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संजय राउत ने जिस अल्बानिया का जिक्र किया वहां सुप्रीम कोर्ट को क्यों फूंका गया?

अल्बानिया में छात्रों का प्रदर्शन हिंसक हो गया है। संसद और मंत्रालयों की इमारतों पर हमले किए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट को आग के हवाले कर दिया गया है।

अल्बानिया में प्रदर्शनकारियों ने सुप्रीम कोर्ट जलाया

अल्बानिया में प्रदर्शनकारियों ने सुप्रीम कोर्ट तक फूंक दिया है।

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शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह सरकार रही तो अराजकता फैलेगी। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को इस पर ध्यान देना चाहिए। राउत का आरोप है कि तिरंगा लहराने पर भी सरकार विरोध कर रही है। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी , गृह मंत्री अमित शाह और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को जिम्मेदार ठहराया।

 

संजय राउत ने कहा कि अराजकता फैलेगी ही। उन्होंने कहा कि अगर रिजीम चेंज नहीं होता है तो अराजकता फैलेगी, रुकेगी नहीं। सुप्रीम कोर्ट को ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि कोर्ट पर भरोसा होता है, अब कोर्ट की देश को बचा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार तिरंगा लहराने का विरोध कर रही है।

 

संजय राउत ने कहा, 'अराजकता फैलेगी ना। अब ये सरकार रहेगी तो अराजकता फैलेगी ना। यही मैं कहता हूं। सुप्रीम कोर्ट को ध्यान देना चाहिए। जब हम कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट का हमारा, कोर्ट पर हमारा विश्वास है और सुप्रीम कोर्ट ही देश को बचा सकता है। जिस प्रकार से इस देश में मोदी जी की सरकार तिरंगा लहराने पर भी विरोध कर रही है, उसका मतलब क्या है?'

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संजय राउत, शिवसेना (यूबीटी):-
ये राष्ट्रवादी, राष्ट्रभक्तों की सरकार नहीं है। फिर एक बार ईस्ट इंडिया कंपनी की सरकार यहां मोदी और शाह लाना चाहते हैं, महाराष्ट्र में फडणवीस लाना चाहते हैं। अगर  हम हमारे देश में तिरंगा नहीं लहरा सकते तो क्या कर सकते हैं? बोले किसका झंडा हम लहराएंगे? इससे अराजकता फैलेगी, और ये जिम्मेदारी मोदी, शाह और फडणवीस जी की है। सुप्रीम कोर्ट को उसमें ध्यान देना चाहिए।

अल्बानिया में हो क्या रहा है?

यूरोपीय देश अल्बानिया की राजधानी तिराना में सरकार विरोधी प्रदर्शन तेज हो गए हैं। प्रदर्शनकारी हिंसा पर उतर आए हैं, आगजनी कर रहे हैं। सरकारी इमारतों को फूंक दे रहे हैं। प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री एडी रामा का इस्तीफा मांग रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के दफ्तरों तक को फूंक दिया।  

 

 

अल्बानिया में क्यों भड़का है गुस्सा?

अल्बानिया में आंदोलन महीनों से चल रहा है। शुरुआत में लोग एक लग्जरी रिसॉर्ट प्रोजेक्ट के खिलाफ सड़कों पर उतरे। यह प्रोजेक्ट अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर से जुड़ा बताया गया है। इसकी योजना एक संरक्षित तटीय इलाके में है। लोगों का कहना है कि इससे पर्यावरण को नुकसान हो सकता है। उनका आरोप है कि सरकार ने निवेशकों के लिए नियम बदले। सरकार का कहना है कि परियोजना से आर्थिक फायदा होगा। समय के साथ गुस्सा बढ़ता गया। अब भ्रष्टाचार के आरोप, विश्वविद्यालयों की हालत, ऊंची फीस, कम आर्थिक मदद और युवाओं के लिए रोजगार की कमी भी मुद्दे बन गए हैं।

 

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अब कैसे हालात हैं?

14 अक्टूबर को बड़ी संख्या में छात्र तिराना की सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा मंत्रालय की इमारत और दो बैंक शाखाओं में आग लगा दी। उन्होंने पुलिस पर पत्थर भी फेंके। पुलिस ने आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। प्रदर्शन राजधानी के बाहर दूसरे शहरों में भी फैले। सुप्रीम कोर्ट के दफ्तरों तक आग पहुंची। अधिकारियों ने इसकी निंदा की। उनका कहना है कि न्यायिक संस्थाओं पर हमले से लोगों के न्याय पाने के अधिकार पर भी असर पड़ता है।

क्या प्रधानमंत्री इस्तीफा देंगे?

अल्बानिया में रामा 2025 में लगातार चौथी बार चुनाव जीते थे। उन्होंने इस्तीफा देने से इनकार किया है। उन्होंने अशांति के पीछे 'विदेशी हाथ' होने की बात कही है। सरकार के अधिकारियों ने हिंसा की निंदा की है और शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अपील की है। यूरोपीय संघ ने स्थिति पर चिंता जताई है और संयम बरतने को कहा है। यूरोपीय संघ ने प्रदर्शनकारियों और पत्रकारों के खिलाफ जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग के आरोपों की जांच की मांग भी की है। अल्बानिया यूरोपीय संघ में शामिल होने की कोशिश कर रहा है।

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