घिबली स्टाइल से लेकर 90s ईयरबुक, एक्शन फिगर और अब 80s के रेट्रो लुक तक AI की मदद से फोटो बदलने का ट्रेंड सोशल मीडिया पर लगातार नए अंदाज में देखने को मिल रहा है। लोग अपनी सामान्य तस्वीरों को किसी खास दौर, कला या किरदार के अंदाज में बदलकर सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं। अब सवाल यह है कि इन तस्वीरों से यूजर्स को मनोरंजन और वायरल होने के अलावा AI कंपनियों को आखिर क्या फायदा हो रहा है?
इंटरनेट की दुनिया का एक पुराना नियम आज भी लागू है, अगर आप किसी डिजिटल सेवा के लिए पैसे नहीं दे रहे हैं तो कहीं न कहीं आप ही उस सेवा का प्रोडक्ट हैं। जब आप घिबली या 80s रेट्रो जैसी तस्वीरें बनाने के लिए अपनी कई फोटो किसी चैटबॉट या ऐप पर अपलोड करते हैं तो उस मुफ्त सेवा के बदले कंपनियां आपके चेहरे से जुड़ा डेटा हासिल करती हैं और अपने सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए भी उसका इस्तेमाल कर सकती हैं।
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AI इमेज जनरेटर का ट्रेंड कब से चलन में आया?
AI इमेज ट्रेंड्स की शुरुआत Lensa Magic Avatars से मानी जाती है, जो 2022 के अंत में वायरल हुआ। इसके बाद 2023 में 80s/90s AI ईयरबुक और PS1/रेट्रो 3D गेमिंग ट्रेंड लोकप्रिय हुए। इनमें तस्वीरों को पुराने अमेरिकी ईयरबुक और 90s PlayStation गेम्स जैसा लुक दिया जाता था। 2024 में क्लेमेशन और Hug My Younger Self ट्रेंड ने लोगों का ध्यान खींचा। इनमें तस्वीरों और वीडियो को क्ले एनीमेशन जैसा लुक देने या वर्तमान और बचपन की तस्वीरों को मिलाकर गले लगाते हुए दृश्य बनाने का चलन रहा।
2025 की शुरुआत में Studio Ghibli Aesthetic ट्रेंड तेजी से वायरल हुआ। इसमें सामान्य तस्वीरों को सॉफ्ट वॉटरकलर और एनीमेशन जैसा लुक दिया गया। इसके बाद 2025 के मध्य में Nano Banana 3D Figurines ट्रेंड लोकप्रिय हुआ, जिसमें सेल्फी को विंटेज टॉय या 3D एक्शन फिगर की पैकेजिंग जैसा बनाया जाने लगा।
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हर ट्रेंड में दिखता है एक जैसा पैटर्न
करीब से देखें तो एक पैटर्न नजर आता है। लगभग हर बड़े वायरल AI ट्रेंड से पहले किसी न किसी AI ऐप या चैटबॉट में कोई नया फीचर या बड़ा अपडेट आया है। घिबली ट्रेंड शुरू होने से पहले 25 मार्च 2025 को GPT-4o में इमेज जनरेशन फीचर आया था। इसी तरह, मई 2026 में वर्कप्लेस कैरिकेचर ट्रेंड से ठीक पहले ChatGPT Images 2.0 का अपग्रेड हुआ। वहीं, 80s ट्रेंड की नई लहर के दौरान 8 सितंबर 2026 को ChatGPT Images 2.5 लॉन्च हुआ।
ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि ये चीजें सिर्फ इत्तेफाक नहीं हैं। गूगल भी इस दौड़ में पीछे नहीं रहा। अगस्त 2024 में विंटेज और यंगर-सेल्फ ट्रेंड के दौरान गूगल ने Imagen 3 पेश किया था। इससे AI से बनाई गई तस्वीरों में रियलिस्टिक लुक और तस्वीरों में टेक्स्ट दिखाने की क्षमता बेहतर हुई। इसके बाद 2025 में घिबली और 3D ट्रेंड के दौरान Gemini 2.5 Flash Image और 3 Pro Image जैसे मॉडल आए, जिनसे चेहरे को एक जैसा बनाए रखने और किसी तस्वीर को दूसरे आर्ट स्टाइल में बदलने की क्षमता और बेहतर हुई।
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फोटो अपलोड करने में कितना है प्राइवेसी का खतरा?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ी चिंता डेटा प्राइवेसी को लेकर है। जब आप अपनी साफ और अलग-अलग एंगल से खींची गई तस्वीरें किसी ऐप पर अपलोड करते हैं तो उसके नियम और शर्तों के तहत कंपनी को इन तस्वीरों के इस्तेमाल का अधिकार मिल सकता है। कंपनियां इन तस्वीरों का इस्तेमाल अपने भविष्य के AI मॉडल को बेहतर बनाने और चेहरे से जुड़े डेटा का विश्लेषण करने में कर सकती हैं। अगर किसी थर्ड-पार्टी ऐप का सर्वर सुरक्षित नहीं है तो आपकी हाई-रिजॉल्यूशन तस्वीरों के गलत इस्तेमाल का खतरा भी बढ़ जाता है। इन तस्वीरों से डीपफेक बनाए जा सकते हैं और आपका बायोमेट्रिक डेटा लीक होने का भी खतरा रहता है।
