पंजाब के मानसा में इन दिनों परविंदर सिंह झोटा की हत्या को लेकर चल रहा इंसाफ मोर्चा चर्चा में है। परविंदर सिंह झोटा का परिवार शव का अंतिम संस्कार करने को तैयार नहीं है। इस प्रदर्शन में पूरे पंजाब से लोग शामिल हो रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी झोटा परिवार से मुलाकात करने मानसा आ चुके हैं। इस प्रदर्शन में दो नाम सबसे ज्यादा सुर्खियों में हैं और वे नाम हैं लक्खा सिधाना और भाना सिद्धू।

 

इन दोनों का पंजाब के युवाओं के बीच अच्छा प्रभाव है और सोशल मीडिया पर भी इनकी बड़ी फैन फॉलोइंग है। 13 अक्टूबर 2026 को मानसा में एंटी ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसके बाद उनके परिवार और समर्थकों ने इंसाफ की मांग को लेकर धरना शुरू कर दिया था । लक्खा सिधाना और भाना सिद्धू भी इस आंदोलन से जुड़ गए। दोनों ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया और लोगों को इसके साथ जुड़ने की अपील की। 13 अक्टूबर को मानसा बंद के दौरान दोनों ने प्रदर्शन मार्च की अगुवाई भी की और इस आंदोलन के प्रमुख चेहरे बन गए।

 

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कौन हैं लक्खा सिधाना?

लक्खा सिधाना का असली नाम लखबीर सिंह सिधाना है। वह पंजाब के बठिंडा जिले के सिधाना गांव के रहने वाले हैं। उनका शुरुआती जीवन कबड्डी और छात्र राजनीति से जुड़ा रहा। वह पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला से ग्रेजुएट हैं। हालांकि, उनका नाम एक समय पंजाब के गैंगस्टर के तौर पर भी सामने आया था। उनके खिलाफ हत्या, हत्या की कोशिश, लूट और आर्म्स एक्ट समेत कई मामले दर्ज होने की खबरें आई थीं। उन्हें 2004 में पहली बार जेल जाना पड़ा था। बाद में उन्होंने अपराध की दुनिया छोड़कर सामाजिक कामों की तरफ रुख करने का दावा किया। 

चुनाव लड चुके लक्खा सिधाना

उन्होंने गरीब परिवारों की लड़कियों की शादी करवाने और गांवों में सामाजिक काम करने शुरू किए। इसके बाद वह पंजाबी भाषा के मुद्दे पर भी सक्रिय हुए। 2017 में अंग्रेजी में लिखे साइन बोर्ड पर कालिख पोतने के मामले में उनका नाम चर्चा में आया। 2020-21 के किसान आंदोलन के दौरान वह और ज्यादा लोकप्रिय हुए।

 

26 जनवरी 2021 को दिल्ली में लाल किले पर हुई हिंसा के मामले में भी उन पर प्रदर्शनकारियों को भड़काने के आरोप लगे थे, हालांकि उन्होंने इन आरोपों से इनकार किया था। राजनीति में भी उन्होंने किस्मत आजमाई। 2012 में पीपुल्स पार्टी ऑफ पंजाब के टिकट पर रामपुरा फूल से चुनाव लड़ा, लेकिन जीत नहीं मिली। 2022 में मौर विधानसभा सीट से चुनाव लड़े और दूसरे स्थान पर रहे। 2024 में बठिंडा से लोकसभा चुनाव भी लड़ा और जनवरी 2026 में वह अकाली दल वारिस पंजाब दे में शामिल हो गए।

 

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कौन हैं भाना सिद्धू? 

भाना सिद्धू का असली नाम काका सिंह सिद्धू है। वह बरनाला जिले के कोटदुन्ना गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला से ग्रेजुएशन की है। उनके दादा करतार सिंह किसान नेता रहे हैं और भारतीय किसान यूनियन से जुड़े थे। भाना ने अपने करियर की शुरुआत कॉमेडी वीडियो बनाने से की थी। वह अपने भाई अमना सिद्धू और रिश्तेदार हरिंदर सिंह सिद्धू के साथ सोशल मीडिया पर वीडियो बनाते थे। धीरे-धीरे उनके वीडियो लोकप्रिय होने लगे और वह पंजाब के चर्चित सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर बन गए। इसके बाद उन्होंने पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री में भी काम किया। 

सिद्धऊ मूसेवाले के साथ किया काम

वह एमी विर्क की फिल्म 'सुफना' और सिद्धू मूसेवाला की फिल्म 'मूसा जट्ट' में नजर आए। उन्होंने सिद्धू मूसेवाला के गाने 'डॉक्टर' के म्यूजिक वीडियो में भी काम किया। हालांकि, उनकी पहचान सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं रही। उन्होंने किसान आंदोलन में हिस्सा लिया और पंजाब के युवाओं को विदेश भेजने के नाम पर ठगी करने वाले इमिग्रेशन एजेंटों के खिलाफ आवाज उठाई। उनके सोशल मीडिया वीडियो के जरिए कई मामले चर्चा में आए। जनवरी 2024 में एक महिला ट्रैवल एजेंट की शिकायत पर उन पर वसूली का मामला दर्ज हुआ और उन्हें गिरफ्तार किया गया। इसके बाद अन्य मामलों में भी पुलिस कार्रवाई हुई। भाना ने इन मामलों को लेकर पुलिस और सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए।

 

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कैसे बन गए आंदोलन का चेहरा?

भाना और लक्खा दोनों अब मानसा में जारी प्रदर्शन का प्रमुख चेहरा बनकर उभरे हैं। लक्खा सिधाना लंबे समय से मालवा क्षेत्र की राजनीति, किसान आंदोलन और पंजाबी भाषा से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं। वहीं, भाना सिद्धू सोशल मीडिया के जरिए खासकर युवाओं तक अपनी बात पहुंचाते हैं। दोनों पहले भी पंजाब बचाओ यात्रा और इमिग्रेशन ठगी जैसे मुद्दों पर साथ नजर आ चुके हैं। ऐसे में मानसा के इंसाफ मोर्चे में दोनों के शामिल होने से आंदोलन को स्थानीय धरने से बाहर भी पहचान मिली। 

 

27 अक्टूबर को पुलिस ने प्रदर्शन स्थल पर कार्रवाई करते हुए दोनों को हिरासत में लिया। इसके बाद 28 और 29 अक्टूबर को बड़ी संख्या में लोग मानसा पहुंचे। इस बीच पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव भी बढ़ा। 29 अक्टूबर को अकाली दल वारिस पंजाब दे के जत्थेदार बलजीत सिंह गज्जनमाजरा और कांग्रेस नेता परगट सिंह ने भी पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। अब इस आंदोलन में झोटा के परिवार को इंसाफ दिलाने के साथ-साथ पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही, दर्ज मामलों को रद्द करने और हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई जैसे मुद्दे भी शामिल हो गए हैं। सोशल मीडिया पर ज्यादा सक्रिय रहने वाले ये दोनों युवक अब पुलिस और प्रशासन के सामने खड़े हैं और आंदोलन की अहम कड़ी बन गए हैं।