इंटरमिटेंट फास्टिंग एक ऐसी डाइट है जिसके बारे में हम सभी ने कभी न कभी सुना होगा। इसका इस्तेमाल लोग वजन घटाने, ब्लड शुगर कंट्रोल करने और शरीर को डिटॉक्स करने के लिए करते हैं। ज्यादातर लोग इस डाइट का इस्तेमाल वजन घटाने के लिए करते हैं। कई बॉलीवुड सेलिब्रिटीज ने दावा किया कि उन्होंने इंटरमिटेंट फास्टिंग के जरिए अपना वजन तेजी से घटाया है। इस लिस्ट में भारती सिंह, आलिया भट्ट, मलाइका अरोड़ा समते कई सितारों का नाम शामिल हैं।
इंटरमिटेंट फास्टिंग के फायदों के बारे में आप सभी नहीं सुना है लेकिन क्या आप जानते हैं यह दिल और किडनी के लिए खतरनाक हो सकता है। हाल ही में एक स्टडी हुई जिसमें बताया गया कि इंटरमिटेंट फास्टिंग करने से वजन घटाने में कुछ खास नहीं मदद नहीं मिलती है। आइए इस डाइट को लेने से होने वाले नुकसान के बारे में जानते हैं।
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क्या होता है इंटरमिटेंट फास्टिंग?
इंटरमिटेंट फास्टिंग में आपको एक तय समय में खाना होता है। कुछ लोग 10 घंटे उपवास करते हैं तो कुछ 12 घंटे उपवास रखते हैं। सबसे ज्यादा पॉपुलर 16:8 का पैटर्न होता है। इसमें आपको 16 घंटों तक उपवास रखना होता है और सिर्फ 8 घंटे के बीच में खाना होता है।

Diabetes & Metabolic Syndrome में पब्लिश हुई रिपोर्ट के अनुसार जो लोग 8 घंटे से कम के अंदर ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर सब कर लेते हैं उनमें हार्ट संबंधी बीमारी का खतरा 135% तक बढ़ जाता है।
दिल पर क्यों बढ़ता है असर?
दरअसल इंटरमिटेंट फास्टिंग की वजह से ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव होता है जिसकी वजह से कोर्टिसोल हार्मोन का प्रोडक्शन बढ़ सकता है। इसके अलावा लंबे समय तक फास्टिंग करने की वजह से जरूरी पोषक की कमी हो जाती है जिसके कारण हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
क्या किडनी को करता है प्रभावित?
अगर इंटरमिटेंट फास्टिंग को सही तरीके से किया जो जाए तो कोई दिक्कत नहीं होती है। साथ ही ब्लड शुगर को रेगुलेट करने में मदद करता है। अगर आपको किडनी संबंधित समस्या है तो किसी भी तरह का उपवास करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
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कोर्टिसोल का लेवल बढ़ता है
लंबे समय तक उपवास रखने की वजह से कोर्टिसोल का लेवल बढ़ जाता है। शरीर में कोर्टिसोल का लेवल हाई होने से थकान, एंग्जाइटी और तनाव महसूस होता है।
हार्मोनल इंबैलेंस
कई महिलाओं को लंबे समय तक फास्टिंग करने के कारण एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का लेवल बढ़ता है। हार्मोनल इंबैलेंस की वजह से पीरियड साइकिल पर असर पड़ता है, मूड खराब होता है और प्रेग्नेंसी में भी परेशानी आ सकती है। इसके अलावा मेटाबॉलिज्म को धीमा करता है।
डाइजेशन संबंधी परेशानियां
लंबे समय तक खाना नहीं खाने की वजह से गैस, एसिडिटी, पेट दर्द और कब्ज की समस्याएं हो सकती हैं।
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इंटरमिटेंट फास्टिंग वाले इन बातों का रखें ध्यान
- 12 से 14 घंटे तक इंटरमिटेंट फास्टिंग करना सही माना जाता है।
- आप क्या खा रहे हैं? इस बात का विशेष ध्यान दें।
- हेल्दी बैलेंस डाइट लें।
- बाहर का जंक फूड न खाएं।
- रात को खाली पेट न सोएं।