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14 साल के बच्चे की हार्ट अटैक से मौत, डॉक्टर से जानें बचाव का तरीका

राजस्थान के दौसा में 14 साल के बच्चे की हार्ट अटैक से मौत हो गई। आइए जानते हैं कि बच्चों को इस बीमारी से कैसे बचा सकते हैं?

children heart attack

प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit: Freepik

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पिछले कुछ समय में हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। पहले ये बीमारियां 50 या 60 साल की उम्र में होती थी लेकिन आज कल कम उम्र के लोगों को हार्ट अटैक आ रहा है। इतना ही नहीं इसकी चपेट में बच्चे भी आ रहे हैं। हाल ही में दौसा के समलेटी गांव में 14 साल के बच्चे की हार्ट अटैक से मौत हो गई। इस खबर ने पूरे इलाके को झकझोर को रख दिया है। परिजनों के मुताबिक बच्चा बिस्तर से पानी पीने के लिए उठा और बेहोश होकर गिर गया। आनन फानन में परिजन उसे अस्पताल लेकर गए जहां डॉक्टर ने जांच के बाद बच्चे को मृत घोषित कर दिया।

 

महवा अस्पताल की डॉक्टर माधुरी शर्मा ने बताया कि बच्चे की मौत सडन हार्ट अटैक की वजह से हो सकती है। मौत के कारणों का पता पोस्टमॉर्टम में ही चल सकता था। परिजनों ने पोस्टमॉर्टम करवाने से मना कर दिया। आइए डॉक्टर से जानते हैं कि क्या बच्चों की हार्ट अटैक से मौत हो सकती है और इससे बचने के लिए क्या करना चाहिए। इस बारे में हमने दिल्ली के मौलाना आजाद मेडिकल अस्पताल के प्रोफेसर और डॉक्टर आर.के कौशिक से बात की।

 

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क्या बच्चों की हार्ट अटैक से होती है मौत?

डॉक्टर कौशिक के मुताबिक बच्चों में हार्ट अटैक का खतरा बहुत कम होता है। अगर किसी बच्चे की मौत हार्ट अटैक से हुई है तो उससे पहले से कोई बीमारी होगी जिसके बारे में पहले से पता नहीं होगा। अगर बच्चे को भागने-दौड़ने में सांस चढ़ती है तो तुरंत चेकअप करवाएं।

 

अगर कोई बच्चा ओबीज है तो उसे हृदय संबंधी बीमारियां हो सकती है लेकिन हार्ट से सीधा मौत होने का चांस बहुत कम होता है। बच्चे के खानपान पर विशेष ध्यान दें। उन्हें बाहर का जंक फूड ने दें।

 

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कैसे करें बचाव?

  • अगर बच्चा अपनी उम्र से कम भाग-दौड़ करता है तो उसका चेकअप करवाएं। क्या पता बच्चे का हार्ट में कोई छोटा- मोटा डिफेक्ट हो जिसकी वजह से यंग ऐज में हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। बच्चे का पीडियाट्रिशन से चेकअप जरूर करवाएं।
  • अचानक गिर जाना, बिना किसी वजह बेहोशी होना हार्ट संबंधी बीमारी का लक्षण हो सकता है।
  • सांस लेने में तकलीफ होना।
  • बाहर का जंक फूड न खिलाएं।
  • बच्चे की फिजिकल एक्टिविटी पर ध्यान दें।
      


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