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भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर बातचीत टली, अब क्या विकल्प हैं? समझिए

भारत-अमेरिका ट्रेड डील अपने नाजुक दौर में है। नई बैठक का मकसद दोनों देशों के बीच अंतरिम द्विपक्षीय ट्रेड एग्रीमेंट की शर्तों को तय करना था।

Narendra Modi and and Donald Trump

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। Photo Credit: PTI

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भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते की चर्चा के लिए इस सप्ताह निर्धारित तीन दिवसीय बैठक को स्थगित कर दिया गया है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से इस्तेमाल की गई आपातकालीन शक्तियों के तहत मनमाने ढंग से टैरिफ लगाने को असंवैधानिक करार दिया।

अमेरिकी कोर्ट ने कहा कि इंटनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का डोनाल्ड ट्रंप ने गैरकानूनी तरीके से इस्तेमाल किया है। इस फैसले के बाद अमेरिकी प्रशासन अब कानूनी प्रावधानों को लेकर नए सिरे से चर्चा कर रहा है। अब ट्रेड डील पर स्थिति अनिश्चित हो गई है। 

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क्यों स्थगित हुई है बातचीत?

भारत और अमेरिका दोनों पक्षों ने सहमति जताई है कि भारतीय मुख्य वार्ताकार दर्पण जैन और उनकी टीम की यात्रा को स्थगित किया जाए। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद टैरिफ पर क्या नीति बदलनी पड़ेगी, डोनाल्ड ट्रंप के 15 फीसदी ग्लोबल टैरिफ का असर क्या होगा, इसके प्रभावों का अभी अध्ययन किया जाएगा। मार्च में इस ट्रेड डील पर हस्ताक्षर होने वाले थे, जो अब प्रभावित हो सकता है। 

सुप्रीम कोर्ट और ट्रंप का टकराव जिम्मेदार

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि राष्ट्रपति टैरिफ नीति बनाने का अधिकार कांग्रेस के पास है, न कि राष्ट्रपति के पास। राष्ट्रपति ने अपनी आपातकालीन शक्तियों का दुरुपयोग किया है। इस फैसले से ट्रंप प्रशासन की पुरानी टैरिफ रणनीति प्रभावित हुई। अब सेक्शन 122 के तहत उन्होंने अगले 150 दिनों के लिए 15 फीसदी ग्लोबल टैरिफ का एलान कर दिया है। यह नए टकराव की वजह बन सकता है।

 

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कोर्ट की रोक के बाद भी कैसे जारी रहेगा टैरिफ?

अमेरिकी ट्रेजरी विभाग का कहना है कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन अन्य कानूनी रास्तों से टैरिफ जारी रखेगा। भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ पहले 50 फीसदी तक पहुंचा था, फिर फरवरी में 25 फीसदी  और 18 फीसदी टैरिफ को लेकर बात बनी। अब डोनाल्ड ट्रंप ने सभी देशों पर 15 फीसदी टैरिफ बढ़ा दिया है।

क्या हैं इस ट्रेड डील की मुश्किलें?

यह अनिश्चितता दोनों पक्षों के लिए चुनौतीपूर्ण है। समझौते का फ्रेमवर्क 6 फरवरी को जारी हुआ था, जिसमें टैरिफ में बदलाव पर बातचीत को लेकर सहमति बनी थी। अमेरिकी पक्ष अभी रणनीति तय नहीं कर पाया है, जिससे स्थायी समझौता मुश्किल लग रहा है। भारतीय वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि वह इन घटनाओं का अध्ययन कर रहा है। 

 

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अब भारत के पास क्या विकल्प हैं?

ज्यादातर विश्लेषकों का कहना है कि अगर डोनाल्ड ट्रंप, फिर से कोई मनमानी नहीं करते हैं तो यह फैसला भारत के लिए सकारात्मक साबित हो सकता है। अमेरिकी टैरिफ का भार कम हुआ है। भारत के पास बेहतर शर्तों पर बातचीत करने का विकल्प खुला है। 

 

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भारतीय एक्सपोर्ट पर असर क्या?

भारतीय निर्यातक इस तेज बदलाव से परेशान हैं। टैरिफ में उतार-चढ़ाव से व्यापार बाधित हो रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत अब रूसी तेल खरीद पर दबाव कम महसूस कर सकता है। भारत के लिए संतुलन ज्यादा जरूरी है, अब देश के पास इस समझौते को अधिक संतुलित बनाने का मौका है। हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप ने IEEPA के सेक्शन 122 का इस्तेमाल किया है। अभी उनके पास 150 दिनों की समय सीमा है। इसके बाद अगर ट्रंप को टैरिफ लगाना होगा तो इसके लिए संसद की मंजूरी अनिवार्य होगी। 


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