Nepal Floods: कब, कहां और कैसे आई नेपाल में विनाशकारी बाढ़? भारत में कहां खतरा?
नेपाल में जल प्रलय का ऐसा संकट कभी नहीं देखा था। 133 से ज्यादा भारतीय लापता हैं, 100 से ज्यादा लोग मर चुके हैं। पढ़े हादसे से जुड़े हर सवाल का जवाब।

नेपाल के बेनीघाट इलाके में आई बाढ़ के बाद का नजारा। Photo Credit: PTI
नेपाल की भोटोकोशी नदी में आई अचानक बाढ़, देश की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक है। बाढ़ का विस्तार का अंदाजा आप इस बात से लगाइए कि उत्तर प्रदेश के महाराजगंज और कुशी नगर और बिहार में गंडक नदी के किनारे बसे 7 जिलों में प्रशासन की नींद उड़ी है। तबाही का असर सिर्फ नेपाल नहीं, भारत पर भी पड़ना तय है।
नेपाल के रसुवा जिले में सुबह 8.30 तक सब ठीक था। किसी को अंदेशा नहीं था कि जल प्रलय की स्थिति पैदा होने वाली और कुछ भी नहीं बचने वाला है। राजधानी काठमंडू से ठीक उत्तर में बसा यह शहर बागमती इसकी उत्तरी सीमा तिब्बत से लगती है। यहां का रसुवागढ़ी सीमा, नेपाल और चीन को जोड़ता है।
हादसा कब और कैसे हुआ?
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने बताया कि अचानक 8.40 पर रसुवा के पास भोटेकोशी नदी में भीषण जलसैलाब आया। शुरुआती जानकारी में बताया जा रहा है कि पहले 8.37 पर भूकंप आया। भूकंप के साथ आए हिमस्खलन ने तबाही मचाई। भोटेकोशी में आई बाढ़ की वजह से सबसे पहले रसुवा और नुवाकोट जिलों में असर दिखा। नेपाल के तिमुरे, स्याफरुबेसी, बेत्रावती, त्रिशूली बत्तर और देवीघाट जैसे इलाकों में नदी की राह में जो पड़ा, तबाह होता चला गया।
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नेपाल सरकार के मुताबिक भूकंप की वहज से हिमस्खलन हुआ फिर पिघली बर्फ भोटे कोशी नदी में बह गई, जिससे अचानक बाढ़ आ गई। ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि तिब्बत में तीन लोगों की मौत हुई है और 265 लापता हैं। नेपाल में 579 पर्यटकों का पता लगाने का काम चल रहा है। इनमें 466 विदेशी हैं, जो 28 देशों से आए थे।
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लापता पर्यटकों में अमेरिकी, ब्रिटिश, मलेशियाई, दक्षिण अफ्रीकी और भारतीय भी शामिल हैं। एक टूर कंपनी अल्पाईन इको ट्रेक ने बताया कि उनके 12 ब्रिटिश पर्यटक, 2 आयरिश और चार दक्षिण अफ्रीकी पर्यटक लापता हैं। ब्रिटिश पर्यटकों की उम्र 13 से 65 साल तक है।
नेपाल ने हादसे में क्या गंवाया है?
भोटेकोशी नदी के किनारे कई गांव बह गए। सड़कें, संचार और बिजली सेवाएं ठप हो गई हैं। काठमांडू जाने वाली मुख्य सड़क बंद है। वीडियो में पुल बहते नजर आ रहे हैं। इमारतें तबाह हो चुकी हैं। तिमुरे, स्याब्रुबेसी और बेतरावती में भारी नुकसान की आशंका है। त्रिशूली जलविद्युत परियोजना को भी नुकसान पहुंचा है। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने आपात बैठक बुलाई और राहत कार्य शुरू करने के आदेश दिए।
काठमांडू पोस्ट में बताया गया है कि रसुवागढ़ी मैत्री पुल खत्म हो चुका है। सीमा चौकियों और जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचा है। यह 2015 के भूकंपों के बाद क्षेत्र की सबसे भीषण आपदाओं में से एक मानी जा रही है। भूकंप मापने वाली एक अमेरिकी एजेंसी का दावा है कि सुबह 8:37 बजे तिब्बत में 4.4 तीव्रता का भूकंप आया था, महज 3 मिनट बाद बाढ़ की त्रासदी नजर आने लगी।
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प्लैनेट लैब्स की सैटेलाइट इमेज के विश्लेषण से बता चला है कि रसुवागढ़ी से करीब 20 किमी उत्तर-पूर्व में हिमस्खलन हुआ, जिसका मलबा, लेंडे नदी में गिरा और तिमुरे होते हुए त्रिशुली तक पहुंचा। कुछ विशेषज्ञ इसे ग्लेशियल टूटने की वजह से हुआ हादसा बता रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि तिब्बत के पास डैम टूटा है, जिसकी वह से तबाही मची है।
नेपाल गए पर्यटकों का क्या हुआ?
