पंजाब के चर्चित अजनाला थाना हमले की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। भारत-नेपाल सीमा से वांछित आरोपी विक्रमजीत सिंह की गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा और बढ़ा दिया गया है। अब बहराइच पुलिस ने पीलीभीत से एक गुरुद्वारे के जत्थेदार को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है। सुरक्षा एजेंसियां प्रतिबंधित संगठन 'वारिस पंजाब दे' से जुड़े नेटवर्क, फर्जी दस्तावेजों और सीमा पार गतिविधियों की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं।
बहराइच के रुपईडीहा बॉर्डर पर एसएसबी और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में अजनाला थाना हमले का वांछित आरोपी विक्रमजीत सिंह पकड़ा गया था। जांच एजेंसियों के मुताबिक वह लंबे समय से नेपाल में फर्जी पहचान और दस्तावेजों के सहारे रह रहा था और भारत में प्रवेश की कोशिश कर रहा था। गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में कई नए नाम सामने आए हैं।
पीलीभीत से जत्थेदार हिरासत में
पूछताछ के दौरान सामने आए इनपुट के आधार पर पुलिस ने पीलीभीत से जोग सिंह नामक एक गुरुद्वारे के जत्थेदार को हिरासत में लिया है। उसे बहराइच लाकर सुरक्षा एजेंसियां लगातार पूछताछ कर रही हैं। जांच इस बात पर केंद्रित है कि आरोपी और जत्थेदार के बीच क्या संबंध थे और पूरे नेटवर्क में उसकी क्या भूमिका रही।
नेपाल कनेक्शन और फर्जी दस्तावेजों की जांच
जांच एजेंसियों का मानना है कि आरोपी नेपाल में फर्जी पहचान के सहारे रह रहा था। अब यह पता लगाया जा रहा है कि उसे फर्जी दस्तावेज किसने उपलब्ध कराए, सीमा पार आने-जाने में किसने मदद की और क्या इसके पीछे कोई संगठित मॉड्यूल सक्रिय था।
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विदेशी नागरिक भी पकड़ा गया
कार्रवाई के दौरान अमेरिकी नागरिक मनवीर सिंह ढिल्लो को भी बिना वैध वीजा के नेपाल के रास्ते भारत में प्रवेश करते हुए पकड़ा गया। हालांकि उसकी अमेरिकी नागरिक पत्नी और आठ माह के बच्चे के पास वैध यात्रा दस्तावेज मिलने पर इमीग्रेशन नियमों के तहत उन्हें भारत में प्रवेश की अनुमति दे दी गई।
सीमा पर बढ़ाई गई चौकसी
पुलिस अधीक्षक विश्वजीत श्रीवास्तव के अनुसार, एसएसबी, रुपईडीहा पुलिस, इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी), स्पेशल ब्रांच और इमीग्रेशन विभाग की संयुक्त टीम पूरे मामले की जांच कर रही है। भारत-नेपाल सीमा पर निगरानी, सत्यापन और तलाशी अभियान को और सख्त कर दिया गया है ताकि नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक भी पहुंचा जा सके।
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पूरे नेटवर्क का खुलासा करने में जुटीं एजेंसियां
सुरक्षा एजेंसियां अब केवल एक आरोपी की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि प्रतिबंधित संगठन से जुड़े लोगों का नेटवर्क कितना बड़ा है, नेपाल के रास्ते उनकी गतिविधियां कैसे संचालित हो रही थीं और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
