अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा में शांति के लिए 'बोर्ड ऑफ पीस' का गठन किया है। दावोस में विश्व आर्थिक मंच के मौके पर अपने नए गठित 'बोर्ड ऑफ पीस' के चार्टर पर उन्होंने हिस्सा लेने वाले देशों से हस्ताक्षर की अपील की। यह बोर्ड मूल गाजा में शांति स्थापित करने और पुनर्निर्माण के लिए बनाया गया है लेकिन इसे लेकर दुनियाभर में आशंका जाहिर की जा रही है। डोनाल्ड ट्रंप की बढ़ती भूमिका और इकतरफी जिम्मेदारी ने अब संयुक्त राष्ट्र के भविष्य को लेकर ही आशंकाएं पैदा की हैं।
डोनाल्ड ट्रंप ने इस बोर्ड को स्थायी रूप से अपनी अध्यक्षता में रखने का संकेत दिया है। उन्होंने कहा है कि गाजा में सफलता के बाद यह अन्य वैश्विक संकटों में भी हस्तक्षेप कर सकता है। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने अपने दूसरे कार्यकाल के महज 9 महीनों में आठ युद्धों को समाप्त किया। उन्होंने जोर देकर एक बार फिर दोहराया है कि भारत और पाकिस्तान की जंग उन्होंने रुकवाई है।
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बार-बार अपनी तारीफ कर रहे ट्रंप
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि बोर्ड गाजा के बाद अन्य क्षेत्रों में फैल सकता है और हम जो चाहें कर सकते हैं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के साथ सहयोग की बात कही। ट्रंप ने जोर दिया कि जिन 8 युद्धों को उन्होंने रोका, उनमें संयुक्त राष्ट्र की कोई भूमिका नहीं थी। भारत-पाकिस्तान संघर्ष का जिक्र करते हुए ट्रंप ने कहा कि उन्होंने दो परमाणु शक्ति संपन्न देशों के बीच युद्ध रोका, जिससे लाखों जानें बचाई गईं। डोनाल्ड ट्रंप के इस समारोह में पाकिस्तान आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर भी मौजूद थे। डोनाल्ड ट्रंप के दावों को भारत हमेशा से खारिज करता आया है।
भारत ने बैठक से बनाई दूरी
भारत को बोर्ड में शामिल होने के लिए पिछले सप्ताह करीब 60 देशों के साथ निमंत्रण भेजा गया था, लेकिन समारोह में कोई भारतीय प्रतिनिधि मौजूद नहीं था। भारत नेअभी इस पर फैसला नहीं लिया है। भारत फ्रांस और रूस जैसे प्रमुख साझेदावों के संपर्क में है। यह बोर्ड, संयुक्त राष्ट्र संघ की भूमिका को साफ तौर पर सीमित करता नजर आ रहा है।
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ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस पर कितने लोगों ने दस्तखत किए?
समारोह में 11 देशों के राष्ट्राध्यक्षों या सरकार प्रमुखों ने चार्टर पर हस्ताक्षर किए, जिनमें अर्जेंटीना, आर्मेनिया, अजरबैजान, बुल्गारिया, हंगरी, इंडोनेशिया, कजाकिस्तान, कोसोवो, पाकिस्तान, पैराग्वे और उज्बेकिस्तान शामिल हैं। आठ अन्य देशों—बहरीन, जॉर्डन, मोरक्को, कतर, सऊदी अरब, तुर्की, संयुक्त अरब अमीरात और मंगोलिया के वरिष्ठ अधिकारियों ने हस्ताक्षर किए। 19 देशों ने समारोह में हिस्सा लिया।
बड़े देश क्या ट्रंप के साथ हैं?
अमेरिका को छोड़कर कोई भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य या जी7 का सदस्य इस बोर्ड में शामिल नहीं हुआ है। कई यूरोपीय देशों ने निमंत्रण ठुकरा दिया है, जबकि चीन, जापान और अन्य कई ने अभी जवाब नहीं दिया है। बोर्ड के आधिकारिक चार्टर में गाजा का कोई जिक्र नहीं है। इसके बजाय इसमें संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में स्थिरता और स्थायी शांति को बढ़ावा देने की बात कही गई है।
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बिना एजेंडे के आगे बढ़ेंगे ट्रंप?
डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशर ने गाजा के लिए विकास योजना पेश की, जिसमें पुनर्निर्माण पर जोर था, लेकिन फिलिस्तीन पर उनका कोई स्पष्ट एजेंडा नजर नहीं आया। यह योजना इजराइल-हमास के बीच अमेरिका द्वारा मध्यस्थता किए गए समझौते के दूसरे चरण का हिस्सा है। अक्टूबर में अंतिम रूप से हुए सीजफायर के पहले चरण में हिंसा जारी रही है। दूसरे चरण में हमास का हथियार सहित सरेंडर और इजराइली सेनाओं की वापसी जैसे जटिल मुद्दों पर काम होना बाकी है।
भारत का क्या रुख होगा?
भारत इस मुद्दे पर पश्चिम एशिया के प्रमुख साझेदारों से चर्चा करेगा। 30-31 जनवरी को नई दिल्ली में अरब लीग के विदेश मंत्रियों की बैठक होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फरवरी में इजराइल की यात्रा पर जा सकते हैं। ट्रंप के इस कदम ने वैश्विक व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि बोर्ड संयुक्त राष्ट्र को चुनौती दे सकता है, जबकि ट्रंप इसे सफलता के बाद किसी भी संकट में उपयोग करने की बात कह रहे हैं। बोर्ड में शामिल होने के लिए स्थायी सदस्यता पर 1 अरब डॉलर का योगदान भी जरूरी बताया जा रहा है। भारत ने अभी तक दूरी बनाई है।