नेपाल पुलिस और प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार अब तक 95 शव बरामद हो चुके हैं। सबसे ज्यादा मौतें चितवन में 33, धादिंग में 18, गोरखा में 16, नुवाकोट और नवलपुर में 11-11, तनहुं में 5 और रसुवा में 1 हुई हैं। कई लोग घायल भी हुए हैं। बाढ़ रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी क्षेत्र में शुरू हुई और नुवाकोट, धादिंग तथा आसपास के जिलों तक फैलती चली गई। नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार अभी भी सैकड़ों पर्यटक लापता हैं। नेपाल पर्यटन बोर्ड के मुताबिक भारत के 133 से ज्यादा पर्यटक लापता हैं। कई पर्यटक कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जा रहे थे। नेपाली सेना और पुलिस ने बचाव अभियान चलाया है।
भारत का रुख क्या है?
नरेंद्र मोदी , प्रधानमंत्री:-
मैंने प्रधानमंत्री बालेनद्र शाह से बात की और नेपाल में आई बाढ़ में जान गंवाने वालों के प्रति संवेदना व्यक्त की। इस मुश्किल समय में, भारत के लोग नेपाल में अपने भाइयों और बहनों के साथ एकजुटता से खड़े हैं। भारत नेपाल को हर संभव मानवीय सहायता देने के लिए तैयार है। हमारी टीमें बचाव और राहत कार्यों के लिए मिलकर काम कर रही हैं।
भोटेकोशी और त्रिशूली की तबाही का भारत में असर क्यों?
भोटेकोशी नदी की मूल धारा तिब्बत से आती है। नेपाल के नुवाकोट और रसुवा इलाके के पास त्रिशूली नदी में यह मिल जाती है। भोटेकोशी के मिलने के बाद त्रिशूली नदी को विस्तार मिल जाता है। त्रिशूली नदी देवघाट में काली गंडकी से मिलकर नारायणी नदी बनाती है। यह भारत में वाल्मीकि नगर की सीमा के रास्ते दाखिल होती है।भारत में इस नदी को गंडक के नाम से जानते हैं। नेपाल में जब-जब भारी बारिश या ग्लेशियर पिघलता है, बाढ़ का असर, भारत में दिखता है। नेपाल का अतिरिक्त जलप्रवाह गंडक नदी के रास्ते बिहार के मैदानी इलाकों में पहुंचता है।
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कौन से इलाकों के ज्यादा प्रभावित होने की आशंका है?
गंडक से बिहार के 7 जिले जुड़े हुए हैं। पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सीवान, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली। अगर गंडक में बाढ़ आती है तो इन जिलों का प्रभावित होना तय है। बिहार सरकार पहले ही सतर्क है। उत्तर प्रदेश के दो जिले भी इसके असर से जूझ सकते हैं। महाराजगंज और कुशीनगर।
बाढ़ से निपटने की बिहार की तैयारी क्या है?
