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99% रेवेन्यू ही फर्जी दिखा दिया! SEBI के निशाने पर क्यों आई राजेश एक्सपोर्ट्स?

गोल्ड माइनिंग की चर्चित कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड विवादों में आ गई है। SEBI ने उसका 99 प्रतिशत रेवेन्यू फर्जी होने के आरोप लगाए हैं।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit: ChatGPT

राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड नाम की एक कंपनी अब सिक्योरिटीज ऐंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) के निशाने पर आ गई है। SEBI ने कुछ गड़बड़ियां पाई हैं और कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर राजेश मेहता की शेयर मार्केट की गतिविधियों पर रोक लगा दी है। SEBI का आरोप है कि राजेश एक्सपोर्ट्स ने अपना रेवेन्यू बढ़ाकर 15.15 लाख करोड़ रुपये का दिखा दिया जो कि गलत है। SEBI ने यह भी कहा है कि इस केस की जांच में कंपनी की ओर से सहयोग भी नहीं किया जा रहा है। इस कार्रवाई के बाद राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयर के दाम तेजी से गिरने लगे हैं।

 

SEBI ने पाया है कि साल 2020-21 से साल 2024-25 तक के बीच में  REL ने जो अपना कुल रेवेन्यू 15.15 लाख करोड़ रुपये का दिखाया है, वह सही नहीं है। यह कंपनी के कुल रेवेन्यू के लगभग 99 प्रतिशत के बराबर है। यानी जितना रेवेन्यू कुल दिखाया गया उसमें से 99 प्रतिशत के फर्जी होने के आरोप हैं। आरोप है कि राजेश एक्सपोर्ट्स ने कई फर्जी लेन-देन दिखाए, कंपनी के प्रमोटर्स ने निजी फंड की कॉरपोरेट राउटिंग की और इस सबकी जानकारी अपने निवेशकों को ही नहीं दी।

 

SEBI की जांच में सामने आया है कि राजेश एक्सपोर्ट्स का लगभग 97 से 99 प्रतिशत रेवेन्यू उसकी सब्सिडरी कंपनी Valcambi SA से आया। हालांकि, जब Vancambi के रिकॉर्ड देखे गए तो पता चला कि उसका रेवेन्यू तो इतना है ही नहीं।

 

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क्या है राजेश एक्सपोर्ट का पूरा मामला?

SEBI ने 109 पन्नों के अपने आदेश में लिखा है कि 1 अप्रैल 2020 से 31 मार्च 2024 के बीच के समय की जांच की गई है। इन गड़बड़ियों की शिकायत SEBI को 11 मार्च 2024 को एक ईमेल के जरिए मिली जिसमें राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड के एक शेयरहोल्ड ने आशंका जताई कि कंपनी के हिसाब-किताब में गड़बड़ी लग रही है।

 

इसी शिकायत के आधार पर  SEBI ने एक शुरुआती जांच की और फिर 23 अक्तूबर 2024 को एक जांच प्राधिकरण बनाया गया ताकि इसे अच्छे से जांच की जा सके। SEBI का कहना है कि जांच के दौरान राजेश एक्सपोर्ट्स को कई सारे समन भी भेजे गए ताकि कंपनी अपना पक्ष रख। इन समन और नोटिस के जो जवाब दिए गए वे अधूरे थे। इतना ही नहीं, जिन लोगों को नोटिस दिए गए उन्होंने फॉरेंसिक ऑडिटर का सहयोग नहीं किया। 

क्या-क्या गड़बड़ियां मिलीं?

SEBI का कहना है कि कंपनी के सहयोग न करने के चलते जो फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट (FAR) तैयार की गई है उसकी कुछ सीमाएं हैं। यह भी आरोप है कि राजेश एक्सपोर्ट्स ने अपने एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग (ERP) सिस्टम्स और अकाउंट बुक्स का पूरा ऐक्सस नहीं दिया। अपनी विदेशी सब्सिडरी कंपनियों के बारे में भी राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (REL) ने पर्याप्त जानकारी नहीं दी, ऐसे में फॉरेंसिक ऑडिटर की पूरी समीक्षा सिर्फ वित्तीय लेन-देन और शुरुआती दस्तावेजों तक ही सीमित है।

 

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SEBI के मुताबिक, जो लेजर्स दिए गए उनमें भी आंशिक नैरेशन ही मौजूद थे। 7021.36 करोड़ रुपये के लेन-देन का सैंपल जांच के लिए लिया गया लेकिन REL ने सिर्फ 2.03 प्रतिशत के ही कागज सौंपे जो कि बहुत कम है।

 

SEBI की ओर से जारी आदेश में यह भी कहा गया है कि शुरुआती जांच में ऐसा लगता है कि बहुत सारे पैसे राजेश मेहता और सिद्धार्ध मेहता के निजी बैंक खातों के जरिए भेजे गए। ना तो इस लेन-देन की अनुमति ली गई, ना इसकी जानकारी सार्वजनिक की गई और ना ही इसका कोई स्पष्टीकरण दिया गया।

 

SEBI ने यह भी पाया है कि अफ्रीका में एक सोने की खदान में निवेश का दावा किया गया जो कि फर्जी है क्योंकि इसका कोई वित्तीय रिकॉर्ड ही मौजूद नहीं है। 

क्या काम करती है राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड?

देश की चर्चित गोल्ड रिफाइनरी कंपनियों में से राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड बेंगलुरु के एक पते पर रजिस्टर्डर है। यह कंपनी मुख्य रूप से खदान से निकले सोने की रिफाइनिंग करती है। यानी मिट्टी वाले अयस्क को साफ-सुथरा करके उसमें से सोना निकालती है और सोने के प्रोडक्ट तैयार करती है। इस कंपनी के प्रोडक्ट भारत समेत दुनिया के कई देशों में बेचे जाते हैं। भारत में यह कंपनी 'शुभ ज्वेलर्स' के नाम से अपने प्रोडक्ट बेचती है।

 

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SEBI के मुताबिक, 3 जून 2023 तक यह एक मिड कैप कंपनी थी और इसके पास कुल 3210 करोड़ का मार्केट कैपिटल था। 3 जून को कंपनी के एक शेयर की कीमत 108.70 रुपये थी लेकिन 4 जून को सुबह 11 बजे कंपनी के शेयर का दाम लगभग 5 प्रतिशत गिरकर 103.92 रुपये पर आ गए थे। माना जा रहा है कि इस गिरावट की बड़ी वजह SEBI का यह फैसला ही है।

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