राजस्थान के अलवर जिले के जोधवास गांव में एक सरकारी स्कूल में गुरुवार को सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक वहां के बच्चों और गांव के लोगों ने स्कूल के मुख्य गेट पर ताला लगाकर जोरदार धरना दिया। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यह गुस्सा बुधवार को हुई एक घटना के बाद भड़का जब स्कूल की एक बिल्डिंग की छत का एक हिस्सा अचानक नीचे गिर गया। गुस्साए लोगों ने बताया कि स्कूल में सीनियर टीचर के जितने भी पद हैं उनमें से ज्यादातर खाली पड़े हैं। स्कूल की दो बिल्डिंगों को पहले ही खतरनाक घोषित किया जा चुका है लेकिन आज तक उन्हें गिराया नहीं गया है। बारिश के मौसम में इन कमरों की छतों से लगातार पानी टपकता है जिससे बच्चों की सुरक्षा पर हमेशा खतरा बना रहता है।

 

स्कूल की हालत बहुत खराब है। यहां पूरे 174 बच्चे पढ़ते हैं और उनके बैठने के लिए सिर्फ 3 ही कमरे हैं। गांव के लोगों ने यह भी शिकायत की कि इस स्कूल को बड़ी क्लास के लिए बदले हुए पूरे चार साल बीत चुके हैं लेकिन इसके बाद भी आज तक वहां पढ़ाने के लिए बड़े टीचरों के पद नहीं बनाए गए हैं। स्कूल में टीचरों की बहुत कमी है।

 

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अधिकारियों से बातचीत

इस हंगामे की खबर मिलते ही शिक्षा विभाग के कई बड़े अधिकारी मौके पर पहुंचे। इनमें गौरव अदानिया और शकुंतला यादव सबसे पहले पहुंचे और उन्होंने लोगों को समझाने की कोशिश की। उनके बाद महेश गुप्ता और गजराज भी वहां आए और उन्होंने प्रदर्शन कर रहे लोगों के साथ लंबी बात की। शिक्षा अधिकारी महेश गुप्ता ने बताया कि स्कूल में टीचरों की कमी को ठीक करने के लिए फिलहाल 7 टीचर्स को थोड़े समय के लिए वहां लगा दिया गया है। 

 

 

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उन्होंने यह भी बताया कि स्कूल की टूटी-फूटी बिल्डिंग को ठीक करने के लिए एक रिपोर्ट आगे बड़े अधिकारियों के पास भेज दी गई है। छात्र और गांव के लोग अपनी जिद पर अड़े हैं। वे चाहते हैं कि इन पुरानी और खतरनाक बिल्डिंगों को तुरंत गिराया या ठीक किया जाए और स्कूल में जितने भी टीचरों के पद खाली हैं उन्हें जल्दी से जल्दी भरा जाए।