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सीजफायर टूटा, ईरान के तेल पर प्रतिबंध, झड़प से क्या हासिल करना चाहते हैं ट्रंप?

अमेरिका ने ईरान पर फिर हमला किया है और ईरानी तेल पर नए प्रतिबंधों का एलान किया है। नए तकरार की वजह क्या है, आइए समझते हैं।

Strait of Hormuz

अमेरिकी नौसेना। Photo Credit: US Navy/X

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अमेरिका ने मंगलवार को ईरान पर एक बार फिर हमला किया है। ईरान के तेल पर एक बार फिर अमेरिका ने नए सिरे से प्रतिबंधों का एलान किया है। अमेरिका का तर्क है कि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट के पास व्यापारिक जहाजों पर हमला किया है, जिसके जवाब में अमेरिका ने नया हमला किया है।
 

डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन का कहना है कि ईरान ने हाल ही में हुए युद्धविराम समझौते का उल्लंघन किया है। डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ हफ्ते पहले ही ईरान के साथ युद्धविराम को पूर्ण समर्पण बताया था, लेकिन अब स्थिति फिर बिगड़ रही है। 

ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत के बाद उनका शव इराक ले जाया गया है। अंतिम संस्कार की तैयारियां चल रही हैं लेकिन इसी बीच अमेरिका ने बड़ा हमला बोल दिया है। अब अचानक वैश्विक तेल की कीमतें भी बढ़ गई हैं।

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अमेरिका ने हमला क्यों किया, प्रतिबंध क्यों लगाए?

अमेरिकी सेना ने होर्मुज स्ट्रेट के पास 3 व्यापारिक जहाजों पर ईरानी हमलों के जवाब में ईरान के ठिकानों पर भीषण बमबारी की है। सेंट्रल कमांड ने इसे सजा बताया और कहा कि ईरान ने निर्दोष नागरिकों वाले जहाजों पर हमला करके युद्धविराम तोड़ा। अमेरिका ने ईरानी तेल पर लगाए गए प्रतिबंध वापस लगा दिए हैं। ईरान को मिलने वाली राहत अब खत्म हो गई है। 

युद्धविराम समझौता क्या था?

ईरान और अमेरिका के बीच कुछ हफ्ते पहले एक समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे। इसके तहत ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को खोल दिया था। अमेरिका ने 60 दिनों के लिए ईरानी तेल निर्यात पर प्रतिबंध हटा दिए थे। ईरान को तेल बेचकर पैसा कमाने की छूट मिल गई थी। ट्रंप इसे अपनी कूटनीतिक जीत बता रहे थे।

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ईरान नहीं, अमेरिका ने तोड़ा है सीजफायर

ईरान का कहना है कि वह समझौते का पालन कर रहा है, लेकिन कुछ जहाज नियमों का उल्लंघन कर रहे थे। ईरानी अधिकारी ने कहा कि बिना बातचीत के जहाज चलाने पर खतरा रहेगा। वहीं अमेरिका कहता है कि होर्मुज अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है और ईरान किसी को रोक नहीं सकता।

डोनाल्ड ट्रंप, राष्ट्रपति, अमेरिका:-
अगर ईरान समझौता तोड़ेगा तो हम फिर बमबारी शुरू कर देंगे।


तेल की कीमतों पर क्या असर पड़ा है? 

ब्रेंट क्रूड तेल की कीमत 3 प्रतिशत बढ़कर 76 डॉलर प्रति बैरल हो गई, जबकि अमेरिकी तेल की कीमत 70 डॉलर के ऊपर पहुंच गई। ईरान अपनी आय का करीब 50 फीसदी हिस्सा तेल बेचकर कमाता है। प्रतिबंध लगने से उसकी अर्थव्यवस्था पर फिर दबाव बढ़ेगा।

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प्रतिबंधों के साए में कैसे चलती है ईरान की अर्थव्यवस्था?

ईरान पहले छिपे टैंकरों का इस्तेमाल करके चीन जैसे देशों में तेल बेचता था। अब होर्मुज में अमेरिकी निगरानी बढ़ गई है तो यह राह कठिन होती नजर आ रही है। अगर ऐसे ही तनाव खत्म नहीं हुआ तो एक बार फिर ईरान अस्थिर की भविष्य की ओर बढ़ सकता है। 

अब आगे क्या?

विशेषज्ञों कहना है कि यह युद्धविराम के लिए सबसे बड़ी परीक्षा है। अगर ईरान जवाबी कार्रवाई करता है या अमेरिका फिर नाकाबंदी लगाता है तो तनाव और बढ़ सकता है। डोनाल्ड ट्रंप युद्ध जल्द खत्म करने का दावा तो करते हैं लेकिन हमला भी वही कराते हैं। ईरान पर पूरी तरह काबू पाना अमेरिका के लिए अब आसान नहीं लग रहा है।  

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