अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम का 71 साल की उम्र में निधन हो गया है। वह अमेरिका के साउथ कैरोलिना राज्य से लंबे समय तक सीनेटर रहे है और
डोनाल्ड ट्रंप
के करीबियों में शुमार थे। शनिवार शाम को अचानक बीमारी के बाद निधन हो गया। उनकी उम्र 71 साल थी। उनके कार्यालय ने रविवार को एक्स पर इसकी पुष्टि की है। वह अपने विवादित बयानों की वजह से दुनियाभर में बदनाम रहे हैं।
लिंडसे ग्राहम ने विदेश नीति, युद्ध और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर कई बार तीखी टिप्पणियां कीं। इस साल फरवरी में ग्राहम ने कहा था कि भारत ने रूसी तेल की खरीदारी बहुत कम कर दी है। उन्होंने ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ को अच्छा उदाहरण बताया। वह भारत पर भी 500 फीसदी टैरिफ लगाने की मंशा रखते थे।
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विवादित बयान जो चर्चा में रहे
- 500% टैरिफ: लिंडसे ग्राहम ने जनवरी में ही एक बिल का जिक्र किया था जिसमें अमेरिका के राष्ट्रपति को रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार होता। ग्राहम का कहना था कि इससे पुतिन की युद्ध मशीन को फंडिंग रोकने में मदद मिलेगी। वह भारत पर इसे लगवाने के पक्षधर थे।
- खामेनेई को मार दो: फॉक्स न्यूज के साथ इंटरव्यू में लिंडसे ग्राहम अली खामेनेई को आधुनिक हिटलर बताया था और उन्हें नाजी और हिटलर करार दिया था। उन्हें सदी का भयानक व्यक्ति तक बता दिया था।
- ग्रीनलैंड: लिंडसे ग्राहम ने ग्रीनलैंड के बारे में कई विवादित बयान दिए थे। यूरोपीय देशों का भी उन्होंने मजाक उड़ाया था, अगर घबराए हो तो बीयर पी लो या डॉक्टर के पास जाओ।
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पाकिस्तान को मध्यस्थ मानने पर उठाए सवाल?
मई में लिंडसे ग्राहम ने पाकिस्तान को ईरान-अमेरिका युद्ध में मध्यस्थ बनाने पर सवाल उठाया। उन्होंने पाकिस्तान से कहा कि वह इजरायल को राजनयिक रूप से मान्यता दे। लिंडसे ग्राहम ने दावा किया कि पाकिस्तानी हवाई अड्डों पर ईरानी सैन्य विमान रखे गए हैं और पाकिस्तान इजरायल के खिलाफ है। डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान की मध्यस्थता का समर्थन किया था, लेकिन ग्राहम के बयान से विवाद हो गया था। ग्राहम अपने सख्त और विवादित बयानों के लिए जाने जाते थे।
कौन थे लिंडसे ग्राहम?
अमेरिकी राजनेता रहे हैं। दक्षिण कैरोलाइना राज्य से रिपब्लिकन पार्टी के सीनेटर थे। वह 1995 से राजनीति में सक्रिय थे। पहले हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में और 2003 से सीनेट में उन्होंने अपनी भूमिका निभाई है। वह धुर दक्षिणपंथी नेता थे। यूक्रेन को सैन्य सहायता देने के पैरोकार रहे हैं। वह चीन के प्रति सख्त रुख अपनाते हैं।