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सिक्योरिटी चैलेंज या अमेरिकी इश्क, पाकिस्तान पर क्यों घट रही चीन की दिलचस्पी?

एक समय पाकिस्तान के ऊर्जा क्षेत्र पर चीन ने खूब निवेश किया। अब पाकिस्तान के कहने पर भी चीनी कंपनियां पैसा लगाने को तैयार नहीं है। इसकी असल वजह क्या है?

Pakistan-China relations

पाकिस्तान पर चीन ने निवेश कम किया। (AI-generated image)

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चीन और पाकिस्तान के मौजूदा रिश्तों में गिरावट आई है। अमेरिका की तरफ मौजूदा सरकार और सेना प्रमुख असीम मुनीर का झुकाव अधिक है। वहां की शासन व्यवस्था में चीन का उतना दखल नहीं बचा है। पहले जहां पाकिस्तान की सरकार दिन रात चीन की तारीफ करते नहीं थकती थी। अब वही सरकार ट्रंप की आवभगत में लगी है। इसकी झलक जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (एफ) के मुखिया मौलाना फजलुर रहमान के एक बयान में दिखती है। मौलाना का कहना है कि पाकिस्तान की विदेश नीति की वजह से चीन इस्लामाबाद से नाराज है। 

 

पाकिस्तान के प्रति चीन की नाराजगी सिर्फ इस बात पर नहीं है कि पाकिस्तान का झुकाव अमेरिका की तरफ अधिक है, बल्कि पाकिस्तान में बढ़ते आतंकवाद से चीन परेशान है। चीन की लगातार मांग के बावजूद पाकिस्तान की सरकार चीनी कंपनियों, कर्मचारियों और मजदूरों को वह सुरक्षा नहीं दे पा रही है, जिसकी बीजिंग वर्षों से मांग करते आ रहा है। बलूचिस्तान से खैबर पख्तूनख्वा तक चीन के हितों को लगातार नुकसान पहुंचाया जा रहा है। उसके निवेश का एक बड़ा हिस्सा आज खतरे में है।

 

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बलूचिस्तान में चीन को बड़ा झटका

बलूचिस्तान में चीन ने कई प्रोजेक्टों को बंद कर दिया गया। पाकिस्तान की सरकार भी चीन की जगह अमेरिकी कंपनियों को तरजीह दे रही है। पाकिस्तान के प्रति चीन की नाराजगी की एक वजह यह भी है। इसके अलावा बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में बढ़ती आतंकी घटनाओं ने भी चीन को सोचने पर मजबूर किया है। यहां लगातार चीनी नागरिकों और कंपनियों को निशाना बनाया जा रहा है, जबकि पाकिस्तान की सरकार सीपीईसी की सुरक्षा में 12000 से अधिक जवानों को तैनात कर रखा है।

पाकिस्तान की बिजली कंपनियों से चीन खुश नहीं

पाकिस्तान इन दिनों आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। यही कारण है कि वह अपनी बिजली कंपनियों का निजीकरण कर रहा, ताकि विदेशी निवेश के माध्यम से धन जुटाया जा सके। चीन की सरकारी कंपनी पावरचाइना की सहायक कंपनी जियांग शी इलेक्ट्रिक पावर कंस्ट्रक्शन ने पहले फैसलाबाद इलेक्ट्रिक सप्लाई कंपनी (FESCO) के अधिग्रहण में रुचि दिखाई। मगर कंपनी ने बोली दस्तावेजों को निर्धारित प्रक्रिया के इतर मंदारिन भाषा में जमा कराया। इसका स्पष्ट मतलब यह निकला कि चीनी कंपनी को इस बोली में खास रूचि नहीं थी। कंपनी ने जानबूझकर चीन की आधिकारिक भाषा में दस्तावेज जमा करवाया। 

ऊर्जा क्षेत्र में बीजिंग का सबसे बड़ा निवेश

पाकिस्तान के ऊर्जा क्षेत्र का सबसे बड़ा निवेशक चीन है। मगर फैसलाबाद इलेक्ट्रिक सप्लाई कंपनी के अधिग्रहण से पीछे हटना का मतलब यह है कि पाकिस्तान पर बीजिंग की रूचि घटती जा रही है। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) के तहत लगभग 74 फीसद निवेश पाकिस्तान के ऊर्जा क्षेत्र में किया गया। वह कुल निवेश की बात करें तो पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में बीजिंग का करीब 68 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश है।

 

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निवेश में विविधता ला रहा चीन

पाकिस्तान की सरकार ने साल 2024 में मुजफ्फरगढ़ में 600 मेगावाट का सौर ऊर्जा प्लांट लगाने का फैसला किया। इस प्रोजेक्ट पर चीन ने बोली तक नहीं लगाई। एक समय पाकिस्तान के स्वच्छ ऊर्जा पर सबसे अधिक निवेश चाइना थ्री गॉर्जेस ग्रुप का था। लेकिन चीन के इस समूह ने 2016 के बाद पाकिस्तान में कोई निवेश नहीं किया। उसने पाकिस्तान की जगह मिस्र और जॉर्डन पर अधिक फोकस करना शुरू कर दिया। 

बकाया और सीपेक ने किया निराश

चीन ने पहले पाकिस्तान पर सीपेक के माध्यम से अधिक निवेश करने पर फोकस किया। अपेक्षित नतीजे नहीं निकलने पर अपने निवेश में विविधिता लाना शुरू किया। वह अफ्रीका और खाड़ी देशों में लगातार ऊर्जा निवेश बढ़ा रहा है। पाकिस्तान में सीपेक से जुड़े बिजली प्लांट भारी बकाया से जूझ रहे हैं। चीनी कंपनियां लगातार नकदी संकट से जूझ रही हैं। चीन की घटती रूचि की एक यह भी वजह है। 

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