प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने समाजवादी पार्टी के नेता मोहम्मद आजम खान के मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की जमीन और इमारत कुर्क कर ली है। यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत ED के लखनऊ जोनल ऑफिस ने की है। कुर्क संपत्ति की बही कीमत 426 करोड़ रुपये और मौजूदा बाजार कीमत करीब 1,170 करोड़ रुपये आंकी गई है। संपत्ति कुर्क करने का आदेश अस्थायी है।

ED के मुताबिक जौहर नगर के सिंहनखेड़ा गांव में विश्वविद्यालय का परिसर मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के पास है। इस ट्रस्ट की स्थापना आजम खान ने की थी और इसका नियंत्रण भी उन्हीं के पास है। वह विश्वविद्यालय के मानद कुलाधिपति भी हैं। मामला ट्रस्ट, आजम खान और अन्य के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की जांच से जुड़ा है। ED ने अगस्त में छापेमारी की थी और रामपुर जेल में बंद आजम खान से पूछताछ भी की थी।

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क्यों ईडी की रडार पर आया जौहर विश्वविद्यालय?

ANI की रिपोर्ट के मुताबिक ED ने यह जांच रामपुर के अजीमनगर थाने में दर्ज 26 FIR के आधार पर शुरू की थी। ये FIR भारतीय दंड संहिता की धारा 384 और अन्य धाराओं में दर्ज हैं। इनमें आरोप है कि विश्वविद्यालय के लिए किसानों की खेती की जमीन जबरन ले ली गई। रामपुर जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट के हवाले से ED ने कहा कि सिंहनखेड़ा गांव में करीब 34 एकड़ की शत्रु संपत्ति के 45 प्लॉट पर भी आजम खान ने विश्वविद्यालय के लिए अवैध कब्जा किया। यह कब्जा तब भी रहा, जब कस्टोडियन ने ट्रस्ट को दी गई इस जमीन की लीज रद्द कर दी थी। ED के मुताबिक गृह मंत्रालय के कस्टोडियन ऑफ एनिमी प्रॉपर्टी ने जिला प्रशासन के जरिए इस जमीन का कब्जा वापस ले लिया है।

 

ED ने बताया कि जांच में पता चला कि जनता के कामों का पैसा विश्वविद्यालय में लगाया गया। सरकारी काम विश्वविद्यालय के निजी परिसर में कराए गए। सरकारी ठेके पाने वाले ठेकेदारों का पैसा दान के रूप में ट्रस्ट तक पहुंचाया गया। ED ने यह जानकारी PMLA की धारा 66(2) के तहत उत्तर प्रदेश पुलिस से साझा की। इसके आधार पर 13 अक्टूबर 2026 को अजीमनगर थाने में FIR संख्या 0224/2026 दर्ज हुई। यह FIR आजम खान, ट्रस्ट और अन्य के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 61, 316(5) और 318(4) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 और 13 में दर्ज की गई है।

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आजम खान पर क्या-क्या आरोप लगे हैं?

ED ने रामपुर पुलिस की 28 और FIR की जांच भी अपने हाथ में ली है। इनमें से ज्यादातर में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। इन FIR और चार्जशीट में आरोप है कि 2016 में रामपुर शहर के कई परिवारों के घर बुलडोजर से गिराए गए। इनमें कई वक्फ संपत्ति के किरायेदार थे। आरोप है कि यह काम तत्कालीन सर्कल ऑफिसर और अन्य की अगुवाई वाली भीड़ ने आजम खान के निर्देश पर किया। 

ED के मुताबिक लोगों से मारपीट की गई, झूठे केस में फंसाने की धमकी दी गई और उनके नकदी, गहने और मवेशी लूट लिए गए। आरोप है कि मलबा विश्वविद्यालय ले जाया गया। यह भी आरोप है कि रामपुर नगर पालिका के लिए खरीदी गई सफाई मशीनें विश्वविद्यालय परिसर में पहुंचा दी गईं।

