उच्च शिक्षा की बढ़ती लागत के कारण आज बड़ी संख्या में छात्र एजुकेशन लोन का सहारा ले रहे हैं। लोन के लिए आवेदन करते समय सबसे बड़ा सवाल यह होता है कि क्या इसके लिए कोलैटरल यानी किसी संपत्ति को गिरवी रखना जरूरी है या नहीं। एजुकेशन लोन में गिरवी रखने की जरूरत हर मामले में नहीं होती है। यह मुख्य रूप से लोन की राशि, बैंक की नीति, छात्र के चुने गए संस्थान और कोर्स पर निर्भर करता है।

 

कई मामलों में बैंक बिना किसी संपत्ति के भी एजुकेशन लोन उपलब्ध कराते हैं। ज्यादा राशि के लोन के लिए अतिरिक्त सुरक्षा मांगी जा सकती है। ऐसे में यदि आप भी देश या विदेश में पढ़ाई के लिए एजुकेशन लोन लेने की योजना बना रहे हैं तो पहले यह समझ लेना जरूरी है कि किन परिस्थितियों में बैंक बिना कोलैटरल लोन देते हैं और किन मामलों में संपत्ति या अन्य वित्तीय सुरक्षा देना अनिवार्य हो सकता है।

 

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कब बैंक बिना कोलैटरल एजुकेशन लोन देते हैं?

बैंक कुछ परिस्थितियों में छात्रों को बिना संपत्ति गिरवी रखे बिना भी एजुकेशन लोन देते करते हैं। बिना कोलैटरल एजुकेशन लोन का अंतिम निर्णय संबंधित बैंक की नीति, लोन राशि, छात्र की प्रोफाइल और सह-आवेदक की वित्तीय क्षमता के आधार पर लिया जाता है। बैंक बिना कोलैटरल एजुकेशन लोन इन परिस्थितियों में दे सकता है।

  • यदि लोन की राशि बैंक द्वारा तय सीमा में ही है तो कई बैंक बिना कोलैटरल लोन दे सकते हैं।
  • छात्र का दाखिला किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय, कॉलेज या प्रोफेशनल संस्थान में होना चाहिए।
  • छात्र का शैक्षणिक रिकॉर्ड अच्छा होने पर लोन मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
  • माता-पिता या अभिभावक की नियमित आय और अच्छी क्रेडिट हिस्ट्री होने पर बैंक बिना कोलैटरल लोन देने पर विचार कर सकते हैं।
  • कई बैंक और सरकारी योजनाएं तय शर्तों के तहत बिना किसी संपत्ति के एजुकेशन लोन की सुविधा देती हैं।
  • मेडिकल, इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट या अन्य प्रोफेशनल कोर्स में दाखिला होने पर भी बिना कोलैटरल लोन मिलने की संभावना अधिक रहती है।

एजुकेशन लोन के लिए कोलैटरल कब जरूरी होता है?

हर एजुकेशन लोन के लिए कोलैटरल जरूरी नहीं होता, लेकिन कुछ परिस्थितियों में बैंक अतिरिक्त सुरक्षा के रूप में इसकी मांग कर सकते हैं। आमतौर पर निम्न स्थितियों में कोलैटरल की आवश्यकता पड़ सकती है जैसे-

  • जब लोन की राशि अधिक हो क्योंकि बड़े लोन में बैंक का जोखिम भी बढ़ जाता है।
  • विदेश में पढ़ाई के लिए उच्च राशि का लोन लेने पर कई बैंक कोलैटरल मांगते हैं।
  • यदि छात्र या सह-आवेदक की वित्तीय स्थिति या क्रेडिट प्रोफाइल कमजोर हो तो बैंक अतिरिक्त सुरक्षा मांग सकता है।
  • यदि चुना गया कोर्स या संस्थान बैंक की जोखिम श्रेणी में आता हो तो भी कोलैटरल की आवश्यकता हो सकती है।
  • बैंक की आंतरिक क्रेडिट नीति के अनुसार भी संपत्ति या अन्य वित्तीय सुरक्षा देना अनिवार्य किया जा सकता है

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कोलैटरल के रूप में क्या दिया जा सकता है?

जरूरत पड़ने पर बैंक या वित्तीय संस्थान कुछ संपत्तियों को कोलैटरल के रूप में स्वीकार कर सकते हैं-

  • घर, फ्लैट या आवासीय संपत्ति
  • कृषि या गैर-कृषि भूमि 
  • फिक्स्ड डिपॉजिट (FD)
  • बैंक द्वारा स्वीकार किए जाने वाले सरकारी बचत प्रमाणपत्र या अन्य निवेश
  • जीवन बीमा पॉलिसी का सरेंडर वैल्यू 
  • बैंक द्वारा अनुमोदित अन्य वित्तीय संपत्तियां

कौन-सी संपत्ति को कोलैटरल के रूप में स्वीकार किया जाएगा, यह संबंधित बैंक की नीति और लोन की शर्तों पर निर्भर करता है। आवेदन से पहले बैंक से इसकी जानकारी जरूर प्राप्त करें।