंदु ऐसे हैं, जिनकी विभागीय जांच होनी चाहिए।

यह भी पढ़ें: बच्चों की स्कॉलरशिप के 11 करोड़ खा गए अधिकारी, 5 राज्यों में घोटाला, जांच शुरू

किसे-किसे दी गई है शिकायत?

अधीक्षण अभियंता गंडक बाढ़ मंडल बस्ती, मुख्य अभियंता गोरखपुर, आयुक्त बस्ती, जिलाधिकारी, एसएसपी आदि को शिकायत भेजी गई है। अभी तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है, न ही जांच के आदेश दिए गए हैं। 

विभाग की कथित धांधली पर अधिकारी क्या कह रहे हैं?

अधिशासी अभियंता, ड्रेनेज खंड के आधिकारिक नंबर पर संपर्क करने की कोशिश की गई, कोई जवाब नहीं मिला। वॉट्सऐप पर मैसेज किया गया, उसका भी कोई जवाब नहीं दिया गया। खबरगांव ने चीफ इंजीनियर विकास सिंह, गंडक बैच से संपर्क किया, उनका भी जवाब नहीं मिला। असिस्टेंट कमिश्नर सुरेंद्र मोहन वर्मा ने भी कॉल और मैसेज का कोई जवाब नहीं दिया।