विश्वविद्यालय बनवाने में धांधली के आरोप

ED ने कहा कि जांच में सामने आया कि रामपुर के ज्यादातर ठेकेदारों ने सरकारी ठेकों का पैसा और निर्माण सामग्री विश्वविद्यालय के निर्माण में लगा दी। करीब 186 करोड़ रुपये के PWD ठेके पाने वाली एक कंपनी के प्रबंध निदेशक ने माना कि ठेके की रकम का 30 से 40 फीसदी हिस्सा विश्वविद्यालय के लिए निर्माण सामग्री खरीदने में लगा। एक और फर्म के साझेदारों ने माना कि वे आजम खान के प्रभाव में काम करते थे। उस फर्म ने ट्रस्ट को 40 लाख रुपये दान दिए। इनकम टैक्स विभाग ने भी इसी तरह की जांच के बाद ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया है।

ED के मुताबिक MLA और MLC क्षेत्र विकास निधि से 6.60 करोड़ रुपये के काम विश्वविद्यालय के निजी परिसर में कराए गए। ये काम उत्तर प्रदेश जल निगम ने किए, जिसके तब आजम खान अध्यक्ष थे। ट्रस्ट को मेरठ की दो शिक्षण संस्थाओं से राजनीतिक प्रभाव के जरिए 6.24 करोड़ रुपये का दान भी मिला। उत्तर प्रदेश सरकार ने परिसर में पंडाल, OBC छात्रावास और अस्पताल ब्लॉक के निर्माण के लिए 23.41 करोड़ रुपये मंजूर किए थे।

ED के मुताबिक 2015 के सरकारी आदेश में पंडाल के लिए 12.16 करोड़ रुपये मंजूर हुए थे। उसमें शर्त थी कि पंडाल का स्वामित्व उत्तर प्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग के पास रहेगा। उसे बेचा या ट्रांसफर नहीं किया जा सकेगा और राज्य सरकार इसे मुफ्त इस्तेमाल कर सकेगी। ED का कहना है कि 2016 के एक आदेश से ये शर्तें बदल दी गईं। पंडाल का स्वामित्व जौहर विश्वविद्यालय को दे दिया गया और सरकारी इस्तेमाल की शर्त हटा दी गई। ED ने कहा कि इस तरह सरकारी पैसे से बनी संपत्ति विश्वविद्यालय की निजी संपत्ति बन गई। ED के मुताबिक 2015 और 2016 में आजम खान प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री थे और उनके पास नगर विकास विभाग था। जल निगम इसी विभाग के तहत काम करता था।

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कैसे तय हुई 426.46 करोड़ रुपये की रकम?

ED के मुताबिक जिला मूल्यांकन अधिकारी ने 10 नवंबर 2023 की रिपोर्ट में परिसर की 59 इमारतों की निर्माण लागत 494.46 करोड़ रुपये आंकी। 114 सेल डीड से ली गई जमीन की कीमत 4.63 करोड़ रुपये आंकी गई। इस तरह परिसर की कुल लागत 499.09 करोड़ रुपये बैठती है। इसकी तुलना में ट्रस्ट ने अपने आयकर रिटर्न में सिर्फ 78.32 करोड़ रुपये का पूंजीगत खर्च दिखाया। ED ने कहा कि इसमें 12.29 करोड़ रुपये के दान असली नहीं पाए गए। इससे ट्रस्ट का असली खर्च सिर्फ 66.03 करोड़ रुपये रह जाता है।

ED के मुताबिक कुल मिलाकर परिसर की लागत में से सिर्फ 72.63 करोड़ रुपये का स्रोत वैध साबित होता है। बाकी 426.46 करोड़ रुपये इस मामले में अपराध की आय हैं, जो गलत तरीकों से बनाई गई। ट्रस्ट के पदाधिकारी इस रकम का स्रोत नहीं बता सके। इसलिए ED ने विश्वविद्यालय की जमीन और इमारतों को 426.46 करोड़ रुपये की सीमा तक अस्थायी रूप से कुर्क किया है। इनकी मौजूदा बाजार कीमत करीब 1,170 करोड़ रुपये है। इससे पहले ED ने 19 अगस्त को विश्वविद्यालय और उससे जुड़े ठिकानों पर तलाशी ली थी। इसमें इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए गए थे।