गृहमंत्री अमित शाह ने बिहार के मुख्यमंत्री
सम्राट चौधरी
से बात की है। बिहार के जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा है, 'नेपाल में आई बाढ़ के मद्देनजर बिहार सरकार पूरी तरह सतर्क है। नेपाल के तिब्बत प्रभाग में ग्लेशियर फटने से त्रिशूली नदी के रास्ते गंडक में पानी बढ़ने की संभावना है। करीब 2.5 लाख क्यूसेक पानी वाल्मीकिनगर बराज से गुजरने का आकलन है। फिलहाल गंडक का जलस्तर कम है। अगले 5–6 घंटे से पूरी रात विशेष निगरानी रहेगी। समस्या पहले से बड़ी है, लेकिन फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। अतिरिक्त राहत टीमें एवं आवश्यक सामग्री तैयार हैं। बिहारवासियों से अपील है कि सतर्क रहें, घबराएं नहीं। सरकार पूरी तरह मुस्तैद है।'
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बिहार सरकार ने नेपाल के कई जिलों में अचानक आई बाढ़ के बाद गंडक नदी में पानी बढ़ने की आशंका को देखते हुए पूरे तंत्र को हाई अलर्ट पर रख दिया है और वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बराज के सभी 36 फाटक खोल दिए गए हैं। उपमुख्यमंत्री एवं जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने बताया कि बुधवार दोपहर तक बराज से करीब 86 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा चुका था और जलप्रवाह और बढ़ने के संकेत हैं, इसलिए एहतियात के तौर पर सभी फाटक खोल दिए गए हैं।
गंडक बेसिन के सभी जिलों को अलर्ट जारी कर दिया गया है। सरकार ने सभी विभागों को जरूरी सामग्री का भंडारण, तटबंधों का नियमित निरीक्षण और चौबीस घंटे निगरानी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। नेपाल के देवघाट गेज स्टेशन पर नारायणी नदी का जलस्तर 4.77 मीटर है, जबकि चेतावनी स्तर 7.30 मीटर और खतरे का निशान 9 मीटर है।
जलस्तर तेजी से बढ़ने पर करीब साढ़े तीन घंटे में इसका असर गंडक बराज तक पहुंच सकता है। इससे पहले मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली समेत संवेदनशील जिलों में निगरानी बढ़ाने, ध्वनि यंत्रों से लोगों को चेतावनी देने, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें तैनात रखने तथा लोगों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं।
बाढ़ से निपटने के लिए कितनी तैयार है यूपी सरकार?
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री
योगी आदित्यनाथ
ने महराजगंज और कुशीनगर के जिला प्रशासन को किसी भी आपात स्थिति के लिए तैयार रहने और जरूरी कदम उठाने का निर्देश दिया। नेपाल में आई बाढ़ से महराजगंज और कुशीनगर में गंडक और नारायणी नदियों का जलस्तर बढ़ने की आशंका है। महराजगंज में जिला प्रशासन ने अलर्ट जारी कर दिया है। गंडक नदी की 24 घंटे निगरानी का आदेश दिया गया है, क्योंकि पानी बढ़ने से निचले इलाकों पर असर पड़ सकता है।
- महाराजगंज: जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल ने राजस्व विभाग, पुलिस, आपदा राहत बल और अन्य एजेंसियों को सतर्क रहने का निर्देश दिया है। जरूरत पड़ने पर नदी किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने की व्यवस्था करने को कहा गया है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदियों, नालों और जलभराव वाले इलाकों के पास न जाएं। केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें। बच्चों, बुजुर्गों और मवेशियों को संवेदनशील इलाकों से दूर रखें।
- कुशीनगर: जिला प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। मरचाहवा, शिवपुर और अन्य गांवों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का आदेश दिया गया है। लोगों से सुरक्षित जगहों पर जाने का आग्रह करते हुए घोषणाएं की जा रही हैं। नेपाल की बाढ़ के कारण अगले दो घंटों में नारायणी नदी का जलस्तर और बढ़ सकता है। जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने बताया कि नेपाल में भारी बारिश को देखते हुए सभी विभागों को अलर्ट पर रखा गया है। खड्डा तहसील में नारायणी नदी के किनारे बाढ़ की आशंका वाले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष रूप से सतर्क रहने की सलाह दी गई है। ग्रामीणों से ऊंचे और सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए तैयार रहने को कहा गया है। शिवपुर, हरिहरपुर, नारायणपुर, मरचहवा और बसंतपुर गांवों में खास निगरानी रखी जा रही है।
अगर नेपाल में आपके अपने फंसे हैं तो क्या करें?
नेपाल की राजधानी काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने लापता लोगों की पड़ताल के लिए दो इमजेंसी नंबर जारी किए हैं। अगर आपके अपने फंस गए हैं तो आप +977 985 131 6807 और +977 970 910 7500 पर फोन कर सकते हैं। अगर उत्तर प्रदेश का कोई नागरिक नेपाल में फंसा हुआ है या वहां बाढ़ या किसी त्रासदी के कारण उसे किसी भी तरह की मदद की जरूरत है, तो उनके परिवार के सदस्यों को तुरंत 1070 पर संपर्क कर सकते हैं।
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