सर्दियों के मौसम में गर्म पानी से नहाना बहुत सुकून देता है लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपके गीजर के अंदर क्या चल रहा है? लंबे समय तक सफाई न होने के कारण गीजर के टैंक में कैल्शियम, मैग्नीशियम और जंग की एक मोटी परत जमा हो जाती है। यह जमा हुआ पानी गीजर की क्वालिटी को खराब कर देता है जिससे नहाते समय आपकी स्किन सीधे हानिकारक तत्वों के संपर्क में आती है।
जब गीजर के अंदर का पानी महीनों तक जमा रहता है और टैंक की सफाई नहीं होती तो इस वजह से वह बैक्टीरिया जैसे लेजियोनेला के पनपने का ठिकाना बन जाता है। गीजर का गंदा पानी स्किन के नेचुरल ऑयल को सोख लेता है जिससे स्किन बैरियर कमजोर हो जाता है। नतीजा यह होता है कि नहाने के बाद आपको स्किन में खिंचाव, सूखापन और रैशेज महसूस होने लगते हैं।
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स्किन की प्रॉब्लम
लगातार खुजली और सूखापन: टैंक में जमा हार्ड वॉटर मिनरल्स स्किन को रूखा बना देते हैं। इससे नहाने के तुरंत बाद खुजली शुरू हो जाती है।
एक्जिमा और सोरायसिस का बढ़ना: यदि आपको पहले से कोई स्किन क प्रॉब्लम है तो गंदा गर्म पानी उसे और अधिक गंभीर बना सकता है।
मुंहासे और ब्रेकआउट्स: गंदे पानी के बैक्टीरिया स्किन के छेद को बंद कर सकते हैं, जिससे शरीर पर दाने या मुंहासे हो सकते हैं।
सांस संबंधी बिमारियां
लीशियोनेयर्स रोग: यह फेफड़ों का इंफेक्शन है। इसके लक्षणों में तेज बुखार, खांसी और मांसपेशियों में दर्द शामिल है।
पोंटियाक बुखार: यह एक हल्का फ्लू जैसा इंफेक्शन है जो गंदे पानी के बैक्टीरिया के कारण होता है।
अन्य समस्याएं
बालों का झड़ना: सिर्फ स्किन ही नहीं, गीजर का भारी और गंदा पानी बालों को बेजान बनाकर उनके झड़ने की रफ्तार बढ़ा देता है।
एलर्जिक डर्मेटाइटिस: पानी में मौजूद जंग और मेटल के कण स्किन पर लाल चकत्ते और जलन पैदा कर सकते हैं।
गंदे पानी के संपर्क में आने से आंखों में जलन, लालिमा और खुजली हो सकती है।
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बचाव के उपाय
- हर सीजन की शुरुआत में प्रोफेशनल मैकेनिक से गीजर के टैंक की सफाई जरूर करवाएं।
- मैग्नीशियम एनोड रॉड बदलें: यह रॉड टैंक को जंग से बचाती है। इसे हर 1-2 साल में बदलना चाहिए।
- तापमान पर नियंत्रण: पानी को बहुत ज्यादा गर्म न करें, क्योंकि इससे स्केलिंग तेजी से होती है। गीजर का तापमान कम से कम 60°C पर सेट करें ताकि बैक्टीरिया पनपे ना।
- यदि पानी का रंग पीला या मटमैला दिख रहा हो, तो तुरंत सफाई करवाएं।